विश्वजीत सहाय ने संभाला रक्षा वित्त सचिव का पदभार, भरत खेड़ा बने एमएसएमई मंत्रालय के नए सचिव
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रक्षा लेखा सेवा (आईडीएएस) के 1990 बैच के वरिष्ठ अधिकारी विश्वजीत सहाय ने रक्षा मंत्रालय में सचिव (रक्षा वित्त) का पदभार ग्रहण कर लिया है। 1 मई 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इसके साथ ही भरत खेड़ा ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय में सचिव पद की जिम्मेदारी संभाल ली है। दोनों नियुक्तियाँ भारत सरकार के प्रमुख मंत्रालयों में वरिष्ठ प्रशासनिक नेतृत्व को नई दिशा देती हैं।
विश्वजीत सहाय: रक्षा वित्त में तीन दशकों का अनुभव
इससे पहले विश्वजीत सहाय रक्षा लेखा महानियंत्रक (सीजीडीए) के पद पर कार्यरत थे। वे सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं और कानून की डिग्री भी रखते हैं। मंत्रालय के अनुसार, उनके पास रक्षा वित्त और लोक प्रशासन में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
अपने करियर में उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग में अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार, भारी उद्योग विभाग में संयुक्त सचिव, रक्षा मंत्रालय में फाइनेंस मैनेजर (अधिग्रहण शाखा) और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएँ दी हैं।
रक्षा लेखा विभाग में उन्होंने प्रयागराज में रक्षा लेखा के प्रधान नियंत्रक (पेंशन), संयुक्त सीजीडीए और विशेष सीजीडीए जैसी अहम जिम्मेदारियाँ भी निभाई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (यूके) और जॉर्ज सी. मार्शल यूरोपियन सेंटर फॉर सिक्योरिटी स्टडीज (जर्मनी) में प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
भरत खेड़ा: एमएसएमई मंत्रालय की कमान
हिमाचल प्रदेश कैडर के 1995 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी भरत खेड़ा के पास केंद्र और राज्य सरकार में 30 वर्षों से अधिक का प्रशासनिक अनुभव है। इससे पहले वे उपभोक्ता मामले विभाग में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे।
उन्होंने नवंबर 2014 से फरवरी 2020 तक रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव (एयर) के रूप में भारतीय वायु सेना से जुड़े मामलों को संभाला। इस दौरान उन्होंने 2017 से 2020 तक लगातार चार वर्षों तक गणतंत्र दिवस समारोह जैसे राष्ट्रीय आयोजनों के समन्वय की जिम्मेदारी भी निभाई। रक्षा मंत्रालय में उन्होंने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से संबंधित मामलों की भी देखरेख की।
इसके बाद खेड़ा ने लगभग दो वर्षों तक कैबिनेट सचिवालय में संयुक्त सचिव के रूप में वाणिज्य, उद्योग और प्रौद्योगिकी से जुड़े मामले संभाले और कोविड-19 महामारी के दौरान नीतिगत निर्णयों में योगदान दिया।
एमएसएमई क्षेत्र की अहमियत और आगे की राह
वर्तमान में एमएसएमई क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 30 प्रतिशत से अधिक का योगदान दे रहा है और रोजगार सृजन, विनिर्माण तथा निर्यात में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को साकार करने के लिए एमएसएमई क्षेत्र को रणनीतिक रूप से सशक्त बनाने पर जोर दे रही है।
एमएसएमई सचिव के रूप में भरत खेड़ा इस क्षेत्र को और मजबूत बनाने तथा 'विकसित भारत 2047' के विजन में एमएसएमई की भागीदारी को विस्तार देने के प्रति प्रतिबद्धता जता चुके हैं। दोनों नई नियुक्तियाँ संकेत देती हैं कि सरकार रक्षा वित्त प्रबंधन और एमएसएमई नीति — दोनों मोर्चों पर अनुभवी प्रशासनिक नेतृत्व को प्राथमिकता दे रही है।