ओडिशा मेट्रो पुनर्जीवन: CM माझी के सकारात्मक संकेत, ₹6,255 करोड़ की परियोजना की समीक्षा शुरू

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ओडिशा मेट्रो पुनर्जीवन: CM माझी के सकारात्मक संकेत, ₹6,255 करोड़ की परियोजना की समीक्षा शुरू

सारांश

ओडिशा मेट्रो की कहानी एक अजीब मोड़ पर है — कैबिनेट ने DMRC से समझौता तोड़कर परियोजना रद्द की, और अब उसी सरकार के दरवाजे पर BJD सांसद जयपुर मॉडल लेकर खड़े हैं। CM माझी के सकारात्मक संकेत और BMRCL को मिली समीक्षा की जिम्मेदारी बताती है कि ₹6,255 करोड़ की यह परियोजना पूरी तरह दफन नहीं हुई है।

Key Takeaways

CM मोहन चरण माझी के कार्यालय ने पुष्टि की कि ओडिशा मेट्रो प्रस्ताव की जाँच और समीक्षा जारी है। BJD के राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा ने 6 अप्रैल को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और CM माझी को पत्र लिखकर परियोजना पुनर्जीवित करने की माँग की थी। ओडिशा मेट्रो की स्वीकृत लागत 2024 में ₹6,255 करोड़ निर्धारित थी; 50:50 SPV मॉडल के तहत केंद्र व राज्य प्रत्येक ₹3,100 करोड़ देंगे। राज्य कैबिनेट ने हाल ही में DMRC के साथ समझौता समाप्त कर भुवनेश्वर मेट्रो परियोजना औपचारिक रूप से रद्द की थी। BMRCL को प्रस्ताव की समीक्षा और शहरी परिवहन योजनाओं की नोडल एजेंसी बनाया गया है।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भुवनेश्वर-कटक-खुर्दा-पुरी मेट्रो परियोजना को पुनर्जीवित करने के प्रस्ताव पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। बीजू जनता दल (BJD) के राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा द्वारा उठाई गई इस माँग पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने पुष्टि की है कि प्रस्ताव की जाँच और समीक्षा जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य कैबिनेट ने हाल ही में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के साथ समझौता समाप्त कर परियोजना को औपचारिक रूप से रद्द किया था।

प्रस्ताव की पृष्ठभूमि

डॉ. सस्मित पात्रा ने 6 अप्रैल को केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिखकर ओडिशा मेट्रो परियोजना को आगे बढ़ाने की माँग की थी। इसके बाद यह प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया, जहाँ आवास एवं शहरी विकास विभाग ने इसे भुवनेश्वर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMRCL) को

Point of View

दूसरी ओर मुख्यमंत्री कार्यालय उसी परियोजना के पुनर्जीवन पर 'समीक्षा जारी' का संदेश देता है। जयपुर मॉडल का सुझाव तार्किक है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ओडिशा सरकार राजनीतिक इच्छाशक्ति और वित्तीय प्रतिबद्धता दोनों एक साथ दिखा पाएगी। ₹6,255 करोड़ की परियोजना जयपुर की तुलना में सस्ती जरूर है, पर बिना स्पष्ट समयसीमा और केंद्र की औपचारिक सहमति के, यह 'समीक्षा' महज राजनीतिक संतुलन साधने का माध्यम बन सकती है।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

ओडिशा मेट्रो परियोजना क्या है और इसे क्यों रद्द किया गया था?
ओडिशा मेट्रो परियोजना भुवनेश्वर-कटक-खुर्दा-पुरी कॉरिडोर पर प्रस्तावित मेट्रो रेल नेटवर्क है, जिसकी स्वीकृत लागत 2024 में ₹6,255 करोड़ थी। राज्य कैबिनेट ने DMRC के साथ समझौता समाप्त कर इसे औपचारिक रूप से रद्द कर दिया था और BMRCL को शहरी परिवहन की नोडल एजेंसी बनाया गया था।
CM माझी ने मेट्रो प्रस्ताव पर क्या संकेत दिए हैं?
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के कार्यालय ने पुष्टि की है कि BJD सांसद डॉ. सस्मित पात्रा द्वारा दिए गए मेट्रो पुनर्जीवन प्रस्ताव की जाँच और समीक्षा जारी है। यह सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, हालाँकि कोई औपचारिक निर्णय अभी नहीं लिया गया है।
जयपुर मेट्रो मॉडल क्या है और ओडिशा के लिए यह कैसे उपयोगी है?
जयपुर मेट्रो फेज-2 को केंद्र सरकार ने 50:50 केंद्र-राज्य SPV मॉडल के तहत मंजूरी दी है, जिसमें दोनों सरकारें बराबर-बराबर निवेश करती हैं। ओडिशा के लिए इस मॉडल को अपनाने पर केंद्र और राज्य प्रत्येक लगभग ₹3,100 करोड़ देंगे और शेष राशि VGF से जुटाई जाएगी।
ओडिशा मेट्रो से आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
पुरी-खुर्दा-भुवनेश्वर-कटक कॉरिडोर पर मेट्रो से लोगों को तेज, सुरक्षित और सस्ती यात्रा सुविधा मिलेगी। छात्रों, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों को लाभ होगा, पर्यटन बढ़ेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
BMRCL की इस प्रक्रिया में क्या भूमिका है?
भुवनेश्वर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMRCL) को आवास एवं शहरी विकास विभाग ने मेट्रो पुनर्जीवन प्रस्ताव 'सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई' के लिए अग्रेषित किया है। BMRCL अब शहरी परिवहन योजनाओं की नोडल एजेंसी भी है और प्रस्ताव की तकनीकी समीक्षा में केंद्रीय भूमिका निभाएगी।
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