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चीन का खनिजों पर बढ़ता कब्जा: अमेरिकी कांग्रेस में छिड़ी तीखी बहस, राष्ट्रीय सुरक्षा पर मंडराया खतरा

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चीन का खनिजों पर बढ़ता कब्जा: अमेरिकी कांग्रेस में छिड़ी तीखी बहस, राष्ट्रीय सुरक्षा पर मंडराया खतरा

सारांश

अमेरिकी कांग्रेस में महत्वपूर्ण खनिजों पर चीन के बढ़ते वर्चस्व को लेकर तीखी बहस छिड़ी। अमेरिका 40 से अधिक खनिजों के लिए आयात पर निर्भर, जबकि चीन के पास 80% बैटरी रीसाइक्लिंग क्षमता। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट पर्यावरण नियमों पर आमने-सामने।

मुख्य बातें

अमेरिकी कांग्रेस की हाउस एनर्जी और कॉमर्स सब-कमेटी में 25 अप्रैल 2025 को महत्वपूर्ण खनिजों पर तीखी बहस हुई।
अमेरिका 40 से अधिक जरूरी खनिजों की आधी से ज्यादा आपूर्ति के लिए आयात पर निर्भर है और कम से कम एक दर्जन खनिजों के लिए पूरी तरह आयात पर आश्रित है।
चीन लगभग दो दर्जन अनिवार्य खनिजों का उत्पादन लगभग अकेले करता है और 80 प्रतिशत से अधिक वैश्विक लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग क्षमता उसके पास है।
रिपब्लिकन पर्यावरण नियमों को बाधा मानते हैं, जबकि डेमोक्रेट इसे संरचनात्मक समस्या बताते हैं।
बेइया स्पिलर (रिसोर्सेज फॉर द फ्यूचर) ने उच्च लागत, कीमत अस्थिरता, लंबी अनुमति प्रक्रिया और श्रमिक कमी को चार मुख्य बाधाएं बताया।
यह बहस स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और रक्षा क्षेत्र में चीन के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच हो रही है।

वाशिंगटन, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी कांग्रेस में महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के मुद्दे पर गहरा राजनीतिक टकराव सामने आया है। हाउस एनर्जी और कॉमर्स सब-कमेटी की सुनवाई में सांसदों और उद्योग विशेषज्ञों ने एक स्वर में चेतावनी दी कि इन रणनीतिक खनिजों पर चीन का बढ़ता एकाधिकार अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

चीन का वैश्विक खनिज बाजार पर शिकंजा

सुनवाई की अध्यक्षता कर रहे चेयरमैन गैरी पामर ने कड़े शब्दों में कहा कि चीन ने वैश्विक खनिज बाजार पर कब्जा जमाने की सुनियोजित रणनीति अपनाई है, जिसके अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा पर दूरगामी और गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि चीन लगभग दो दर्जन ऐसे अनिवार्य खनिजों का उत्पादन लगभग अकेले करता है जो रक्षा और तकनीकी क्षेत्र के लिए अपरिहार्य हैं।

प्रिंसिपल मिनरल के प्रतिनिधि क्रिस लेहमैन ने सांसदों को बताया कि अमेरिका 40 से अधिक जरूरी खनिजों की आधी से ज्यादा आपूर्ति के लिए आयात पर निर्भर है, और कम से कम एक दर्जन खनिजों के लिए तो पूरी तरह विदेशी आयात ही एकमात्र स्रोत है। उन्होंने जोर दिया कि इस निर्भरता को तोड़ने के लिए स्पष्ट नियामक ढांचा, दीर्घकालिक निवेश और एकसमान मानकों की तत्काल जरूरत है।

रिपब्लिकन और डेमोक्रेट में पर्यावरण नियमों पर टकराव

रिपब्लिकन सांसदों ने दावा किया कि नियामक अनिश्चितता और पुराने पड़ चुके पर्यावरण कानूनों के कारण घरेलू खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण की रफ्तार थम गई है, जिससे विदेशी निवेश पलायन कर रहा है। इसके विपरीत, डेमोक्रेट सांसदों ने तर्क दिया कि पर्यावरण सुरक्षा को कमजोर करने से उच्च लागत, श्रमिकों की कमी और वैश्विक मूल्य अस्थिरता जैसी मूलभूत संरचनात्मक चुनौतियों का समाधान नहीं होगा।

वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य पॉल टोंको ने कहा कि अमेरिका को अविश्वसनीय विदेशी आपूर्ति पर अपनी निर्भरता घटानी होगी और साथ ही वैश्विक स्तर पर पर्यावरण एवं श्रम मानकों को ऊंचा उठाना होगा। उन्होंने मांग बढ़ाने वाली नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी उतना ही जरूरी बताया।

