गर्भावस्था में योगासन के फायदे: आयुष मंत्रालय की अपील — 'मां का पहला तोहफा सेहत है'
सारांश
Key Takeaways
आयुष मंत्रालय ने 2 मई 2026 को गर्भवती महिलाओं के लिए योग को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की विशेष अपील की है। मंत्रालय के अनुसार, गर्भावस्था के हर पड़ाव पर नियमित योगाभ्यास माँ को शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाता है — और एक स्वस्थ माँ ही स्वस्थ शिशु की नींव रखती है। मदर्स डे (10 मई) के अवसर पर मंत्रालय ने यह संदेश विशेष रूप से प्रसारित किया है।
गर्भावस्था में योग क्यों ज़रूरी है
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अक्सर पीठ दर्द, सिरदर्द, मतली और सांस लेने में तकलीफ जैसी सामान्य समस्याएँ होती हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित योगाभ्यास इन परेशानियों को काफी हद तक कम करने में सहायक है। योग से शरीर में लचीलापन आता है, मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं और प्रसव के समय आवश्यक शक्ति व सहनशक्ति का निर्माण होता है।
यह ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएँ और मानसिक तनाव एक साथ बढ़ सकते हैं। योग इन दोनों मोर्चों पर एक साथ काम करता है।
मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक जुड़ाव
गर्भावस्था में तनाव और चिंता का होना स्वाभाविक है। मंत्रालय का कहना है कि योग मन को शांत रखता है और माँ को अपने अजन्मे शिशु के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव महसूस कराता है। नियमित अभ्यास से स्ट्रेस और एंग्जायटी में उल्लेखनीय कमी देखी जाती है।
इसके अतिरिक्त, गर्भावस्था में नींद की समस्या से जूझने वाली महिलाओं के लिए योग विशेष रूप से लाभकारी बताया गया है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित योगाभ्यास से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है और गहरी, आरामदायक नींद आती है।
आयुष मंत्रालय की विशेष अपील
मदर्स डे 2026 के अवसर पर आयुष मंत्रालय ने कहा है —