पंजाब में BJP का कमल खिलेगा, AAP सरकार ने जनता को छोड़ा: हरियाणा CM नायब सिंह सैनी
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 19 जून को सिरसा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आगामी विधानसभा चुनावों में पंजाब की जनता भी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को समर्थन देगी और राज्य में 'कमल खिलेगा'। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब की मौजूदा सरकार ने बड़े-बड़े वादे करके सत्ता हासिल की, लेकिन अब जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री सैनी सिरसा में जिला लोक संपर्क एवं जन परिवेदना समिति की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद मीडिया से मुखातिब हुए। उन्होंने कहा कि हरियाणा में 'डबल इंजन' सरकार द्वारा समाज के हर वर्ग के लिए चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं की चर्चा अब पंजाब में भी होने लगी है। सैनी के अनुसार, BJP की नीतियों का लाभ हरियाणा के प्रत्येक नागरिक तक पहुँच रहा है।
पंजाब सरकार पर आरोप
सैनी ने कहा कि पंजाब की जनता विकास चाहती है, लेकिन वर्तमान राज्य सरकार चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा में कांग्रेस शासन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी, जबकि मौजूदा सरकार इस मोर्चे पर किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। उनके अनुसार, सरकार प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
गुरु अर्जन देव और धार्मिक संदर्भ
एक सवाल के जवाब में सैनी ने कहा कि जब-जब धर्म और सत्य पर संकट आया है, तब-तब महान व्यक्तित्वों ने राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया है। उन्होंने बताया कि गुरु अर्जन देव का शहीदी दिवस पंचकूला में भी मनाया गया, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ उनके जीवन और बलिदान से प्रेरणा ले सकें।
NEET पुनर्परीक्षा और छात्रों की सुविधा
NEET पुनर्परीक्षा से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने बताया कि छात्रों के लिए नि:शुल्क बस सेवा की व्यवस्था की गई है।
विकास कार्य और विपक्ष पर निशाना
सैनी ने कहा कि हरियाणा के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार लगातार धनराशि उपलब्ध करा रही है — ग्राम पंचायतों और नगर निकायों को बजट जारी किया जा चुका है। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे केवल राजनीति कर रहे हैं और विधानसभा सत्रों में भाग लेने से बचते हैं, जबकि उन्हें सदन की कार्यवाही में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।