सीता नवमी विशेष: इन 8 अभिनेत्रियों ने पर्दे पर जीवंत किया 'जानकी' का किरदार, दीपिका से नयनतारा तक का सफर
सारांश
Key Takeaways
- दीपिका चिखलिया ने रामानंद सागर के 'रामायण' में माता सीता का किरदार निभाया, जो आज भी सबसे यादगार माना जाता है।
- स्मृति ईरानी ने 2002 में बीआर चोपड़ा के 'रामायण' में सीता की भूमिका निभाई, जो उनके करियर का अहम हिस्सा है।
- नयनतारा ने 2011 की तेलुगु फिल्म 'श्री राम राज्यम' में माता सीता का किरदार निभाकर दक्षिण भारतीय दर्शकों का दिल जीता।
- देबीना बनर्जी ने 2008 के 'रामायण' धारावाहिक में सीता का रोल किया और सह-कलाकार गुरमीत चौधरी से 2011 में विवाह किया।
- मदिराक्षी मुंडले ('सिया के राम'), शिव्या पठानिया ('राम सिया के लव कुश') और नेहा सरगम ने भी माता सीता के किरदार को पर्दे पर जीवंत किया।
- 1996 की तेलुगु फिल्म 'बाल रामायणम' में स्मिता माधव ने सीता का रोल किया, जिसमें जूनियर एनटीआर ने बाल राम की भूमिका निभाई थी।
सीता नवमी 2025 के पावन अवसर पर आज पूरा देश माता सीता के जन्मोत्सव को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मना रहा है। बैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी दिन राजा जनक की पुत्री और भगवान राम की अर्धांगिनी माता सीता का अवतरण हुआ था। उनके त्याग, करुणा और पतिव्रता के आदर्श को भारतीय सिनेमा और टेलीविजन ने बार-बार पर्दे पर उकेरा है।
दीपिका चिखलिया — सबसे यादगार 'सीता'
भारतीय टेलीविजन के इतिहास में दीपिका चिखलिया का नाम माता सीता के किरदार से अटूट रूप से जुड़ा है। रामानंद सागर के कालजयी धारावाहिक 'रामायण' में उन्होंने जनक नंदिनी का रोल निभाया, जो दर्शकों के दिलों में आज भी जीवित है। इस सीरियल की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2020 के लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन पर इसके पुनः प्रसारण ने दशकों पुराने TRP रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए।
दीपिका को इस भूमिका के बाद इतनी श्रद्धा मिली कि लोग उनके पैर छूने और पूजा करने लगे। हालांकि, इस किरदार की छाया इतनी गहरी थी कि जब भी उन्होंने आधुनिक परिधान पहने, तब-तब उन्हें सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा — यह भारतीय दर्शकों के उस गहरे भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है जो एक कलाकार और उसके पवित्र किरदार के बीच बन जाता है।
स्मृति ईरानी — राजनीति से पहले 'सीता' की भूमिका
स्मृति ईरानी, जो आज भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं, ने 2002 में बीआर चोपड़ा और रवि चोपड़ा के टेलीविजन धारावाहिक 'रामायण' में माता सीता का किरदार निभाया था। इसमें नीतिश भारद्वाज ने श्री राम की भूमिका अदा की थी।
यह संस्करण रामानंद सागर के मूल धारावाहिक जितना लोकप्रिय नहीं हो सका, फिर भी दर्शकों ने इसे सराहा। स्मृति का यह किरदार उनके करियर की नींव बना, जिसके बाद उन्होंने 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में तुलसी का किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाई।
देबीना बनर्जी और गुरमीत चौधरी — पर्दे पर जोड़ी, जिंदगी में भी
रामानंद सागर के पुत्र आनंद सागर ने 2008 में नए 'रामायण' धारावाहिक का निर्माण किया। इसमें गुरमीत चौधरी ने श्री राम और देबीना बनर्जी ने माता सीता का किरदार निभाया। इस शो के दौरान दोनों के बीच प्रेम अंकुरित हुआ और 2011 में उन्होंने विवाह कर लिया। इस धारावाहिक की संवाद-शैली मूल संस्करण से काफी मिलती-जुलती थी, जिसे दर्शकों ने पसंद किया।
नयनतारा — दक्षिण भारत की 'सीता'
दक्षिण भारतीय सिनेमा की 'लेडी सुपरस्टार' नयनतारा ने 2011 में तेलुगु फिल्म 'श्री राम राज्यम' में माता सीता की भूमिका निभाई। इस फिल्म के भव्य विजुअल्स और प्रभावशाली संवादों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दक्षिण भारतीय भाषाओं में नयनतारा को उसी तरह याद किया जाता है जैसे हिंदी में दीपिका चिखलिया को।
अन्य अभिनेत्रियां जिन्होंने निभाया 'जानकी' का रोल
नेहा सरगम ने 2012 में सागर पिक्चर्स के धारावाहिक 'रामायण: सबके जीवन का आधार' में सीता का किरदार निभाया। दर्शकों ने उनके अभिनय को सराहा, हालांकि यह शो अधिक समय तक नहीं चला।
स्मिता माधव ने 1996 की तेलुगु फिल्म 'बाल रामायणम' में सीता का रोल किया, जिसमें जूनियर एनटीआर ने बाल राम का किरदार निभाया था। इसके अलावा शिल्पा मुखर्जी ने 1997 में 'जय हनुमान' में, नम्रता थापा ने 'रावण' में, मदिराक्षी मुंडले ने स्टार प्लस के धारावाहिक 'सिया के राम' में और शिव्या पठानिया ने 'राम सिया के लव कुश' में माता सीता की भूमिका को जीवंत किया।
सीता नवमी के इस पावन पर्व पर इन सभी अभिनेत्रियों का योगदान स्मरणीय है, जिन्होंने माता सीता के आदर्श चरित्र को पर्दे पर इस तरह प्रस्तुत किया कि करोड़ों दर्शकों के मन में श्रद्धा और भक्ति का भाव जागृत हुआ। आने वाले समय में भी भारतीय सिनेमा और टेलीविजन में माता सीता के किरदार को और नए रूपों में देखे जाने की संभावना बनी रहती है।