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हस्तोत्तानासन: रक्त संचार बढ़ाने और थकान मिटाने वाला सरल योगासन, जानें इसके 5 प्रमुख लाभ

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हस्तोत्तानासन: रक्त संचार बढ़ाने और थकान मिटाने वाला सरल योगासन, जानें इसके 5 प्रमुख लाभ

सारांश

सूर्य नमस्कार की 12 चरणों वाली शृंखला में हस्तोत्तानासन एक ऐसा आसन है जो रक्त संचार सुधारता है, थकान घटाता है और रीढ़ को लचीला बनाता है। आयुष मंत्रालय की मान्यता प्राप्त यह सरल योगासन रोज़ाना मात्र कुछ मिनटों में शरीर और मन को ऊर्जावान बना सकता है।

मुख्य बातें

हस्तोत्तानासन सूर्य नमस्कार शृंखला का दूसरा और ग्यारहवाँ आसन है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन रक्त संचार बढ़ाने, थकान कम करने और शरीर में लचीलापन लाने में सहायक है।
पीछे झुकने की क्रिया से रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है और कमर दर्द में राहत मिलती है।
पेट की मांसपेशियों में खिंचाव से पाचन तंत्र सक्रिय होता है और अतिरिक्त चर्बी घटती है।
शुरुआती अभ्यासकर्ता इसे 3 से 5 बार दोहरा सकते हैं; गंभीर कमर दर्द या चक्कर की समस्या में विशेषज्ञ की देखरेख ज़रूरी है।

नई दिल्ली: आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में योग केवल शारीरिक फिटनेस का साधन नहीं रहा, बल्कि यह मानसिक संतुलन और ऊर्जा प्रबंधन का एक विश्वसनीय आधार बन चुका है। सूर्य नमस्कार की 12 चरणों वाली शृंखला में 'हस्तोत्तानासन' एक ऐसा महत्वपूर्ण आसन है, जिसे नियमित रूप से अभ्यास में लाने पर शरीर को रक्त संचार में सुधार, थकान में कमी और रीढ़ में लचीलेपन सहित कई लाभ मिलते हैं। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी इस आसन के महत्व को रेखांकित किया है।

हस्तोत्तानासन क्या है और इसका नाम कहाँ से आया

हस्तोत्तानासन संस्कृत के तीन शब्दों के संयोग से बना है — 'हस्त' (हाथ), 'उत्तान' (खिंचाव) और 'आसन' (मुद्रा)। यह एक खड़े होकर किया जाने वाला योगासन है, जो शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को नीचे से ऊपर की ओर प्रवाहित करता है। इस आसन की विशेषता यह है कि यह पूरे शरीर को एक साथ सक्रिय करता है।

सूर्य नमस्कार शृंखला में स्थान

हस्तोत्तानासन सूर्य नमस्कार की शृंखला में दूसरा और ग्यारहवाँ आसन है। शृंखला की शुरुआत में यह दूसरे चरण में आता है, जबकि वापसी के क्रम में — अश्व संचालनासन के पश्चात — इसे ग्यारहवें चरण में दोहराया जाता है। इस प्रकार यह आसन पूरी शृंखला को एक लय और संतुलन देता है।

आयुष मंत्रालय की मान्यता और प्रमुख लाभ

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, हस्तोत्तानासन शरीर में लचीलापन लाने, रक्त संचार बढ़ाने और थकान कम करने में उत्कृष्ट भूमिका निभाता है। इस आसन में शरीर पीछे की ओर झुकता है, जिससे रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है और कमर दर्द जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। इसके साथ ही, पेट की मांसपेशियों में खिंचाव से पाचन तंत्र सक्रिय होता है और पेट की अतिरिक्त चर्बी घटाने में सहायता मिलती है।

हस्तोत्तानासन करने की सही विधि

इस आसन को करना अपेक्षाकृत सरल है। सही विधि इस प्रकार है:

सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएँ और दोनों पैरों को आपस में जोड़ें। दोनों हाथों को ऊपर उठाएँ और हथेलियाँ एक-दूसरे की ओर मिलाएँ। गहरी साँस अंदर लेते हुए कमर से हल्का पीछे झुकें और गर्दन को भी पीछे की ओर ले जाएँ। इस स्थिति में 10 से 20 सेकंड तक रुकें। इसके बाद धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट आएँ। शुरुआती अभ्यासकर्ता इसे 3 से 5 बार दोहरा सकते हैं।

सावधानियाँ और विशेषज्ञ सलाह

हस्तोत्तानासन के अभ्यास में साँसों का सही तालमेल अत्यंत आवश्यक है — पीछे झुकते समय गहरी साँस लेना और सामान्य स्थिति में आते समय साँस छोड़ना ऊर्जा के संतुलन को बनाए रखता है। गौरतलब है कि जिन व्यक्तियों को गंभीर कमर दर्द या चक्कर आने की समस्या हो, उन्हें किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही इसका अभ्यास करना चाहिए। नियमित और सही तकनीक के साथ किया गया यह आसन दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने में सक्षम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह भी ध्यान देने योग्य है कि अधिकांश सरकारी प्रचार में व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थितियों के अनुसार सावधानियों का उल्लेख प्रायः सीमित रहता है। योग को सार्वजनिक स्वास्थ्य उपकरण के रूप में प्रभावी बनाने के लिए ज़रूरी है कि इसके साथ व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाए जाएँ, जो विशेष स्वास्थ्य स्थितियों में मार्गदर्शन दे सकें।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हस्तोत्तानासन क्या है और इसे कैसे करते हैं?
हस्तोत्तानासन एक खड़े होकर किया जाने वाला योगासन है, जिसमें दोनों हाथ ऊपर उठाकर कमर से पीछे की ओर हल्का झुका जाता है। इसे सीधे खड़े होकर, पैर जोड़कर, हाथ ऊपर उठाकर और गहरी साँस लेते हुए 10 से 20 सेकंड तक किया जाता है।
हस्तोत्तानासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन रक्त संचार बढ़ाता है, थकान कम करता है और रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है। इसके अतिरिक्त, पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और पेट की अतिरिक्त चर्बी घटाने में सहायक है।
सूर्य नमस्कार में हस्तोत्तानासन किस स्थान पर आता है?
हस्तोत्तानासन सूर्य नमस्कार की 12 चरणों वाली शृंखला में दूसरे और ग्यारहवें स्थान पर आता है। शृंखला की शुरुआत और वापसी — दोनों में यह आसन किया जाता है।
क्या हस्तोत्तानासन सभी के लिए सुरक्षित है?
सामान्य स्वास्थ्य वाले व्यक्तियों के लिए यह आसन सुरक्षित और लाभकारी है। हालाँकि, गंभीर कमर दर्द या चक्कर आने की समस्या से पीड़ित लोगों को किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही इसका अभ्यास करना चाहिए।
शुरुआती लोग हस्तोत्तानासन कितनी बार करें?
शुरुआती अभ्यासकर्ता इस आसन को 3 से 5 बार दोहरा सकते हैं। अभ्यास बढ़ने के साथ इसे सूर्य नमस्कार की पूरी शृंखला के भाग के रूप में नियमित रूप से किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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