कटिचक्रासन: लैपटॉप से गर्दन-पीठ दर्द का सरल योग समाधान, आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे

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कटिचक्रासन: लैपटॉप से गर्दन-पीठ दर्द का सरल योग समाधान, आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे

सारांश

लैपटॉप स्क्रीन के सामने घंटों बिताने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए आयुष मंत्रालय ने कटिचक्रासन को प्रभावी समाधान बताया है। यह सरल खड़े-होकर-किया-जाने वाला आसन रीढ़ को लचीला बनाता है, कमर दर्द घटाता है और मानसिक तनाव भी कम करता है — बस 3-3 बार, दोनों दिशाओं में।

Key Takeaways

कटिचक्रासन एक खड़े होकर किया जाने वाला योगासन है जिसमें कमर को दाईं-बाईं ओर पहिये की भाँति घुमाया जाता है। आयुष मंत्रालय इसे रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन और कमर क्षेत्र को मज़बूत बनाने के लिए विशेष रूप से उपयोगी मानता है। नियमित अभ्यास से कमर दर्द, कंधों की अकड़न, थकान और मानसिक तनाव में कमी आती है। इसे प्रत्येक पक्ष में 3-3 बार दोहराया जा सकता है; डेस्क जॉब करने वालों के लिए विशेष रूप से लाभदायक। हृदय रोगी, हर्निया के मरीज़ और हालिया पेट सर्जरी करा चुके लोग यह आसन न करें।

डिजिटल दौर में दफ्तर की कुर्सी और लैपटॉप स्क्रीन के सामने घंटों बिताना अब करोड़ों भारतीयों की दिनचर्या बन चुका है। लगातार झुककर बैठने से रीढ़ की हड्डी अपनी प्राकृतिक संरचना खोने लगती है, जिसके परिणामस्वरूप कंधों में जकड़न, गर्दन में दर्द और पीठ के निचले हिस्से में भारीपन जैसी समस्याएँ सामने आती हैं। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, कटिचक्रासन एक अत्यंत प्रभावी योगासन है जो इन समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक है।

कटिचक्रासन क्या है

कटिचक्रासन तीन संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है — 'कटि' (कमर), 'चक्र' (पहिया या घुमाना) और 'आसन' (मुद्रा)। यह एक खड़े होकर किया जाने वाला योगाभ्यास है जिसमें कमर को पहिये की भाँति दाईं और बाईं ओर घुमाया जाता है। आयुष मंत्रालय इसे रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन में सुधार और कमर क्षेत्र को मज़बूत बनाने के लिए विशेष रूप से उपयोगी मानता है।

कटिचक्रासन के प्रमुख लाभ

योग विशेषज्ञों के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी लचीली होती है और कमर, पीठ तथा कूल्हों की माँसपेशियों की प्रभावी स्ट्रेचिंग होती है। साथ ही पेट की माँसपेशियाँ सक्रिय होती हैं, जिससे पाचन तंत्र भी मज़बूत होता है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह आसन शरीर में प्राण शक्ति के प्रवाह को बेहतर बनाता है, जिससे ऊर्जा बढ़ती है और मानसिक तनाव कम होता है। जो लोग डेस्क जॉब में लंबे समय तक कार्य करते हैं, उनके लिए यह आसन विशेष रूप से लाभदायक बताया गया है।

कटिचक्रासन करने की सही विधि

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएँ। इसके बाद सांस भरते हुए दोनों हाथों को सामने की ओर लाएँ, हथेलियाँ एक-दूसरे के सामने रखें। अब सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे कमर से बाईं ओर मोड़ें — दाएँ हाथ को बाएँ कंधे पर रखें और बाएँ हाथ को पीठ के पीछे से घुमाकर दाईं कमर की ओर लाने का प्रयास करें। गर्दन को भी बाईं ओर घुमाएँ और पीछे की ओर देखें। इस स्थिति में कुछ सेकंड रुककर सामान्य रूप से सांस लेते रहें। सांस भरते हुए वापस सामने आएँ और यही प्रक्रिया दाईं ओर दोहराएँ। इसे प्रत्येक पक्ष में 3-3 बार किया जा सकता है।

किन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए

हृदय रोगियों, गंभीर पीठ दर्द से पीड़ित व्यक्तियों, हर्निया के मरीज़ों और पेट की हालिया सर्जरी करा चुके लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए। किसी भी नए योगाभ्यास को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहता है।

डेस्क वर्कर्स के लिए आगे का रास्ता

यह ऐसे समय में प्रासंगिक है जब भारत में वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड कार्यसंस्कृति के चलते मस्कुलोस्केलेटल समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। योग विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोज़ाना कटिचक्रासन के साथ संतुलित आहार और नियमित ब्रेक लेने की आदत डालने से इन समस्याओं को गंभीर होने से पहले ही रोका जा सकता है।

Point of View

लेकिन कार्यस्थल स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता अभी भी सीमित है। आयुष मंत्रालय का कटिचक्रासन पर ज़ोर सराहनीय है, परंतु यह भी ध्यान रखना ज़रूरी है कि योग अकेला समाधान नहीं — एर्गोनॉमिक कार्यस्थल, नियमित ब्रेक और चिकित्सकीय परामर्श भी उतने ही आवश्यक हैं। मुख्यधारा की स्वास्थ्य कवरेज अक्सर इन सरल लेकिन वैज्ञानिक रूप से समर्थित पारंपरिक उपायों को नज़रअंदाज़ करती है, जबकि ये लाखों मध्यवर्गीय कामकाजी भारतीयों के लिए सुलभ और प्रभावी विकल्प हो सकते हैं।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

कटिचक्रासन क्या है और इसे कैसे करते हैं?
कटिचक्रासन एक खड़े होकर किया जाने वाला योगासन है जिसमें कमर को पहिये की भाँति दाईं और बाईं ओर घुमाया जाता है। सीधे खड़े होकर हाथ सामने लाएँ, फिर सांस छोड़ते हुए कमर से एक ओर मोड़ें, गर्दन घुमाएँ और कुछ सेकंड रुकें — प्रत्येक पक्ष में 3-3 बार दोहराएँ।
लैपटॉप पर काम करने से होने वाले गर्दन-पीठ दर्द में कटिचक्रासन कैसे मदद करता है?
कटिचक्रासन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और कमर, पीठ तथा कूल्हों की माँसपेशियों की स्ट्रेचिंग करता है, जिससे लंबे समय तक बैठने से होने वाली जकड़न और दर्द कम होती है। योग विशेषज्ञों के अनुसार यह डेस्क जॉब करने वालों के लिए विशेष रूप से लाभदायक है।
क्या कटिचक्रासन को आयुष मंत्रालय ने मान्यता दी है?
हाँ, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार कटिचक्रासन एक प्रभावी और सरल योगासन है जो रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन में सुधार और कमर क्षेत्र को मज़बूत बनाने के लिए जाना जाता है।
कटिचक्रासन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
हृदय रोगी, गंभीर पीठ दर्द से पीड़ित, हर्निया के मरीज़ और हालिया पेट सर्जरी करा चुके लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए। किसी भी नए योगाभ्यास से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहता है।
कटिचक्रासन के अलावा और क्या उपाय हैं गर्दन-पीठ दर्द के लिए?
योग विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कटिचक्रासन के साथ संतुलित आहार, नियमित ब्रेक और एर्गोनॉमिक कार्यस्थल व्यवस्था से मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं को गंभीर होने से पहले रोका जा सकता है।
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