12 जुलाई 2026
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नई दिल्ली में सांसदों-विधायकों की विशेष कार्यशाला: स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल संवाद पर 80 जनप्रतिनिधियों ने किया मंथन

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नई दिल्ली में सांसदों-विधायकों की विशेष कार्यशाला: स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल संवाद पर 80 जनप्रतिनिधियों ने किया मंथन

सारांश

नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में एनएफपीआरसी की कार्यशाला में 80 सांसदों और विधायकों ने एक मंच पर स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल संवाद पर नीति विशेषज्ञों से सीधा संवाद किया — विकसित भारत-2047 के लक्ष्यों को ज़मीन पर उतारने की दिशा में एक व्यावहारिक पहल।

मुख्य बातें

एनएफपीआरसी फाउंडेशन ने 26 मई 2026 को इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में सांसदों-विधायकों के लिए विशेष नीति कार्यशाला आयोजित की।
लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं के लगभग 80 जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सीएन मंजूनाथ ने आयुष्मान भारत (PM-JAY) और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के माध्यम से स्वास्थ्य व्यवस्था सुदृढ़ीकरण पर प्रकाश डाला।
सौरभ चोपड़ा ने नई शिक्षा नीति-2020 को शिक्षा क्रांति का आधार बताया; मातृभाषा शिक्षा और डिजिटल लर्निंग पर जोर।
संबित पात्रा ने डिजिटल और सोशल मीडिया संवाद रणनीतियों पर प्रस्तुति दी।
आशीष चंदोरकर के वीडियो संदेश में CoWIN प्लेटफॉर्म और भारत के कोविड-19 प्रबंधन की सफलता को रेखांकित किया गया।

नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर के गुलमोहर हॉल में 26 मई 2026 को राष्ट्र प्रथम नीति अनुसंधान एवं परिवर्तन फाउंडेशन (एनएफपीआरसी) द्वारा सांसदों और विधायकों के लिए एक विशेष नीति कार्यशाला का आयोजन किया गया। लोकसभा, राज्यसभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के लगभग 80 जनप्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया, जहाँ स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल संवाद, सुशासन और विकसित भारत-2047 जैसे अहम विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

कार्यशाला का उद्देश्य और स्वागत संबोधन

कार्यशाला का मूल उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को नीति विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद का मंच उपलब्ध कराना था — जहाँ बेहतर शासन व्यवस्था, प्रभावी क्रियान्वयन, संस्थागत समन्वय और क्षेत्रीय स्तर पर परिणाम-आधारित कार्यप्रणाली पर विचार साझा किए जा सकें।

एनएफपीआरसी फाउंडेशन के अध्यक्ष तरुण चुघ ने स्वागत संबोधन में कहा कि आयुष्मान भारत, नई शिक्षा नीति 2020 और डिजिटल संवाद जैसे परिवर्तनकारी प्रयास विकसित भारत की मजबूत आधारशिला बन रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जनकेंद्रित शासन, प्रभावी क्रियान्वयन और तकनीक-आधारित संवाद व्यवस्था को और सुदृढ़ करना आवश्यक है।

स्वास्थ्य सत्र: आयुष्मान भारत की नई नींव

लोकसभा सांसद डॉ. सीएन मंजूनाथ ने 'आयुष्मान भारत: भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की नई नींव' विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि पीएम-जेएवाई (PM-JAY) और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के माध्यम से देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की गाँव-गाँव तक पहुँच विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सत्र में डिजिटल हेल्थ सिस्टम, क्लेम प्रक्रिया, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य ढाँचे के आधुनिकीकरण जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

शिक्षा सत्र: नई शिक्षा नीति-2020 और भविष्य की तैयारी

सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन के सीनियर डायरेक्टर सौरभ चोपड़ा ने नई शिक्षा नीति-2020 को भारत की शिक्षा क्रांति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि मातृभाषा-आधारित शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, डिजिटल लर्निंग और आधुनिक शिक्षा मॉडल देश के युवाओं को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं।

चोपड़ा ने यह भी कहा कि गुणवत्तापूर्ण और तकनीक-आधारित शिक्षा भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

डिजिटल संवाद सत्र: सोशल मीडिया और जनविश्वास

लोकसभा सांसद डॉ. संबित पात्रा ने रणनीतिक डिजिटल संचार पर अपनी प्रस्तुति में कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म आज जनप्रतिनिधियों और जनता के बीच संवाद का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। उन्होंने मीडिया सहभागिता, सोशल मीडिया प्रबंधन, सूचना के त्वरित प्रसार और संकट की स्थिति में प्रभावी संवाद रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की।

