सर्वांगासन: थायराइड से लेकर तनाव तक, स्वास्थ्य के लिए एक सम्पूर्ण आसन
सारांश
Key Takeaways
- सर्वांगासन शरीर के सभी अंगों के लिए फायदेमंद है।
- यह थायराइड और चिंता को कम करता है।
- महिलाओं के लिए पीरियड्स में अनियमितता को सुधारता है।
- इसका नियमित अभ्यास पाचन में सुधार लाता है।
- गंभीर समस्या वाले व्यक्तियों को विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। असली सुंदरता केवल चेहरे या बाहरी रूप से नहीं, बल्कि आंतरिक स्वास्थ्य से भी उत्पन्न होती है। यदि आपका शरीर बीमारियों से मुक्त है और आप नियमित रूप से योगासन और संतुलित आहार लेते हैं, तो यह आपकी चमक को बढ़ाता है।
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, शारीरिक समस्याओं का समाधान योगासन में है। एक ऐसा आसन है, जिसे सर्वांगासन कहा जाता है। इसे 'मदर ऑफ ऑल आसन' भी कहते हैं, क्योंकि यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को एक साथ लाभ पहुंचाता है।
यह आसन सभी अंगों के लिए फायदेमंद है, जिससे इसे 'सर्वांगासन' नाम मिला। इसके नियमित अभ्यास से हार्मोनल संतुलन, पाचन सुधार और तनाव में कमी आती है। इस आसन का अभ्यास सुबह खाली पेट या शाम को किया जाना चाहिए।
सर्वांगासन करने की विधि आसान है। सबसे पहले, पीठ के बल लेट जाएं। फिर धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाएं और कमर को हाथों से सहारा दें। इस स्थिति में शरीर का पूरा वजन कंधों, बाहों और गर्दन पर होता है, जिससे इन हिस्सों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
आयुष मंत्रालय ने इसके महत्व को रेखांकित किया है। यह थायराइड और पैराथायरायड ग्रंथियों को सक्रिय करता है, जिससे चयापचय में सुधार होता है। यह रक्त संचार को बढ़ाने, पाचन में सुधार, रीढ़ को लचीलापन देने और एकाग्रता को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसके अलावा, यह तनाव और चिंता को कम करने में भी सहायक है।
महिलाओं के लिए भी यह आसन अत्यंत लाभकारी है। पीरियड्स में अनियमितता की स्थिति में यह इम्यूनिटी बढ़ाता है, त्वचा को चमकदार बनाता है और तनाव-डिप्रेशन से मुक्ति दिलाने में मदद करता है। इसके नियमित अभ्यास से हृदय स्वास्थ्य में भी सुधार होता है।
हालांकि, इसके नियमित अभ्यास से शरीर को अनेक लाभ हो सकते हैं, लेकिन गंभीर बीमारी या सर्जरी से गुजर चुके मरीजों को इससे बचना चाहिए या किसी योग विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।