मायावती का बुद्ध पूर्णिमा और मई दिवस पर आह्वान: राजधर्म निभाएं सरकारें, श्रमिकों के अधिकार हों सुरक्षित
सारांश
Key Takeaways
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 1 मई 2026 को बुद्ध पूर्णिमा और मई दिवस (मजदूर दिवस) के अवसर पर सोशल मीडिया मंच एक्स पर दो अलग-अलग संदेश जारी किए। उन्होंने तथागत गौतम बुद्ध को नमन करते हुए सरकारों से राजधर्म निभाने और मेहनतकश वर्ग के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।
गौतम बुद्ध को श्रद्धांजलि और राजधर्म का आह्वान
मायावती ने अपने पहले संदेश में गौतम बुद्ध को उनकी जयंती पर शत्-शत् नमन अर्पित किया और उनके अनुयायियों को बुद्ध पूर्णिमा की बधाई दी। उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा और मानवता के आदर्शों को दुनिया में फैलाकर भारत को जगतगुरु की ख्याति दिलाने वाले तथागत बुद्ध के बताए रास्ते पर चलकर लोगों के जीवन को सुखी व संपन्न बनाना ही सच्चा राजधर्म है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इसकी सार्थकता तभी संभव है जब सभी सरकारें अपनी कथनी और करनी में अंतर न आने दें — वही करें जो कहें, और वही कहें जो कर पाएं। मायावती ने यह भी कहा कि सरकारें खासकर सभी धर्मों को मानने वालों के जान, माल और मज़हब की सुरक्षा सुनिश्चित करें, तो यह तथागत गौतम बुद्ध को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने बुद्ध के सिद्धांत 'अप्प दीपो भवः' — अर्थात शिक्षित बनो, खुद ऊपर उठो और अपना प्रकाश स्वयं बनो — का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी से देश आत्मनिर्भर और महान बनेगा।
मई दिवस पर मजदूरों की दशा पर चिंता
मायावती ने अपने दूसरे संदेश में मई दिवस पर देश भर के पुरुष और महिला मजदूरों को बधाई देते हुए कहा कि लाख कोशिशों के बावजूद श्रमिक वर्ग की स्थिति में कोई अपेक्षित सुधार अब तक देखने को नहीं मिला है। इसीलिए मजदूर दिवस के महत्व को आज भी नकारा नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि देश निर्माण में मजदूरों और मेहनतकश समाज का जबरदस्त योगदान रहता है। इसी को देखते हुए बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने देश की आज़ादी से पहले और बाद में भी इन तबकों के लिए खुशहाल जीवन की गारंटी सुनिश्चित करने का प्रयास किया था।
आउटसोर्सिंग और 'हायर एंड फायर' से बढ़ती मुसीबतें
बसपा अध्यक्ष ने आउटसोर्सिंग, दैनिक वेतनभोगी व्यवस्था और 'हायर एंड फायर' की प्रथा को मेहनतकश तबकों के लिए एक नई मुसीबत बताया। उनके अनुसार, इन प्रथाओं के जीवन के हर पहलू में प्रचलित हो जाने से श्रमिक परिवारों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पालन-पोषण पर बुरा असर पड़ रहा है।
मायावती ने कहा कि विकास की चाह में मजदूरों का भविष्य ही नहीं, बल्कि उनके और उनके परिवार का जीवन दांव पर लगा हुआ दिखता है, जो उचित नहीं है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि महिला श्रमिकों को सुरक्षित कार्य वातावरण न मिल पाना भारत में चिंता का विषय बना हुआ है।
सरकारों से अपील और बसपा की प्रतिबद्धता
मायावती ने सभी सरकारों से अपील की कि देश के विकास में मजदूर और श्रमिक वर्ग की उचित भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बसपा का संघर्ष मेहनतकश बहुजनों के हक के लिए समर्पित है और रहेगा। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब देश में श्रम कानूनों में बदलाव और असंगठित क्षेत्र में रोजगार की अनिश्चितता पर बहस तेज़ है।