पात्रा ने क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय मीडिया की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे जनप्रतिनिधि जनता से अधिक गहराई से जुड़ सकते हैं। उन्होंने कहा, 'पारदर्शी और सक्रिय संवाद ही जनविश्वास को मजबूत बनाता है।'

कोविड प्रबंधन और समापन

कार्यक्रम के दौरान डब्ल्यूटीओ जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन में काउंसलर एवं 'How India Braved the Covid-19 Pandemic' पुस्तक के लेखक आशीष चंदोरकर का वीडियो संदेश भी प्रदर्शित किया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कोविड-19 महामारी का सामना दृढ़ नेतृत्व, तकनीक-आधारित प्रबंधन और जनभागीदारी के माध्यम से सफलतापूर्वक किया। उन्होंने कोविन (CoWIN) प्लेटफॉर्म और विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण अभियानों में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख किया।

समापन पर एनएफपीआरसी फाउंडेशन के बोर्ड सदस्य अभिनव प्रकाश ने सभी वक्ताओं और जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि फाउंडेशन भविष्य में भी शोध-आधारित संवाद, नीति विमर्श और जनप्रतिनिधियों के क्षमता निर्माण के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा। प्रतिभागियों ने ऐसे निष्पक्ष और शोध-आधारित मंचों की सराहना की, जो बेहतर निर्णय लेने और अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन मंचों पर हुई चर्चाएँ संसदीय बहसों और समिति कार्यों में कितनी परिलक्षित होती हैं। आयुष्मान भारत और नई शिक्षा नीति की प्रशंसा के साथ-साथ उनकी ज़मीनी चुनौतियों — जैसे अस्पतालों में क्लेम अस्वीकृति दर और सरकारी स्कूलों में शिक्षक रिक्तियाँ — पर खुली चर्चा इन मंचों की विश्वसनीयता को और मजबूत करेगी। डिजिटल संवाद पर सत्र समयानुकूल है, किंतु यह भी देखना होगा कि जनप्रतिनिधि सोशल मीडिया को सूचना-प्रसार के साथ-साथ जन-शिकायत निवारण के लिए भी उतनी ही गंभीरता से अपनाते हैं या नहीं।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएफपीआरसी की यह कार्यशाला किस उद्देश्य से आयोजित की गई थी?
यह कार्यशाला जनप्रतिनिधियों को नीति विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद का मंच देने के लिए आयोजित की गई थी, जहाँ बेहतर शासन, प्रभावी क्रियान्वयन और परिणाम-आधारित कार्यप्रणाली पर विचार-विमर्श हो सके। इसका दीर्घकालिक लक्ष्य विकसित भारत-2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को सशक्त बनाना है।
कार्यशाला में कितने और किन जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया?
कार्यशाला में लोकसभा, राज्यसभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के लगभग 80 जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें लोकसभा सांसद डॉ. सीएन मंजूनाथ और डॉ. संबित पात्रा प्रमुख वक्ताओं में शामिल थे।
आयुष्मान भारत पर कार्यशाला में क्या चर्चा हुई?
लोकसभा सांसद डॉ. सीएन मंजूनाथ ने बताया कि PM-JAY और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के माध्यम से स्वास्थ्य व्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती मिली है। सत्र में डिजिटल हेल्थ सिस्टम, क्लेम प्रक्रिया और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर भी चर्चा हुई।
नई शिक्षा नीति-2020 पर कार्यशाला में क्या विचार रखे गए?
सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन के सीनियर डायरेक्टर सौरभ चोपड़ा ने नई शिक्षा नीति-2020 को भारत की शिक्षा क्रांति का आधार बताया। उन्होंने मातृभाषा-आधारित शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल लर्निंग को युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने वाले प्रमुख स्तंभ बताया।
कार्यशाला में डिजिटल संवाद पर क्या सुझाव दिए गए?
लोकसभा सांसद डॉ. संबित पात्रा ने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म जनप्रतिनिधियों और जनता के बीच सबसे प्रभावी संवाद माध्यम बन चुके हैं। उन्होंने संकट प्रबंधन संचार, क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग और पारदर्शी संवाद को जनविश्वास की कुंजी बताया।
राष्ट्र प्रेस
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