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डेनमार्क के CHIP केंद्र को WHO/यूरोप का सहयोगी दर्जा, HIV, टीबी और हेपेटाइटिस से लड़ाई होगी मज़बूत

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डेनमार्क के CHIP केंद्र को WHO/यूरोप का सहयोगी दर्जा, HIV, टीबी और हेपेटाइटिस से लड़ाई होगी मज़बूत

सारांश

CHIP केंद्र को WHO/यूरोप का सहयोगी दर्जा मिलना महज़ एक प्रशासनिक नामांकन नहीं — यह यूरोप में HIV, टीबी और हेपेटाइटिस से लड़ाई की रणनीति में बड़ा बदलाव है। कोपेनहेगन से निकलने वाली वैज्ञानिक विशेषज्ञता अब सीधे क्षेत्रीय स्वास्थ्य नीतियों को आकार देगी।

मुख्य बातें

WHO/यूरोप ने 1 मई 2026 को डेनमार्क के CHIP केंद्र को आधिकारिक सहयोगी केंद्र नामित किया।
केंद्र रिगहॉस्पिटलेट और यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन में स्थित है।
नामांकन की अवधि चार वर्ष है; फोकस HIV, टीबी, वायरल हेपेटाइटिस और STI पर।
स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाना, जाँच तक पहुँच और बायोमेडिकल रोकथाम कार्यक्रम प्रमुख लक्ष्य।
WHO/यूरोप के निदेशक इओर पेरेनिट्स ने कहा कि सहयोगी केंद्र संस्थागत क्षमताओं को मज़बूत करते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के यूरोप क्षेत्रीय कार्यालय (WHO/यूरोप) ने 1 मई 2026 को डेनमार्क के प्रतिष्ठित सेंटर फॉर हेल्थ एंड इन्फेक्शियस डिजीज रिसर्च (CHIP) को आधिकारिक रूप से नया WHO सहयोगी केंद्र नामित किया। कोपेनहेगन स्थित यह केंद्र अब HIV, वायरल हेपेटाइटिस, टीबी और यौन संचारित संक्रमणों (STI) के विरुद्ध यूरोपीय क्षेत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रियाओं को सुदृढ़ करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा। यह नामांकन यूरोप में संक्रामक रोगों से लड़ाई को नई वैज्ञानिक ऊर्जा प्रदान करेगा।

केंद्र की स्थापना और संरचना

CHIP केंद्र रिगहॉस्पिटलेट और यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन में स्थित है। यह संस्था WHO/यूरोप तथा सदस्य देशों के साथ समन्वय करते हुए वैज्ञानिक शोध को व्यावहारिक सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में रूपांतरित करने का कार्य करेगी। गौरतलब है कि WHO के सहयोगी केंद्र वैश्विक स्वास्थ्य नेटवर्क की रीढ़ माने जाते हैं और संसाधन-सीमित देशों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

चार वर्षीय कार्यक्षेत्र और प्राथमिकताएँ

इस नामांकन की अवधि चार वर्ष निर्धारित की गई है। इस दौरान CHIP केंद्र निम्नलिखित प्राथमिकताओं पर कार्य करेगा:

पहली प्राथमिकता है स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता विकास — विशेषकर उन देशों में जहाँ HIV और टीबी का बोझ अधिक है। दूसरी प्राथमिकता के रूप में HIV, हेपेटाइटिस और STI की जाँच तक पहुँच का विस्तार किया जाएगा। तीसरे, कार्यान्वयन और ऑपरेशनल रिसर्च को बल दिया जाएगा ताकि नीतियाँ साक्ष्य-आधारित बनें। चौथे, राष्ट्रीय स्तर पर बायोमेडिकल रोकथाम कार्यक्रमों को उन्नत किया जाएगा। यह नामांकन विशेष रूप से HIV/टीबी सह-संक्रमण और वायरल हेपेटाइटिस पर केंद्रित है।

WHO के वरिष्ठ अधिकारी का वक्तव्य

WHO/यूरोप के स्वास्थ्य सुरक्षा और क्षेत्रीय आपात निदेशक इओर पेरेनिट्स ने इस अवसर पर कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि कोपेनहेगन की विशेषज्ञता उन देशों तक कितनी प्रभावी रूप से पहुँचती है जहाँ स्वास्थ्य प्रणालियाँ कमज़ोर हैं। HIV/टीबी सह-संक्रमण पर विशेष ध्यान देना रणनीतिक रूप से सही है, क्योंकि यह दोहरा बोझ सबसे कमज़ोर आबादी को सबसे अधिक प्रभावित करता है। बिना मज़बूत क्षेत्रीय कार्यान्वयन ढाँचे के, यह नामांकन केवल कागज़ी उपलब्धि बनकर रह सकता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CHIP केंद्र को WHO सहयोगी केंद्र का दर्जा क्यों दिया गया?
WHO/यूरोप ने CHIP केंद्र को उसकी HIV, टीबी, वायरल हेपेटाइटिस और STI पर विशेषज्ञता के कारण सहयोगी केंद्र नामित किया है। यह केंद्र वैज्ञानिक शोध को सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में रूपांतरित करने और सदस्य देशों की संस्थागत क्षमता बढ़ाने में सहयोग करेगा।
CHIP केंद्र कहाँ स्थित है और इसका कार्यक्षेत्र क्या है?
CHIP केंद्र डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में रिगहॉस्पिटलेट और यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन में स्थित है। यह चार वर्षों तक HIV, टीबी, वायरल हेपेटाइटिस और STI के क्षेत्र में WHO/यूरोप और सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करेगा।
WHO सहयोगी केंद्र का दर्जा मिलने से क्या बदलेगा?
इस नामांकन से CHIP केंद्र को WHO/यूरोप के तकनीकी नेटवर्क का हिस्सा बनने का अधिकार मिलेगा। यह स्वास्थ्यकर्मियों की ट्रेनिंग, जाँच सेवाओं तक पहुँच और बायोमेडिकल रोकथाम कार्यक्रमों को राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर बनाने में सहायता करेगा।
HIV/टीबी सह-संक्रमण क्यों महत्त्वपूर्ण चिंता का विषय है?
HIV से पीड़ित व्यक्तियों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर होती है, जिससे उनमें टीबी होने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। यह दोहरा संक्रमण उपचार को जटिल बनाता है और मृत्यु दर को बढ़ाता है, इसीलिए CHIP का नामांकन विशेष रूप से HIV/टीबी सह-संक्रमण पर केंद्रित किया गया है।
वायरल हेपेटाइटिस और टीबी के लक्षण क्या हैं?
वायरल हेपेटाइटिस में पीलिया, थकान, पेट दर्द और गहरे रंग का पेशाब प्रमुख लक्षण हैं, हालाँकि कई मामलों में कोई लक्षण नहीं दिखते। टीबी में लगातार खाँसी, सीने में दर्द, बुखार, कमज़ोरी और रात में पसीना आना सामान्य लक्षण हैं; सही एंटीबायोटिक कोर्स से इसका उपचार संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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