बैटरी रीसाइक्लिंग में चीन की बढ़त, अमेरिका पिछड़ा

रेडवुड मैटेरियल्स के जोश गबकिन ने एक चौंकाने वाला तथ्य सामने रखा — दुनिया की लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग क्षमता का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा चीन के नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि मौजूदा अमेरिकी नियमों के तहत लिथियम-आयन बैटरियों को खतरनाक कचरा माना जाता है, जिससे अनुमति प्रक्रिया इतनी लंबी हो जाती है कि नई तकनीक का विकास बाधित होता है।

गबकिन ने आगाह किया कि इन बाधाओं के कारण निवेश विदेशों की ओर खिसक रहा है, जबकि चीन इस अवसर का पूरा फायदा उठाते हुए लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी रीसाइक्लिंग कंपनियां अपने उत्पाद देश में ही सही तरह से उपयोग करने में असमर्थ हैं।

नियमों की अस्पष्टता और संरचनात्मक बाधाएं

एएमजी वैनाडियम की जेन नील ने नियामक अस्पष्टता को सबसे बड़ा जोखिम करार दिया। उनकी कंपनी वर्षों से संचालन कर रही है, फिर भी बदलती व्याख्याओं के कारण निरंतर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि असली समस्या नियमों की स्पष्टता का अभाव है, न कि पर्यावरण नियंत्रण।

'रिसोर्सेज फॉर द फ्यूचर' की बेइया स्पिलर ने चार प्रमुख बाधाएं रेखांकित कीं: अधिक घरेलू उत्पादन लागत, वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव, लंबी अनुमति प्रक्रियाएं और कुशल श्रमिकों की कमी। उन्होंने यह भी कहा कि आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन स्थापित होने पर ही दीर्घकालिक समझौते संभव होंगे, जिससे खनिज उत्पादकों को स्थिरता मिलेगी।

व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

यह पूरी बहस ऐसे नाजुक दौर में हो रही है जब स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और रक्षा तकनीक में वैश्विक प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर है। गौरतलब है कि अमेरिका पहले भी दुर्लभ मृदा तत्वों (Rare Earth Elements) पर चीनी निर्भरता को लेकर चिंता जता चुका है और इन्फ्लेशन रिडक्शन एक्ट जैसी नीतियों के जरिए घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन देने की कोशिश की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका ने अगले पांच से दस वर्षों में ठोस नीतिगत कदम नहीं उठाए, तो खनिज आपूर्ति शृंखला में चीन की पकड़ और मजबूत हो जाएगी।

आने वाले महीनों में कांग्रेस में इस विषय पर नए विधेयक और नीतिगत प्रस्ताव आने की संभावना है, जो अमेरिका की खनिज रणनीति की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

वही अपनी रक्षा तकनीक के लिए जरूरी खनिजों हेतु प्रतिद्वंद्वी पर निर्भर है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट की यह लड़ाई पर्यावरण बनाम उद्योग की नहीं, बल्कि दृष्टिहीन नीति-निर्माण की देन है। भारत को इस अमेरिकी सबक से सीखना चाहिए और अपनी खनिज नीति को अभी से सुदृढ़ करना चाहिए।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिकी कांग्रेस में महत्वपूर्ण खनिजों पर बहस क्यों हुई?
हाउस एनर्जी और कॉमर्स सब-कमेटी की सुनवाई में चीन के खनिज बाजार पर बढ़ते एकाधिकार को लेकर चिंता जताई गई। अमेरिका 40 से अधिक जरूरी खनिजों के लिए आयात पर निर्भर है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जा रहा है।
चीन के पास कितने खनिजों का एकाधिकार है?
चेयरमैन गैरी पामर के अनुसार चीन लगभग दो दर्जन अनिवार्य खनिजों का उत्पादन अकेले करता है। इसके अलावा दुनिया की 80 प्रतिशत से अधिक लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग क्षमता भी चीन के पास है।
अमेरिका में खनिज उत्पादन क्यों नहीं बढ़ पा रहा?
विशेषज्ञों ने चार मुख्य बाधाएं बताईं — अधिक घरेलू लागत, वैश्विक कीमतों में अस्थिरता, लंबी अनुमति प्रक्रियाएं और कुशल श्रमिकों की कमी। नियामक अस्पष्टता भी निवेश को हतोत्साहित कर रही है।
लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग में अमेरिका कहां खड़ा है?
रेडवुड मैटेरियल्स के जोश गबकिन के अनुसार वैश्विक लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग क्षमता का 80 प्रतिशत से अधिक चीन के पास है। अमेरिका में कड़े नियमों के कारण रीसाइक्लिंग कंपनियां अपने उत्पाद देश में ही सही तरह उपयोग नहीं कर पा रहीं।
इस खनिज संकट का भारत पर क्या असर हो सकता है?
वैश्विक खनिज आपूर्ति शृंखला में चीन का बढ़ता दबदबा भारत समेत सभी देशों की स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और रक्षा तकनीक को प्रभावित कर सकता है। भारत को भी अपनी खनिज आत्मनिर्भरता नीति को मजबूत करने की जरूरत है।
राष्ट्र प्रेस
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