विकसित भारत 2047: ओम बिरला बोले — कृषि, अनुसंधान और नवाचार के समन्वय से ही पूरा होगा संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 13 जून 2026 को नई दिल्ली में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि 'विकसित भारत 2047' के संकल्प की सफलता कृषि, ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के सशक्त समन्वय पर ही टिकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह यात्रा देश के खेतों, खलिहानों और गाँवों से होकर गुजरेगी।
कृषि: केवल अर्थव्यवस्था नहीं, सांस्कृतिक चेतना का आधार
बिरला ने कहा कि भारत की कृषि केवल अर्थव्यवस्था की रीढ़ नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक चेतना, खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण समृद्धि और सामाजिक स्थिरता की भी आधारशिला है। उन्होंने जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास लक्ष्यों जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच परंपरागत कृषि ज्ञान को आधुनिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जलवायु-अनुकूल नवाचारों के साथ जोड़ना अनिवार्य हो गया है।
उन्होंने कहा, 'कृषि का भविष्य केवल अधिक उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, पर्यावरणीय संतुलन और किसानों की आय वृद्धि से भी जुड़ा है।' यही कारण है कि कृषि शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक-आधारित समाधान आज 'विकसित भारत' की कृषि यात्रा के प्रमुख स्तंभ बनते जा रहे हैं।
सम्मेलन का उद्देश्य: 2047 का रोडमैप तैयार करना
लोकसभा अध्यक्ष ने इस सम्मेलन को देश के शिक्षकों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि जब विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत संगठन और सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्रों के लोग मिलकर 2047 के लिए देश के हर क्षेत्र का रोडमैप तैयार करेंगे, तभी 'विकसित भारत' का सपना साकार हो सकेगा।
किसान, वैज्ञानिक और युवा — परिवर्तन के वाहक
बिरला ने रेखांकित किया कि किसान, वैज्ञानिक, शिक्षक, शोधकर्ता, नीति-निर्माता और युवा शक्ति इस परिवर्तन के प्रमुख वाहक हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस सम्मेलन से निकले विचार और संकल्प किसानों की समृद्धि, ग्रामीण विकास और 'आत्मनिर्भर भारत' के निर्माण को नई गति देंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के जीवन में आर्थिक और सामाजिक बदलाव लाना केवल खेती और किसानों के माध्यम से ही संभव है, और यही देश की सेवा का सबसे प्रभावी मार्ग है।
आगे की राह
इस दो दिवसीय सम्मेलन से निकलने वाली सिफारिशें कृषि नीति-निर्माण और शैक्षणिक अनुसंधान की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब सरकार 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को लेकर विभिन्न क्षेत्रों में नीतिगत संवाद तेज कर रही है।