हरियाणा: हर जिले में बनेगी 'प्रकृति श्री अन्न प्रेरक किसान कमेटी', सीएम सैनी का बड़ा ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 8 जुलाई 2026 को राज्य के प्रत्येक जिले में 'प्रकृति श्री अन्न प्रेरक किसान कमेटियाँ' गठित करने की घोषणा की, जिनका उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ना और सरकार व कृषक समुदाय के बीच सेतु का काम करना होगा। यह घोषणा पंचकूला के निकट कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा आयोजित 'प्राकृतिक खेती संवाद' कार्यक्रम में की गई।
कमेटियों की भूमिका और जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री सैनी ने स्पष्ट किया कि इन कमेटियों की मुख्य जिम्मेदारी किसानों तक सीधे पहुँचना, उनके खेतों का दौरा करना और उन्हें प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए सरकार के साथ समन्वय स्थापित करना होगी। उन्होंने कहा, 'असल में, वे प्राकृतिक खेती के एंबेसडर (दूत) के तौर पर काम करेंगे।' इन कमेटियों के माध्यम से प्राकृतिक खेती के अभियान को जमीनी स्तर तक पहुँचाने की योजना है।
किसानों को सब्सिडी और गाय खरीद पर सहायता
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि जो किसान पहले से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और जिन्होंने गाय खरीदने के लिए सहायता हेतु आवेदन किया है, उन्हें शीघ्र सब्सिडी जारी की जाए। किसानों से सीधी बातचीत के दौरान सैनी ने आश्वासन दिया कि उनके सुझावों पर जल्द से जल्द अमल किया जाएगा। गौरतलब है कि प्राकृतिक खेती में गोमूत्र और गोबर आधारित जैव-उर्वरकों का उपयोग केंद्रीय होता है, इसलिए गाय की उपलब्धता इस पद्धति की आधारशिला मानी जाती है।
प्राकृतिक खेती का व्यापक दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि प्राकृतिक खेती महज एक कृषि पद्धति नहीं, बल्कि किसानों, प्रकृति और समाज के बीच उस रिश्ते को पुनर्जीवित करने का अभियान है जो समय के साथ कमजोर पड़ गया है। उन्होंने इसे धरती की रक्षा, खेती की लागत में कमी, जल एवं मृदा संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने का माध्यम बताया। उन्होंने कहा, 'भारतीय संस्कृति में धरती को माँ माना जाता है और उसकी सेवा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।'
मासिक संवाद और विशेषज्ञों का सहयोग
सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इसी प्रकार के 'प्राकृतिक खेती संवाद' कार्यक्रम हर महीने आयोजित किए जाएँ, ताकि किसानों से निरंतर संवाद बना रहे। उन्होंने यह भी बताया कि गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को एक बड़े सेमिनार में आमंत्रित किया जाएगा, जिससे किसान उनके प्राकृतिक खेती के समृद्ध अनुभव का लाभ उठा सकें। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय स्तर पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है।
प्रधानमंत्री के विजन से जुड़ाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट विजन है कि प्राकृतिक खेती 21वीं सदी की जरूरत है। उन्होंने इसे 'विकसित भारत' के निर्माण और पर्यावरण संरक्षण दोनों से जोड़ते हुए किसानों का आह्वान किया कि वे अब केवल चर्चा तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं प्राकृतिक खेती के दूत बनकर दूसरों को प्रेरित करें। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि यह अभियान समाज के हर वर्ग तक पहुँचे।