शिवसेना (यूबीटी) का आरोप: NCERT पाठ्यक्रम में मराठा इतिहास को 68 शब्दों तक सीमित करना राष्ट्रीय साजिश
सारांश
Key Takeaways
शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने 1 मई 2026 को महाराष्ट्र के 67वें स्थापना दिवस पर आरोप लगाया कि मराठी लोगों को महाराष्ट्र-विरोधी तत्वों द्वारा व्यवस्थित रूप से हाशिए पर धकेला जा रहा है। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय में दावा किया गया कि मराठी पहचान और गौरव को मिटाने की एक सुनियोजित राष्ट्रीय साजिश जारी है, और मराठी समाज से 'महाराष्ट्र धर्म' का बिगुल फिर से बजाने का आह्वान किया गया।
पाठ्यक्रम में बदलाव पर गंभीर आरोप
सामना के संपादकीय में दावा किया गया कि NCERT और CBSE पाठ्यक्रम में हालिया संशोधनों के तहत मराठा साम्राज्य के नक्शे हटाए गए हैं और छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरवशाली इतिहास को महज 68 शब्दों तक सीमित कर दिया गया है। संपादकीय के अनुसार, ये बदलाव राज्य की विरासत और मराठी अस्मिता को व्यवस्थित रूप से मिटाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं। गौरतलब है कि पाठ्यक्रम परिवर्तन का मुद्दा पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर विवाद का केंद्र रहा है।
मुंबई और मराठी भाषा की स्थिति पर सवाल
सामना में कहा गया कि मुंबई में कथित तौर पर रिक्शा चालक मराठी बोलने से इनकार कर देते हैं। पार्टी का आरोप है कि वर्तमान प्रशासन इन तत्वों के सामने 'साष्टांग प्रणाम' कर रहा है और उन फैसलों को रोक रहा है जो मराठी को अनिवार्य बना सकते थे। संपादकीय के अनुसार, भाषा नीति को लागू करने के बजाय शासक वर्ग पीछे हट रहा है।
महाराष्ट्र दिवस और श्रमिकों की विरासत
1 मई न केवल महाराष्ट्र दिवस है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस भी है। सामना ने याद दिलाया कि मुंबई मिल मजदूरों, किसानों और श्रमिकों के संघर्ष और बलिदान से बनी थी, जिन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए लड़ाई लड़ी थी कि मुंबई महाराष्ट्र राज्य का हिस्सा बनी रहे। संपादकीय ने सवाल उठाया कि क्या मुंबई आज भी वास्तव में उन्हीं श्रमिकों की है।
अंधविश्वास और षड्यंत्र के आरोप
संपादकीय में आरोप लगाया गया कि प्रगतिशील महाराष्ट्र अब अंधविश्वास और ढोंगी बाबाओं की जकड़ में फंस गया है। यूबीटी का दावा है कि राज्य को लूटने के लिए लोगों को इन भ्रांतियों में उलझाए रखने की एक सुनियोजित साजिश चल रही है। पार्टी ने मराठी समाज से इस षड्यंत्र के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने का आह्वान किया।
आगे क्या
यह संपादकीय ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में महायुति सरकार और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के बीच राजनीतिक तनाव बना हुआ है। शिवसेना (यूबीटी) की यह आक्रामक भाषा आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों से पहले मराठी अस्मिता के मुद्दे को केंद्र में रखने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।