सीबीआई ने मेरठ में सीजीएचएस की अतिरिक्त निदेशक नताशा वर्मा को ₹50,000 रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया
सारांश
Key Takeaways
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 1 मई 2026 को मेरठ स्थित सीजीएचएस स्वास्थ्य भवन, सूरजकुंड रोड में एक सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन के तहत अतिरिक्त निदेशक नताशा वर्मा और उनके निजी सहायक सन्नी को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोप है कि सीजीएचएस मुरादाबाद से मेरठ में एक कर्मचारी के तबादले में मदद के बदले ₹80,000 की रिश्वत की मांग की गई थी।
मुख्य घटनाक्रम
सीबीआई के अनुसार, यह मामला गुरुवार को दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी ने जाल बिछाते हुए शिकायतकर्ता को ₹50,000 की रिश्वत देने के लिए तैयार किया। तय योजना के अनुसार, जैसे ही निजी सहायक सन्नी ने अतिरिक्त निदेशक नताशा वर्मा की ओर से रिश्वत की राशि स्वीकार की, सीबीआई की टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। इसके तुरंत बाद दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया।
सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि यह पूरा अवैध लेनदेन स्वास्थ्य भवन, सीजीएचएस, सूरजकुंड रोड, मेरठ से संचालित किया जा रहा था। एजेंसी ने मामले से जुड़े अन्य संभावित पहलुओं की जांच भी शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस भ्रष्टाचार में और कौन-कौन शामिल हो सकता है।
सीबीआई की जांच का दायरा
फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और मामले की विस्तृत जांच चल रही है। सीबीआई सूत्रों के अनुसार, एजेंसी यह भी जानना चाहती है कि क्या इस तरह के तबादला-रिश्वत नेटवर्क के और भी सूत्रधार हैं। गौरतलब है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में भ्रष्टाचार के ऐसे मामले आम नागरिकों के विश्वास को सीधे प्रभावित करते हैं।
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी मामले में भी सीबीआई सक्रिय
इससे अलग, सीबीआई ने 'डिजिटल अरेस्ट' से जुड़े एक बड़े साइबर ठगी मामले में 25 अप्रैल को पाँच आरोपियों — जिनमें एक निजी कंपनी भी शामिल है — के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इस मामले में नामजद तीन आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
यह मामला सीबीआई ने 24 नवंबर 2025 को केरल उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद दर्ज किया था। जांच के मुताबिक, साइबर अपराधियों ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायिक अधिकारियों का रूप धरकर एक वरिष्ठ नागरिक को निशाना बनाया और फर्जी नोटिसों के जरिए उन्हें डरा-धमकाकर ₹1.8 करोड़ से अधिक की ठगी को अंजाम दिया।
आम जनता पर असर
सीजीएचएस (केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना) लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करती है। इस तरह के भ्रष्टाचार के मामले न केवल सरकारी तंत्र की साख को नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि उन कर्मचारियों के अधिकारों को भी प्रभावित करते हैं जो उचित तबादले के लिए आवेदन करते हैं।
क्या होगा आगे
सीबीआई दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करेगी और रिमांड की माँग करेगी। जांच एजेंसी यह भी देखेगी कि क्या इस नेटवर्क में अन्य अधिकारी भी शामिल हैं। यह मामला सरकारी सेवाओं में भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई की बढ़ती सक्रियता का संकेत देता है।