सर्वांगासन से हार्मोन बैलेंस और पाचन तंत्र होगा मजबूत, आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे
सारांश
Key Takeaways
- सर्वांगासन को आयुष मंत्रालय ने एंडोक्राइन सिस्टम और पाचन तंत्र को सपोर्ट करने वाला प्रमुख योगासन माना है।
- थायरॉइड और पैराथायरॉइड ग्रंथियों पर सकारात्मक प्रभाव डालकर यह आसन हार्मोन उत्पादन को नियंत्रित करता है।
- कब्ज, अपच, ब्लोटिंग और महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता में यह आसन अत्यंत प्रभावी है।
- शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को 10 सेकंड से शुरू करके धीरे-धीरे 30 सेकंड तक समय बढ़ाना चाहिए।
- गर्दन की समस्या, उच्च रक्तचाप या गर्भावस्था में इस आसन को विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें।
- यह आसन रक्त संचार, तनाव प्रबंधन और वजन नियंत्रण में भी सहायक है।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सर्वांगासन यानी शोल्डर स्टैंड एक ऐसा शक्तिशाली योगासन है जो न केवल हार्मोनल असंतुलन को दूर करता है, बल्कि पाचन तंत्र को भी गहराई से मजबूत बनाता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में इस आसन को एंडोक्राइन सिस्टम और पाचन क्रिया को सपोर्ट करने वाला प्रमुख योगाभ्यास बताया गया है। अगर आप कब्ज, अपच, ब्लोटिंग या मासिक धर्म की अनियमितता जैसी समस्याओं से परेशान हैं, तो यह आसन आपके लिए एक प्राकृतिक समाधान हो सकता है।
सर्वांगासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ
सर्वांगासन के नियमित अभ्यास से थायरॉइड और पैराथायरॉइड ग्रंथियों पर सकारात्मक दबाव पड़ता है, जो हार्मोन उत्पादन को नियंत्रित करती हैं। इससे मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और शरीर में हार्मोनल संतुलन बना रहता है।
महिलाओं में पीरियड्स की अनियमितता में भी इस आसन से उल्लेखनीय राहत मिलती है। यह आसन पेट के आंतरिक अंगों — जैसे आंतें, लिवर और पैंक्रियास — पर हल्का दबाव डालकर पाचन क्रिया को सक्रिय करता है।
इसके अतिरिक्त, सर्वांगासन रक्त संचार को बेहतर बनाता है, मानसिक तनाव घटाता है, शरीर की थकान दूर करता है और वजन नियंत्रण में भी सहायक होता है। नियमित अभ्यास से ऊर्जा स्तर में वृद्धि होती है।
सर्वांगासन करने की सही विधि
योग विशेषज्ञों के अनुसार, सर्वांगासन का अभ्यास निम्न चरणों में करना चाहिए। सबसे पहले योगा मैट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं। दोनों हाथ शरीर के बगल में रखें और हथेलियां जमीन की ओर हों।
अब गहरी सांस लेते हुए दोनों पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं — घुटने बिल्कुल सीधे रखें। पैरों, नितंबों और पीठ को एक साथ ऊपर उठाते हुए शरीर का पूरा भार कंधों पर लाएं।
ठोड़ी को छाती से लगाएं और दोनों हाथों से पीठ को सहारा दें, कोहनियां जमीन पर टिकी रहें। शरीर बिल्कुल सीधा खड़ा हो और पैर ऊपर की ओर तने हुए हों।
इस मुद्रा में 10 से 30 सेकंड तक सामान्य और गहरी सांस लेते हुए रहें। शुरुआत करने वाले लोग 10 सेकंड से आरंभ करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। अभ्यास के बाद धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लौटें।
आयुष मंत्रालय की सिफारिश और वैज्ञानिक आधार
आयुष मंत्रालय ने अपने आधिकारिक दिशा-निर्देशों में सर्वांगासन को एंडोक्राइन सिस्टम को संतुलित करने और पाचन तंत्र को सक्रिय रखने वाला योगासन घोषित किया है। यह उल्लेखनीय है कि भारत में थायरॉइड विकार से करोड़ों लोग प्रभावित हैं और पाचन संबंधी रोग भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
ऐसे में सर्वांगासन जैसे सरल और निःशुल्क योगाभ्यास का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) की तैयारियों के बीच आयुष मंत्रालय इस तरह के आसनों को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दे रहा है।
सावधानियां और विशेषज्ञ परामर्श
योग विशेषज्ञों का स्पष्ट निर्देश है कि गर्दन की समस्या, उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) या गर्भावस्था की स्थिति में इस आसन का अभ्यास केवल डॉक्टर या प्रमाणित योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें।
हमेशा खाली पेट इस आसन का अभ्यास करें — सुबह का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। शुरुआती दिनों में किसी अनुभवी योग गुरु के मार्गदर्शन में अभ्यास करना अधिक लाभकारी रहता है।
जैसे-जैसे देश में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं, सर्वांगासन जैसे पारंपरिक योगाभ्यास आधुनिक चिकित्सा के पूरक के रूप में और अधिक प्रासंगिक होते जा रहे हैं। आने वाले समय में आयुष मंत्रालय योग को स्कूल पाठ्यक्रम और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में और व्यापक रूप से शामिल करने की योजना पर कार्य कर रहा है।