तमिलनाडु: सेंथिल बालाजी के भाई पर मुकदमा, टीवीके विधायक को ₹35 करोड़ का लालच देने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु पुलिस ने 2 जुलाई 2026 को पूर्व द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) मंत्री एवं कोयंबटूर दक्षिण के विधायक वी. सेंथिल बालाजी के भाई अशोक कुमार के विरुद्ध औपचारिक मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि अशोक कुमार ने सत्ताधारी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के विधायक एन. इलैयाराजा को ₹35 करोड़ की पेशकश कर पार्टी छोड़ने के लिए प्रेरित करने की कोशिश की।
मुख्य घटनाक्रम
टीवीके विधायक एन. इलैयाराजा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सत्ताधारी पार्टी छोड़ने के लिए बार-बार प्रलोभन दिए गए और धमकियाँ भी दी गईं। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने जाँच शुरू की।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक नरेश ने कथित तौर पर पूछताछ में खुलासा किया कि उसने चेन्नई में अशोक कुमार से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की थी और उसके बाद ही विधायक इलैयाराजा से संपर्क किया था।
कानूनी कार्रवाई
जाँच के दौरान दर्ज बयानों के आधार पर पुलिस ने अशोक कुमार के विरुद्ध चार धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएँ भी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि जाँच कई स्तरों पर एक साथ जारी है और आगे की कार्रवाई एकत्र किए गए साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
इससे पहले चेन्नई पुलिस ने इस कथित साजिश के सिलसिले में पाँच लोगों को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने टीवीके विधायक को पाला बदलवाकर सरकार अस्थिर करने की योजना बनाई थी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु में राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल है। विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके को 108 सीटें प्राप्त हुई थीं और कांग्रेस तथा अन्य दलों के समर्थन से उन्होंने सरकार बनाई।
गौरतलब है कि DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन लगातार यह दावा करते रहे हैं कि टीवीके सरकार के पास पूर्ण बहुमत नहीं है और वह अपना पाँच वर्षीय कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी। उन्होंने यह भी कहा है कि राज्य में कभी भी मध्यावधि चुनाव हो सकते हैं।
सेंथिल बालाजी की भूमिका पर सवाल
आरोपी नरेश ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उसने अशोक कुमार और सेंथिल बालाजी के निर्देश पर टीवीके विधायक से संपर्क किया था। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है और जाँच जारी है।
आगे क्या होगा
पुलिस का कहना है कि एकत्र साक्ष्यों के आधार पर आगे की गिरफ्तारियाँ संभव हैं। यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में उस समय एक नया मोड़ लेकर आया है जब सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिरता पहले से ही सवालों के घेरे में है।