पंजाब बिजली संकट: अकाली नेता बंटी रोमाना का दावा — '2017 के बाद एक भी मेगावाट नहीं जोड़ी'
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता परमबंस सिंह बंटी रोमाना ने पंजाब में गहराते बिजली संकट को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) सरकारों पर तीखा हमला बोला है। फरीदकोट में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने 16 सितंबर 2026 से राज्यभर में जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की। रोमाना का आरोप है कि 2017 के बाद से पंजाब में बिजली उत्पादन क्षमता में एक भी मेगावाट की बढ़ोतरी नहीं हुई।
रोमाना के दावे: संख्याओं में
रोमाना ने कहा, '2007 में शिरोमणि अकाली दल की सरकार बनने से पहले पंजाब की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 6,200 मेगावाट थी और राज्य में 7-8 घंटे बिजली नहीं आती थी।' उनके अनुसार, अकाली सरकार ने अपने 10 वर्षीय कार्यकाल में क्षमता बढ़ाकर करीब 14,000 मेगावाट कर दी — यानी लगभग 8,000 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता जोड़ी गई।
उन्होंने यह भी कहा कि 1947 से 2007 तक लगभग 60 वर्षों में पंजाब की बिजली उत्पादन क्षमता केवल 6,000 मेगावाट तक पहुँच सकी थी, जबकि अकाली सरकार ने एक दशक में इसे दोगुने से अधिक कर दिया। यह तथ्य उनकी पार्टी के दावे की आधारशिला है।
ग्रिड विस्तार और डिस्ट्रीब्यूशन घाटे का मुद्दा
रोमाना के अनुसार, अकाली कार्यकाल में डिस्ट्रीब्यूशन घाटे को घटाकर 14.5 प्रतिशत पर लाया गया। उन्होंने बताया कि 2007 तक राज्य में केवल 660 ग्रिड थे, जिन्हें बढ़ाकर 946 ग्रिड किया गया — यानी 286 नए ग्रिड जोड़े गए ताकि हर गाँव तक निर्बाध बिजली पहुँचाई जा सके।
इसके विपरीत, उन्होंने दावा किया कि 2017 से 2026 के बीच केवल 60 नए ग्रिड बनाए गए हैं और उत्पादन क्षमता में एक इकाई भी नहीं जोड़ी गई। गौरतलब है कि इन नौ वर्षों में राज्य में कांग्रेस और फिर AAP की सरकारें रहीं।
खपत बनाम आपूर्ति: बढ़ता अंतर
रोमाना ने कहा कि पंजाब में बिजली की खपत हर साल लगभग 500 मेगावाट बढ़ती है। उनके अनुसार, 2017 के बाद से अब तक कुल 5,000 मेगावाट अतिरिक्त खपत बढ़ चुकी है, लेकिन आपूर्ति पक्ष पर कोई उल्लेखनीय निवेश नहीं हुआ। यही असंतुलन आज की बिजली कटौती की मूल वजह है, ऐसा उनका कहना है।
यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब के किसान और उपभोक्ता दोनों गर्मी और फसल के मौसम में लंबी कटौती से परेशान हैं। बिजली आपूर्ति का सीधा असर सिंचाई पंपों की कार्यक्षमता पर पड़ता है, जो पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
विरोध प्रदर्शन की रणनीति
शिअद ने 16 सितंबर 2026 से जिला स्तर पर प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की है। रोमाना ने स्पष्ट किया कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक राज्य सरकार बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाती। इस घोषणा से पंजाब की राजनीतिक तस्वीर में एक नई हलचल आने की संभावना है, खासकर आगामी स्थानीय चुनावों को देखते हुए।