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सर्वांगासन के फायदे: रक्त संचार सुधारे, एकाग्रता बढ़ाए — आयुष मंत्रालय की सलाह

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सर्वांगासन के फायदे: रक्त संचार सुधारे, एकाग्रता बढ़ाए — आयुष मंत्रालय की सलाह

सारांश

सर्वांगासन सिर्फ एक योगमुद्रा नहीं — यह शरीर के हर अंग को एकसाथ सक्रिय करने वाला संपूर्ण अभ्यास है। आयुष मंत्रालय इसे 'आसनों की रानी' मानता है। रक्त संचार, एकाग्रता और रोग प्रतिरोधक क्षमता — तीनों पर इसका सकारात्मक प्रभाव बताया गया है।

मुख्य बातें

सर्वांगासन को आयुष मंत्रालय ने 'आसनों की रानी' और शोल्डर स्टैंड पोज़ के रूप में मान्यता दी है।
यह आसन रक्त संचार सुधारता है, विशुद्धि चक्र को सक्रिय करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत करता है।
अभ्यास के दौरान शरीर का पूरा भार कंधों और कोहनी पर संतुलित होता है।
उच्च रक्तचाप , सर्वाइकल और हाइपरथायरायडिज्म से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही इसे सीखने की सलाह दी जाती है।

सर्वांगासन — जिसे आयुष मंत्रालय ने 'आसनों की रानी' की संज्ञा दी है — एक ऐसा संपूर्ण योगाभ्यास है जो शरीर के समस्त अंगों को एक साथ सक्रिय करता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से रक्त संचार में सुधार, मानसिक एकाग्रता में वृद्धि और आंतरिक अंगों की कार्यक्षमता बेहतर होती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार यह शरीर का संतुलन, लचीलापन और अंगों की कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने में सहायक है।

सर्वांगासन का अर्थ और महत्व

'सर्वांगासन' संस्कृत के दो शब्दों से बना है — 'सर्व' अर्थात सभी, और 'अंग' अर्थात शरीर के भाग। इस प्रकार यह आसन शरीर के प्रत्येक अंग को एकसाथ प्रभावित करता है। इसे अंग्रेज़ी में शोल्डर स्टैंड पोज़ भी कहते हैं।

इस आसन में शरीर का पूरा भार कंधों और कोहनी पर संतुलित होता है, जबकि पैर ऊपर की ओर उठे रहते हैं। यह मुद्रा गुरुत्वाकर्षण के विपरीत होने के कारण शिराओं (वेंस) में रक्त की वापसी की प्रक्रिया को बेहतर बनाती है और शरीर की कोशिकाओं को अधिक सक्रिय रूप से कार्य करने में सहायता मिलती है।

स्वास्थ्य लाभ

आयुष मंत्रालय के अनुसार सर्वांगासन विशुद्धि चक्र को सक्रिय और संतुलित करता है, जो ग्रीवा क्षेत्र की ग्रंथियों और उनसे जुड़े अंगों की कार्यप्रणाली को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है। इसके अतिरिक्त यह आसन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करने और मन को शांति एवं स्थिरता प्रदान करने में भी सहायक बताया गया है।

नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव में कमी आती है और एकाग्रता में उल्लेखनीय सुधार देखा जाता है। यह आसन शरीर के लचीलेपन को बढ़ाने के साथ-साथ आंतरिक अंगों को बेहतर पोषण पहुँचाने में भी मदद करता है।

सही तरीके से अभ्यास कैसे करें

विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआत में इस आसन को किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही सीखना चाहिए, क्योंकि गलत तरीके से करने पर गर्दन और पीठ पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है। आसन के दौरान शरीर का भार कंधों पर समान रूप से वितरित होना चाहिए।

योग विशेषज्ञ की सलाह के साथ इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें — विशेषकर वे लोग जो पहली बार इसका अभ्यास कर रहे हों।

किन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए

यदि आप निम्नलिखित स्थितियों से पीड़ित हैं, तो सर्वांगासन का अभ्यास न करें:

उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर), सर्वाइकल (गर्दन में दर्द), या हाइपरथायरायडिज्म से ग्रस्त व्यक्तियों को यह आसन करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए। पीठ की गंभीर समस्याओं में भी इसे करने से बचना उचित है।

योग और समग्र स्वास्थ्य

सर्वांगासन भारत की प्राचीन योग परंपरा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। आयुष मंत्रालय ने इसे अपनी अनुशंसित योगाभ्यास सूची में स्थान दिया है। नियमित योगाभ्यास को समग्र स्वास्थ्य — शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक — के लिए एक प्रभावी माध्यम माना जाता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस आसन को अन्य योगाभ्यासों के साथ संतुलित दिनचर्या के रूप में अपनाया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'आसनों की रानी' जैसे विशेषण के साथ इसके प्रचार में सावधानी ज़रूरी है — विशेषकर तब जब उच्च रक्तचाप और सर्वाइकल जैसी समस्याएँ भारत में तेज़ी से बढ़ रही हैं। मीडिया में अक्सर योग के लाभ तो उजागर होते हैं, पर मतभेद (contraindications) पर्याप्त स्पष्टता से नहीं बताए जाते। बिना प्रशिक्षित मार्गदर्शन के किए गए इस आसन से गर्दन की चोट का जोखिम वास्तविक है। जन-स्वास्थ्य दृष्टि से ज़रूरी है कि योग प्रचार के साथ-साथ चिकित्सकीय परामर्श की अनिवार्यता भी उतनी ही प्रमुखता से रेखांकित हो।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्वांगासन क्या है और इसे 'आसनों की रानी' क्यों कहते हैं?
सर्वांगासन एक संपूर्ण योगाभ्यास है जिसमें शरीर का पूरा भार कंधों पर संतुलित कर पैरों को ऊपर उठाया जाता है। आयुष मंत्रालय इसे 'आसनों की रानी' कहता है क्योंकि यह एकसाथ शरीर के सभी अंगों — रक्त संचार, ग्रंथियाँ, मन और रोग प्रतिरोधक क्षमता — को प्रभावित करता है।
सर्वांगासन से क्या-क्या स्वास्थ्य लाभ होते हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार इस आसन से रक्त संचार बेहतर होता है, विशुद्धि चक्र सक्रिय होता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत होती है और मानसिक एकाग्रता बढ़ती है। शिराओं में रक्त की वापसी की प्रक्रिया भी इससे बेहतर होती है।
सर्वांगासन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर), सर्वाइकल (गर्दन में दर्द) और हाइपरथायरायडिज्म से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए। पीठ की गंभीर समस्याओं में भी इसे करने से पहले चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।
सर्वांगासन सही तरीके से कैसे करें?
शुरुआत में इस आसन को किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में सीखना ज़रूरी है। अभ्यास के दौरान शरीर का भार कंधों और कोहनी पर समान रूप से वितरित होना चाहिए। बिना मार्गदर्शन के किए जाने पर गर्दन पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।
सर्वांगासन को दिनचर्या में कैसे शामिल करें?
योग विशेषज्ञ की सलाह से इसे अपनी नियमित योगदिनचर्या का हिस्सा बनाएँ। इसे अन्य आसनों के साथ संतुलित रूप से अभ्यास करें। विशेष स्वास्थ्य स्थितियों में पहले चिकित्सक से परामर्श लें।
राष्ट्र प्रेस
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