9 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हरियाणा: हर जिले में बनेगी 'प्रकृति श्री अन्न प्रेरक किसान कमेटी', सीएम सैनी का बड़ा ऐलान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हरियाणा: हर जिले में बनेगी 'प्रकृति श्री अन्न प्रेरक किसान कमेटी', सीएम सैनी का बड़ा ऐलान

सारांश

हरियाणा सरकार ने प्राकृतिक खेती को जमीनी आंदोलन बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है — हर जिले में किसान कमेटियाँ, मासिक संवाद कार्यक्रम और गाय खरीद पर सब्सिडी। सीएम सैनी ने इसे महज कृषि पद्धति नहीं, बल्कि धरती बचाने का अभियान बताया।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 8 जुलाई 2026 को हरियाणा के हर जिले में 'प्रकृति श्री अन्न प्रेरक किसान कमेटियाँ' गठित करने की घोषणा की।
ये कमेटियाँ किसानों के खेतों का दौरा कर उन्हें प्राकृतिक खेती से जोड़ने में दूत की भूमिका निभाएंगी।
प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों को गाय खरीद सब्सिडी शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए गए।
पंचकूला में आयोजित 'प्राकृतिक खेती संवाद' कार्यक्रम में किसानों से सीधी बातचीत की गई।
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को आगामी बड़े सेमिनार में आमंत्रित किया जाएगा।
हर महीने इसी तरह के संवाद कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 8 जुलाई 2026 को राज्य के प्रत्येक जिले में 'प्रकृति श्री अन्न प्रेरक किसान कमेटियाँ' गठित करने की घोषणा की, जिनका उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ना और सरकार व कृषक समुदाय के बीच सेतु का काम करना होगा। यह घोषणा पंचकूला के निकट कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा आयोजित 'प्राकृतिक खेती संवाद' कार्यक्रम में की गई।

कमेटियों की भूमिका और जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री सैनी ने स्पष्ट किया कि इन कमेटियों की मुख्य जिम्मेदारी किसानों तक सीधे पहुँचना, उनके खेतों का दौरा करना और उन्हें प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए सरकार के साथ समन्वय स्थापित करना होगी। उन्होंने कहा, 'असल में, वे प्राकृतिक खेती के एंबेसडर (दूत) के तौर पर काम करेंगे।' इन कमेटियों के माध्यम से प्राकृतिक खेती के अभियान को जमीनी स्तर तक पहुँचाने की योजना है।

किसानों को सब्सिडी और गाय खरीद पर सहायता

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि जो किसान पहले से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और जिन्होंने गाय खरीदने के लिए सहायता हेतु आवेदन किया है, उन्हें शीघ्र सब्सिडी जारी की जाए। किसानों से सीधी बातचीत के दौरान सैनी ने आश्वासन दिया कि उनके सुझावों पर जल्द से जल्द अमल किया जाएगा। गौरतलब है कि प्राकृतिक खेती में गोमूत्र और गोबर आधारित जैव-उर्वरकों का उपयोग केंद्रीय होता है, इसलिए गाय की उपलब्धता इस पद्धति की आधारशिला मानी जाती है।

प्राकृतिक खेती का व्यापक दृष्टिकोण

मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि प्राकृतिक खेती महज एक कृषि पद्धति नहीं, बल्कि किसानों, प्रकृति और समाज के बीच उस रिश्ते को पुनर्जीवित करने का अभियान है जो समय के साथ कमजोर पड़ गया है। उन्होंने इसे धरती की रक्षा, खेती की लागत में कमी, जल एवं मृदा संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने का माध्यम बताया। उन्होंने कहा, 'भारतीय संस्कृति में धरती को माँ माना जाता है और उसकी सेवा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।'

मासिक संवाद और विशेषज्ञों का सहयोग

सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इसी प्रकार के 'प्राकृतिक खेती संवाद' कार्यक्रम हर महीने आयोजित किए जाएँ, ताकि किसानों से निरंतर संवाद बना रहे। उन्होंने यह भी बताया कि गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को एक बड़े सेमिनार में आमंत्रित किया जाएगा, जिससे किसान उनके प्राकृतिक खेती के समृद्ध अनुभव का लाभ उठा सकें। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय स्तर पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है।

प्रधानमंत्री के विजन से जुड़ाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट विजन है कि प्राकृतिक खेती 21वीं सदी की जरूरत है। उन्होंने इसे 'विकसित भारत' के निर्माण और पर्यावरण संरक्षण दोनों से जोड़ते हुए किसानों का आह्वान किया कि वे अब केवल चर्चा तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं प्राकृतिक खेती के दूत बनकर दूसरों को प्रेरित करें। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि यह अभियान समाज के हर वर्ग तक पहुँचे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — क्योंकि राज्य में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता दशकों पुरानी है और हरित क्रांति की विरासत को पलटना सरल नहीं। सब्सिडी की घोषणाएँ पहले भी होती रही हैं, लेकिन लाभार्थियों तक उनकी पहुँच और समयबद्धता हमेशा सवालों के घेरे में रही है। मासिक संवाद कार्यक्रम और विशेषज्ञों की भागीदारी यदि केवल औपचारिकता न बनें, तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय हो सकता है। बिना स्वतंत्र निगरानी तंत्र और मापने योग्य लक्ष्यों के, यह योजना भी अच्छे इरादों की लंबी सूची में जुड़ने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'प्रकृति श्री अन्न प्रेरक किसान कमेटी' क्या है?
यह हरियाणा सरकार द्वारा राज्य के हर जिले में गठित की जाने वाली एक समिति है, जो किसानों के खेतों का दौरा कर उन्हें प्राकृतिक खेती से जोड़ने और सरकार के साथ समन्वय स्थापित करने का काम करेगी। ये कमेटियाँ प्राकृतिक खेती के दूत के रूप में कार्य करेंगी।
हरियाणा में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
सरकार हर जिले में किसान कमेटियाँ बना रही है, प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को गाय खरीद पर सब्सिडी दे रही है और हर महीने 'प्राकृतिक खेती संवाद' कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को भी एक बड़े सेमिनार में आमंत्रित करने की योजना है।
प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को सब्सिडी कब मिलेगी?
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 8 जुलाई 2026 को कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्राकृतिक खेती कर रहे और गाय खरीद के लिए आवेदन करने वाले किसानों को शीघ्र सब्सिडी जारी की जाए। हालाँकि, सटीक समयसीमा की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है।
आचार्य देवव्रत का प्राकृतिक खेती से क्या संबंध है?
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत प्राकृतिक खेती के प्रमुख प्रवर्तकों में से एक हैं और इस क्षेत्र में उनका व्यापक अनुभव है। सीएम सैनी ने घोषणा की कि उन्हें हरियाणा में एक बड़े सेमिनार में आमंत्रित किया जाएगा ताकि किसान उनके अनुभव से लाभान्वित हो सकें।
प्राकृतिक खेती से किसानों को क्या फायदा होगा?
प्राकृतिक खेती से खेती की लागत में कमी आती है क्योंकि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं होता। इसके अलावा मिट्टी और जल संरक्षण होता है, पर्यावरण की रक्षा होती है और दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता बनी रहती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले