पंजाब किसान प्रतिनिधियों की CM नायब सिंह सैनी से चंडीगढ़ में मुलाकात, बिजली संकट व कृषि समस्याओं पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने 26 मई 2025 को चंडीगढ़ में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की और राज्य में कृषि की बिगड़ती स्थिति, बिजली आपूर्ति की बाधाओं तथा किसानों को अन्य राज्यों की तुलना में मिल रही कम सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की। बैठक को दोनों पक्षों ने सकारात्मक बताया और किसान संगठनों ने उम्मीद जताई कि इससे ठोस समाधान की राह खुलेगी।
मुख्य घटनाक्रम
किसान प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को बताया कि पंजाब में किसानों की स्थिति लगातार बिगड़ रही है और उन्हें कई मोर्चों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिनिधियों ने कहा कि समय पर और पर्याप्त बिजली न मिलने से खेती के कार्य सीधे प्रभावित हो रहे हैं, जिससे किसानों की परेशानी और गहरी होती जा रही है।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पंजाब में खरीफ सीजन की तैयारियाँ जोरों पर हैं और सिंचाई के लिए बिजली की माँग अपने चरम पर होती है। गौरतलब है कि बिजली आपूर्ति का मुद्दा पंजाब के किसानों के लिए वर्षों से एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
किसानों की प्रमुख माँगें
प्रतिनिधियों ने कहा कि पंजाब के किसान केंद्र और हरियाणा सरकार की किसान-हितैषी नीतियों से अपेक्षित लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। उन्होंने माँग की कि पंजाब के किसानों को भी अन्य राज्यों के किसानों की तरह सुविधाएँ और सरकारी सहयोग मिलना चाहिए।
किसान संगठनों ने यह भी इच्छा जताई कि केंद्र सरकार के साथ समन्वय के ज़रिए हरियाणा और अन्य राज्यों जैसी कृषि सुविधाएँ पंजाब के किसानों तक पहुँचाई जाएँ।
सीएम सैनी की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किसान प्रतिनिधियों की बातों को ध्यान से सुना और हर संभव सहयोग एवं समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और इस दिशा में सकारात्मक प्रयास जारी रहेंगे।
पंजाब आने का निमंत्रण
बैठक के दौरान सभी किसान प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पंजाब आने का निमंत्रण दिया, ताकि वे जमीनी स्तर पर किसानों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से देख और समझ सकें।
आगे की राह
किसान संगठनों ने इस मुलाकात के बाद उम्मीद जताई है कि उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में शीघ्र ठोस कदम उठाए जाएंगे। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार की ओर से आश्वासन के बाद जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी बदलाव आता है।