मध्य प्रदेश में डॉक्टरों की कमी खत्म करने का बड़ा फैसला: हर जिले में खुलेगा मेडिकल कॉलेज

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मध्य प्रदेश में डॉक्टरों की कमी खत्म करने का बड़ा फैसला: हर जिले में खुलेगा मेडिकल कॉलेज

सारांश

मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने मंदसौर में हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की। ₹25 करोड़ से अधिक की स्वास्थ्य परियोजनाओं का उद्घाटन। पीपीपी मॉडल से भी मेडिकल शिक्षा विस्तार की योजना। ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी दूर करना सरकार का मुख्य लक्ष्य।

Key Takeaways

  • मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने 24 अप्रैल को मंदसौर में प्रदेश के हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की।
  • राज्य में अभी लगभग 21 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं; श्योपुर और सिंगरौली में हाल ही में नए संस्थान खुले हैं।
  • ₹7.50 करोड़ की लागत से बने 100 बेड के नए वार्ड और ₹17.29 करोड़ की MCH इमारत का उद्घाटन मंदसौर में किया गया।
  • ₹4.73 करोड़ की चांदखेड़ी फांटा-खजूरिया सड़क परियोजना की आधारशिला रखी गई।
  • धार, बैतूल, पन्ना और कटनी में जिला अस्पतालों को अपग्रेड कर नए मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव है।
  • सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल से भी मेडिकल शिक्षा के विस्तार की योजना बना रही है।

मंदसौर, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश में डॉक्टरों की भारी कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने चिकित्सा शिक्षा के व्यापक विस्तार की रणनीति तैयार की है। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने शुक्रवार, 24 अप्रैल को मंदसौर के इंदिरा गांधी जिला अस्पताल में आयोजित एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश के हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोलने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।

डॉक्टरों की कमी: क्या है असली चुनौती?

उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने स्वीकार किया कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अधिक मेडिकल कॉलेज खोलकर स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी को चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा।

सरकार की योजना यह है कि राज्य के भीतर ही छात्र मेडिकल की पढ़ाई पूरी करें और स्नातक होने के बाद स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं में अपना योगदान दें। इससे न केवल डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि लोगों को समय पर इलाज भी मिल सकेगा।

मध्य प्रदेश में मेडिकल शिक्षा का वर्तमान ढांचा

फिलहाल मध्य प्रदेश में लगभग 21 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल भी शामिल है। हाल के वर्षों में श्योपुर और सिंगरौली जैसे जिलों में नए संस्थान खोले गए हैं।

राज्य सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से भी मेडिकल शिक्षा का विस्तार करने की योजना पर काम कर रही है। इसके अलावा, धार, बैतूल, पन्ना और कटनी जैसे जिलों में मौजूदा जिला अस्पतालों को अपग्रेड कर नए मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव है।

मंदसौर में ₹25 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन

देवड़ा ने इस अवसर पर ₹7.50 करोड़ की लागत से निर्मित 100 बिस्तरों वाले नए वार्ड और ₹17.29 करोड़ की लागत से बनी 100 बिस्तरों वाली 'मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य' (MCH) इमारत का उद्घाटन किया। उन्होंने ₹4.73 करोड़ की लागत वाली चांदखेड़ी फांटा-खजूरिया सड़क परियोजना की आधारशिला भी रखी।

लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएं समाज में अहम भूमिका निभाती हैं और नई MCH इमारत से माताओं व बच्चों को सीधा लाभ मिलेगा। इन नई सुविधाओं से बड़े अस्पतालों पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा।

गहरा संदर्भ: वादे और जमीनी हकीकत

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में प्रति एक लाख जनसंख्या पर डॉक्टरों की संख्या राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह खाई और भी गहरी है, जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अक्सर बिना विशेषज्ञ चिकित्सकों के संचालित होते हैं। सरकार का पीपीपी मॉडल आकर्षक जरूर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि निजी भागीदारी में फीस संरचना और सेवा की गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी जरूरी होगी, अन्यथा गरीब तबके को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों ने जिला-स्तरीय मेडिकल कॉलेजों के जरिए ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा में उल्लेखनीय सुधार किया है। मध्य प्रदेश यदि इस मॉडल को प्रभावी ढंग से लागू करे तो आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार की संभावना है।

आने वाले महीनों में सरकार द्वारा नए मेडिकल कॉलेजों के लिए स्थान चयन और बजट आवंटन की घोषणा अपेक्षित है, जो इस योजना की वास्तविक प्रगति का पैमाना होगी।

Point of View

लेकिन यह पहली बार नहीं है जब ऐसे वादे किए गए हैं — असली सवाल यह है कि क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता कैसी रहेगी। पीपीपी मॉडल तभी कारगर होगा जब गरीब मरीजों के लिए सेवाएं मुफ्त या सस्ती सुनिश्चित की जाएं, अन्यथा यह निजी पूंजी को सरकारी जमीन पर मुनाफा कमाने का जरिया बन सकता है। तमिलनाडु और कर्नाटक के अनुभव बताते हैं कि जिला मेडिकल कॉलेज तभी सफल होते हैं जब फैकल्टी और बुनियादी ढांचे पर पर्याप्त निवेश हो। मध्य प्रदेश को घोषणाओं से आगे बढ़कर ठोस समयसीमा और जवाबदेही तंत्र स्थापित करना होगा।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

मध्य प्रदेश में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए सरकार क्या कर रही है?
मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना पर काम कर रही है। इसके अलावा पीपीपी मॉडल के जरिए भी मेडिकल शिक्षा का विस्तार किया जाएगा ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़े।
मध्य प्रदेश में अभी कितने सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं?
वर्तमान में मध्य प्रदेश में लगभग 21 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें एम्स भोपाल भी शामिल है। हाल ही में श्योपुर और सिंगरौली जैसे जिलों में नए संस्थान खोले गए हैं।
मंदसौर में डिप्टी सीएम देवड़ा ने कौन सी परियोजनाओं का उद्घाटन किया?
डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने ₹7.50 करोड़ की लागत से बने 100 बिस्तरों वाले वार्ड और ₹17.29 करोड़ की MCH इमारत का उद्घाटन किया। साथ ही ₹4.73 करोड़ की चांदखेड़ी फांटा-खजूरिया सड़क परियोजना की नींव भी रखी।
मध्य प्रदेश में किन जिलों में नए मेडिकल कॉलेज खुलने का प्रस्ताव है?
धार, बैतूल, पन्ना और कटनी जिलों में मौजूदा जिला अस्पतालों को अपग्रेड कर नए मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव है। इन जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (MCH) इमारत से क्या फायदा होगा?
मंदसौर में बनी नई MCH इमारत से महिलाओं और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। इससे बड़े अस्पतालों पर मरीजों का बोझ भी कम होगा और स्थानीय स्तर पर ही उपचार संभव हो सकेगा।
Nation Press