26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गर्भावस्था में योगासन के फायदे: आयुष मंत्रालय की अपील — 'मां का पहला तोहफा सेहत है'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गर्भावस्था में योगासन के फायदे: आयुष मंत्रालय की अपील — 'मां का पहला तोहफा सेहत है'

सारांश

आयुष मंत्रालय ने मदर्स डे की पूर्व संध्या पर हर गर्भवती माँ से योग अपनाने की अपील की है। पीठ दर्द से लेकर मानसिक तनाव तक — मंत्रालय के अनुसार नियमित योगाभ्यास गर्भावस्था के हर पड़ाव पर माँ और शिशु दोनों के लिए लाभकारी है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 2 मई 2026 को गर्भवती महिलाओं को योग दिनचर्या में शामिल करने की अपील की।
योग से पीठ दर्द, मतली, सिरदर्द और सांस की तकलीफ जैसी सामान्य गर्भावस्था समस्याएँ कम होती हैं।
नियमित योगाभ्यास नींद की गुणवत्ता सुधारता है और स्ट्रेस व एंग्जायटी घटाता है।
मंत्रालय के अनुसार सही योग से प्रसव आसान होता है और प्रसव के बाद रिकवरी भी तेज़ होती है।
योगासन डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह से ही करने की अनुशंसा की गई है।

आयुष मंत्रालय ने 2 मई 2026 को गर्भवती महिलाओं के लिए योग को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की विशेष अपील की है। मंत्रालय के अनुसार, गर्भावस्था के हर पड़ाव पर नियमित योगाभ्यास माँ को शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाता है — और एक स्वस्थ माँ ही स्वस्थ शिशु की नींव रखती है। मदर्स डे (10 मई) के अवसर पर मंत्रालय ने यह संदेश विशेष रूप से प्रसारित किया है।

गर्भावस्था में योग क्यों ज़रूरी है

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अक्सर पीठ दर्द, सिरदर्द, मतली और सांस लेने में तकलीफ जैसी सामान्य समस्याएँ होती हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित योगाभ्यास इन परेशानियों को काफी हद तक कम करने में सहायक है। योग से शरीर में लचीलापन आता है, मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं और प्रसव के समय आवश्यक शक्ति व सहनशक्ति का निर्माण होता है।

यह ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएँ और मानसिक तनाव एक साथ बढ़ सकते हैं। योग इन दोनों मोर्चों पर एक साथ काम करता है।

मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक जुड़ाव

गर्भावस्था में तनाव और चिंता का होना स्वाभाविक है। मंत्रालय का कहना है कि योग मन को शांत रखता है और माँ को अपने अजन्मे शिशु के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव महसूस कराता है। नियमित अभ्यास से स्ट्रेस और एंग्जायटी में उल्लेखनीय कमी देखी जाती है।

इसके अतिरिक्त, गर्भावस्था में नींद की समस्या से जूझने वाली महिलाओं के लिए योग विशेष रूप से लाभकारी बताया गया है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित योगाभ्यास से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है और गहरी, आरामदायक नींद आती है।

आयुष मंत्रालय की विशेष अपील

मदर्स डे 2026 के अवसर पर आयुष मंत्रालय ने कहा है —

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे केवल मदर्स डे के प्रतीकात्मक संदेश तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भारत में मातृ मृत्यु दर और गर्भावस्था जटिलताओं के आँकड़े बताते हैं कि जागरूकता और पहुँच के बीच अभी भी बड़ी खाई है — विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहाँ प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। मंत्रालय को डिजिटल और आँगनवाड़ी नेटवर्क के माध्यम से प्रशिक्षित प्रसवपूर्व योग निर्देशकों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी, तभी यह सलाह व्यावहारिक धरातल पर उतर सकेगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गर्भावस्था में योग करना कितना सुरक्षित है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, गर्भावस्था के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए योगासन सुरक्षित हैं, बशर्ते इन्हें डॉक्टर या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह से किया जाए। सही तरीके से किया गया योग प्रसव को आसान बनाता है और प्रसव के बाद रिकवरी में भी मदद करता है।
गर्भावस्था में योग से कौन-कौन सी समस्याएँ कम होती हैं?
मंत्रालय के अनुसार नियमित योगाभ्यास से पीठ दर्द, सिरदर्द, मतली और सांस लेने में तकलीफ जैसी सामान्य गर्भावस्था समस्याएँ काफी हद तक कम होती हैं। साथ ही यह नींद की गुणवत्ता सुधारता है और तनाव व चिंता को घटाता है।
आयुष मंत्रालय ने मदर्स डे पर योग की अपील क्यों की?
आयुष मंत्रालय ने 10 मई को मदर्स डे के अवसर पर यह विशेष अपील की, यह संदेश देते हुए कि 'माँ का पहला तोहफा सेहत है।' मंत्रालय का मानना है कि एक स्वस्थ माँ ही अपने शिशु को स्वस्थ जीवन दे सकती है।
क्या योग प्रसव के बाद भी फायदेमंद है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, सही तरीके से किए गए योग से न केवल प्रसव आसान होता है, बल्कि प्रसव के बाद रिकवरी भी तेज़ होती है। हालाँकि प्रसवोत्तर योग शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।
गर्भावस्था में योग कब से शुरू करना चाहिए?
मंत्रालय ने गर्भावस्था के हर पड़ाव पर योग को उपयोगी बताया है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि आसनों का चुनाव और समय डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार होना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले