9 जुलाई 2026
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₹35 करोड़ रिश्वत मामला: मद्रास हाई कोर्ट ने डीएमके विधायक सेंथिल बालाजी व भाई को दी सशर्त अग्रिम जमानत

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₹35 करोड़ रिश्वत मामला: मद्रास हाई कोर्ट ने डीएमके विधायक सेंथिल बालाजी व भाई को दी सशर्त अग्रिम जमानत

सारांश

तमिलनाडु में ₹35 करोड़ की कथित रिश्वत और विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को प्रभावित करने के आरोपों के बीच मद्रास हाई कोर्ट ने DMK विधायक सेंथिल बालाजी और उनके भाई को जमानत दे दी — लेकिन जांच जारी है, और सिंगापुर फरार आरोपी अभी भी पुलिस की पहुंच से बाहर है।

मुख्य बातें

मद्रास उच्च न्यायालय ने 8 जुलाई 2026 को DMK विधायक वी.
सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार को सशर्त अग्रिम जमानत दी।
मामला TVK विधायक एम.
इलैयाराजा को विधानसभा अध्यक्ष के विरुद्ध प्रस्ताव के समर्थन में ₹35 करोड़ की कथित पेशकश से जुड़ा है।
अभियोजन पक्ष ने होटल बुकिंग, हवाला लेनदेन के संकेत और सिंगापुर भागे एक आरोपी द्वारा सीसीटीवी फुटेज डिलीट करने का आरोप लगाया।
बचाव पक्ष ने कहा कि मूल एफआईआर में सेंथिल बालाजी का नाम नहीं था और अभियोजन पक्ष के पास केवल CDR डेटा है, कोई रिकॉर्डिंग नहीं।
दोनों भाइयों ने किसी भी संलिप्तता से इनकार किया और मामले को करूर उपचुनाव से पहले राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।
1 जुलाई को तीन व्यक्ति गिरफ्तार हो चुके हैं; जांच अभी जारी है।

मद्रास उच्च न्यायालय ने 8 जुलाई 2026 को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के विधायक वी. सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार को ₹35 करोड़ के कथित रिश्वत मामले में सशर्त अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। यह मामला तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष के विरुद्ध प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव के दौरान 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) के एक विधायक को मतदान प्रभावित करने के लिए धन देने के आरोपों से जुड़ा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर तनाव चरम पर है।

मामले की पृष्ठभूमि

26 जून को TVK विधायक एम. इलैयाराजा ने शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि थिरुनावुक्कारासु नामक एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क कर विधानसभा अध्यक्ष के विरुद्ध प्रस्तावित कदम का समर्थन करने के बदले ₹35 करोड़ की पेशकश की। इलैयाराजा के अनुसार, प्रस्ताव ठुकराने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई। 1 जुलाई को पुलिस ने इस मामले में तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया और दावा किया कि विधायक से संपर्क करने की कोशिश सेंथिल बालाजी और अशोक कुमार के निर्देश पर की गई थी।

अदालत में क्या हुआ

न्यायमूर्ति पी. इलानथिराययन ने दोनों याचिकाकर्ताओं को कुछ शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दी। अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों अगले आदेश तक प्रतिदिन जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित हों और जांच में पूर्ण सहयोग करें।

सेंथिल बालाजी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन.आर. इलांगो ने तर्क दिया कि कथित फोन कॉल के दो दिन बाद शिकायत दर्ज की गई थी और अभियोजन पक्ष के पास बातचीत की कोई रिकॉर्डिंग नहीं है — वे केवल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) पर निर्भर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मूल एफआईआर में सेंथिल बालाजी का नाम आरोपी के रूप में नहीं था और अभियोजन पक्ष का एकमात्र आधार यह था कि बालाजी उसी दिन इरोड में थे जिस दिन मुख्य आरोपी वहां था।

अशोक कुमार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. कुमारेशन ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को केवल सेंथिल बालाजी का भाई होने के कारण मामले में घसीटा गया है और जांचकर्ता ठोस साक्ष्य के अभाव में मामला खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं।

अभियोजन पक्ष के तर्क

सरकारी वकील जॉन सत्यन ने अदालत को बताया कि जांचकर्ताओं को साजिश का संकेत देने वाली सामग्री मिली है, जिसमें चेन्नई में होटल के कमरे बुक कराना शामिल है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों में से एक सिंगापुर भाग गया था और उसने दूर से ही सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दी, जिसे जांचकर्ता पुनः प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। अभियोजन पक्ष ने हवाला लेनदेन की ओर इशारा करने वाले साक्ष्य और बेंगलुरु में पूछताछ के दौरान मिली नई जानकारियों का भी उल्लेख किया।

सत्यन ने कहा कि यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय पर एक निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने की कोशिश से जुड़ा है और दोनों याचिकाकर्ताओं को कथित साजिश से जोड़ने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है।

आरोपियों का पक्ष

दोनों भाइयों ने अपनी जमानत याचिकाओं में किसी भी प्रकार की संलिप्तता से इनकार किया। उन्होंने तर्क दिया कि मूल एफआईआर में सेंथिल बालाजी को आरोपी नहीं बनाया गया था, रिश्वत की कथित कोशिश से उन्हें जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है, और यह मामला करूर उपचुनाव से पहले बालाजी को उनके कर्तव्यों से विमुख करने के राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है।

आगे क्या होगा

अदालत के निर्देशानुसार दोनों आरोपियों को जांच में सहयोग जारी रखना होगा। मामले की जांच अभी भी जारी है और सिंगापुर भागे आरोपी की गिरफ्तारी तथा सीसीटीवी फुटेज की रिकवरी पर जांचकर्ताओं की नज़र है। यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में DMK और TVK के बीच संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ विधानसभा अध्यक्ष पद एक नई शक्ति-परीक्षा का केंद्र बन गया है। अभियोजन पक्ष के दावे गंभीर हैं — सिंगापुर फरार आरोपी, हवाला के संकेत, दूर से सीसीटीवी डिलीट करना — लेकिन बचाव पक्ष का यह तर्क भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है कि मूल एफआईआर में सेंथिल बालाजी का नाम ही नहीं था। अदालत का सशर्त जमानत देना यह संकेत देता है कि न्यायपालिका ने आरोपों को पूरी तरह खारिज नहीं किया, लेकिन तत्काल हिरासत को भी अनुचित माना। असली परीक्षा जांच की गुणवत्ता होगी — विशेष रूप से फरार आरोपी की वापसी और डिजिटल साक्ष्य की रिकवरी पर।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेंथिल बालाजी पर क्या आरोप हैं?
DMK विधायक वी. सेंथिल बालाजी पर आरोप है कि उनके कहने पर TVK विधायक एम. इलैयाराजा को तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष के विरुद्ध प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने के बदले ₹35 करोड़ की रिश्वत देने की कोशिश की गई। हालांकि मूल एफआईआर में उनका नाम सीधे आरोपी के रूप में नहीं था।
मद्रास हाई कोर्ट ने जमानत देते समय क्या शर्तें रखीं?
न्यायमूर्ति पी. इलानथिराययन ने निर्देश दिया कि सेंथिल बालाजी और अशोक कुमार दोनों अगले आदेश तक प्रतिदिन जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित हों और जांच में पूर्ण सहयोग करें।
TVK विधायक इलैयाराजा ने शिकायत में क्या कहा था?
TVK विधायक एम. इलैयाराजा ने 26 जून को शिकायत दर्ज कराई कि थिरुनावुक्कारासु नामक व्यक्ति ने उन्हें ₹35 करोड़ की पेशकश की और मना करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। इसी शिकायत के आधार पर 1 जुलाई को तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया।
अभियोजन पक्ष के पास क्या साक्ष्य हैं?
सरकारी वकील जॉन सत्यन के अनुसार जांचकर्ताओं को चेन्नई में होटल बुकिंग, हवाला लेनदेन के संकेत और एक आरोपी द्वारा सिंगापुर से सीसीटीवी फुटेज डिलीट करने के साक्ष्य मिले हैं। हालांकि बचाव पक्ष ने कहा कि कथित फोन बातचीत की कोई रिकॉर्डिंग नहीं है और अभियोजन पक्ष केवल CDR पर निर्भर है।
क्या यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है?
बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि यह मामला करूर उपचुनाव से पहले सेंथिल बालाजी को उनके कर्तव्यों से रोकने के राजनीतिक उद्देश्य से दर्ज कराया गया है। अभियोजन पक्ष ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि साजिश का संकेत देने वाली पर्याप्त सामग्री मौजूद है।
राष्ट्र प्रेस
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