भारत के स्वास्थ्य भविष्य पर दो दिवसीय राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन: डिजिटल हेल्थ विस्तार और 17वें CRM रिपोर्ट पर मंथन

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भारत के स्वास्थ्य भविष्य पर दो दिवसीय राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन: डिजिटल हेल्थ विस्तार और 17वें CRM रिपोर्ट पर मंथन

सारांश

नई दिल्ली में संपन्न दो दिवसीय राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन में 17 राज्यों के CRM निष्कर्षों पर मंथन हुआ। डिजिटल हेल्थ विस्तार, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की प्रगति और SDG 2030 लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया गया — लेकिन दूरदराज क्षेत्रों तक पहुँच और मानव संसाधन की कमी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Key Takeaways

1 मई 2025 को नई दिल्ली में "नवाचार और समावेशिता" विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन संपन्न हुआ। 17वें कॉमन रिव्यू मिशन (CRM) के तहत 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य निष्कर्षों की समीक्षा की गई। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का विस्तार, टेली-परामर्श सेवाओं का उपयोग और डिजिटल स्वास्थ्य अपनाने में वृद्धि को सकारात्मक उपलब्धि माना गया। मानव संसाधन उपयोग, दवाओं की उपलब्धता और दूरदराज क्षेत्रों तक पहुँच अभी भी प्रमुख चुनौतियाँ हैं। NHM मिशन निदेशक आराधना पटनायक ने सभी योजनाओं को SDG 2030 लक्ष्यों के अनुरूप बनाने और बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन में सुधार का आह्वान किया।

नई दिल्ली में 1 मई 2025 को "नवाचार और समावेशिता: भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार देने वाली सर्वोत्तम प्रथाएं" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन का समापन तकनीकी विचार-विमर्श और निष्कर्षों की समीक्षा के साथ हुआ। सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन 17वें कॉमन रिव्यू मिशन (CRM) की रिपोर्ट पर गहन चर्चा की गई, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत स्वास्थ्य सेवाओं के स्वतंत्र और साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन का एक प्रमुख माध्यम है।

सम्मेलन का पहला दिन: राज्यों ने साझा कीं सर्वोत्तम प्रथाएं

सम्मेलन के पहले दिन विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने-अपने क्षेत्रों में लागू नवाचारों और सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने, डिजिटल स्वास्थ्य तकनीकों के उपयोग, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार तथा गैर-संचारी रोगों के बेहतर प्रबंधन जैसे विषयों को रेखांकित किया गया। इन सत्रों ने राज्यों के बीच आपसी सीख और अनुभव साझा करने का एक उपयोगी मंच प्रदान किया।

इसके साथ ही, मंत्रालय की ओर से नई और चल रही स्वास्थ्य पहलों पर भी विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। इनका उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के साथ बेहतर तालमेल बैठाने और जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता करना था।

17वें CRM के निष्कर्ष: प्रगति और चुनौतियाँ दोनों सामने आईं

शुक्रवार के तकनीकी सत्रों में 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त CRM निष्कर्षों पर विस्तृत चर्चा हुई। रिपोर्ट में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, सेवा वितरण की स्थिति और शासन प्रणाली की कार्यप्रणाली से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। सकारात्मक पहलुओं में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का विस्तारित संचालन, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को अपनाने में वृद्धि प्रमुख रहे।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, गैर-संचारी रोगों की पहचान व उपचार और टेली-परामर्श सेवाओं के उपयोग में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे को तेज़ी से विस्तार देने की कोशिश कर रहा है।

सुधार की आवश्यकता वाले क्षेत्र

चर्चाओं में यह भी स्पष्ट हुआ कि मानव संसाधनों का बेहतर उपयोग, आवश्यक दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता तथा दूरदराज क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अभी भी महत्वपूर्ण चुनौतियाँ बनी हुई हैं। बैठक में डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से डेटा की गुणवत्ता सुधारने और रियल-टाइम निगरानी को मज़बूत करने पर विशेष ज़ोर दिया गया।

