महाकाल मंदिर खुदाई में मिला प्राचीन शिवलिंग, बुद्ध पूर्णिमा पर उज्जैन में भक्तों का उमड़ा सैलाब
सारांश
Key Takeaways
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र में 1 मई 2026 को खुदाई के दौरान एक विशाल प्राचीन शिवलिंग जमीन के भीतर से निकला, जिसके दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यह घटना बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर हुई, जिससे श्रद्धालुओं में अपार उत्साह और भावनात्मक उत्तेजना देखी गई। अधिकारियों के अनुसार, शिवलिंग की प्राचीनता का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।
खुदाई के दौरान कैसे मिला शिवलिंग
सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के तहत महाकाल मंदिर क्षेत्र में टनल निर्माण कार्य के लिए जमीन की खुदाई चल रही थी। भस्म आरती के समय खुदाई के दौरान ही यह विशाल शिवलिंग भूमि के भीतर से प्रकट हुआ। शिवलिंग मिलते ही मंदिर समिति ने तत्काल निर्माण कार्य रोक दिया और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि शिवलिंग को किसी प्रकार की क्षति तो नहीं पहुँची।
पुजारी ने क्या कहा
महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी आशीष शर्मा ने कहा कि ऐसा माना जाता है कि भगवान शंकर इस पवित्र भूमि के हर कण में निवास करते हैं। उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार, जब भगवान महादेव यहाँ प्रकट हुए थे, तो सभी देवी-देवता भी इस पवित्र स्थान पर उपस्थित हो गए थे। उनका कहना है कि आदि-अनादि काल से बदलती परिस्थितियों की वजह से कुछ शिवलिंग जमीन के नीचे ही रह गए हैं। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह शिवलिंग कितना प्राचीन है।
भक्तों की प्रतिक्रिया
जमीन से निकले इस प्राचीन शिवलिंग के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लग गया। एक भक्त ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "भस्म आरती के समय खुदाई का काम चल रहा था और बुद्ध पूर्णिमा के दिन बाबा स्वयं प्रकट हुए हैं, तो इससे बड़ा चमत्कार नहीं हो सकता। यह नगरी बाबा की है और बाबा ने आज के शुभ दिन पर दर्शन दिए हैं।"
एक अन्य भक्त ने कहा, "प्राचीन शिवलिंग निकलने के बाद मंदिर समिति ने कार्य रोक दिया है। आज बुद्ध पूर्णिमा है और आज के शुभ दिन भगवान खुद धरती को चीरकर निकले हैं — यह महाकाल का चमत्कार है... हर-हर महादेव।"
आम जनता और श्रद्धालुओं पर असर
गौरतलब है कि उज्जैन वैसे भी 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक के रूप में हिंदू आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह ऐसे समय में हुआ है जब सिंहस्थ महापर्व की तैयारियाँ जोरों पर हैं और शहर में श्रद्धालुओं की आवाजाही पहले से बढ़ी हुई है। इस घटना ने भक्तों की आस्था को और गहरा किया है और मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
आगे क्या होगा
मंदिर समिति और संबंधित अधिकारी शिवलिंग की प्राचीनता की जाँच में जुटे हैं। टनल निर्माण कार्य फिलहाल रोक दिया गया है और शिवलिंग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। विशेषज्ञों की टीम यह निर्धारित करेगी कि शिवलिंग किस काल का है और इसके संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए जाएँ।