इसके अलावा रेफरल सिस्टम को बेहतर बनाने, सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ। अधिकारियों के अनुसार इन प्रयासों से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुँच दोनों में सुधार होगा।

समापन सत्र: NHM मिशन निदेशक का संबोधन

समापन सत्र में अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक (NHM) आराधना पटनायक ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब ध्यान अल्पकालिक लक्ष्यों से आगे बढ़ाकर मध्यम और दीर्घकालिक स्वास्थ्य लक्ष्यों पर केंद्रित करना होगा और सभी योजनाओं को 2030 तक के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।

पटनायक ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर भी ज़ोर दिया और कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी लाभार्थी, विशेषकर कमजोर वर्गों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन को भी एक महत्वपूर्ण चुनौती बताते हुए इस दिशा में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।

आगे की राह: सहयोग और नवाचार की निरंतरता

सम्मेलन का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि राज्यों के बीच सहयोग, नवाचार और अनुभव साझा करने की प्रक्रिया को आगे भी लगातार मज़बूत किया जाएगा। पटनायक ने CRM टीमों के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से स्वास्थ्य प्रणाली के सुधार में महत्वपूर्ण मदद मिली है। यह सम्मेलन भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Point of View

दवाओं की कमी और मानव संसाधन का अपर्याप्त उपयोग — जो पिछले कई वर्षों की समीक्षाओं में भी सामने आती रही हैं। डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की घोषणाएं उत्साहजनक हैं, लेकिन जब तक ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य साक्षरता की बुनियादी कमियाँ दूर नहीं होतीं, तब तक डिजिटल समाधान केवल शहरी लाभार्थियों तक सीमित रहने का जोखिम है। SDG 2030 के लक्ष्यों का उल्लेख सराहनीय है, परंतु पाँच वर्ष से कम समय में उन्हें हासिल करने के लिए केवल सम्मेलनों से आगे बढ़कर ज़िला स्तर पर ठोस जवाबदेही तंत्र की ज़रूरत है।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

17वाँ कॉमन रिव्यू मिशन (CRM) क्या है?
17वाँ CRM राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत स्वास्थ्य सेवाओं का स्वतंत्र और साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन करने वाली प्रणाली है। इस बार इसने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, सेवा वितरण और शासन प्रणाली का आकलन किया।
इस सम्मेलन में कौन-सी प्रमुख उपलब्धियाँ सामने आईं?
सम्मेलन में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का विस्तारित संचालन, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, टेली-परामर्श सेवाओं का बढ़ता उपयोग और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार को प्रमुख उपलब्धियों के रूप में रेखांकित किया गया।
डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में क्या चुनौतियाँ हैं?
अधिकारियों के अनुसार दूरदराज क्षेत्रों तक पहुँच, स्वास्थ्य कर्मियों का पर्याप्त प्रशिक्षण और कमजोर वर्गों के लिए डिजिटल सेवाओं की सुलभता प्रमुख चुनौतियाँ हैं। बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन को भी एक महत्वपूर्ण समस्या बताया गया।
NHM मिशन निदेशक आराधना पटनायक ने क्या कहा?
अतिरिक्त सचिव एवं NHM मिशन निदेशक आराधना पटनायक ने कहा कि अब ध्यान दीर्घकालिक स्वास्थ्य लक्ष्यों पर केंद्रित करना होगा और सभी योजनाओं को SDG 2030 लक्ष्यों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। उन्होंने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन में सुधार पर भी जोर दिया।
इस सम्मेलन का भारत की स्वास्थ्य नीति पर क्या असर होगा?
सम्मेलन में तय हुआ कि राज्यों के बीच सहयोग और अनुभव साझा करने की प्रक्रिया को निरंतर मजबूत किया जाएगा। रियल-टाइम डेटा निगरानी, रेफरल सिस्टम में सुधार और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देने की योजना है।
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