तमिलनाडु मंत्री केएन नेहरू ने मद्रास हाईकोर्ट में दायर की समीक्षा याचिका, कथित रिश्वतखोरी में एफआईआर आदेश को दी चुनौती

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तमिलनाडु मंत्री केएन नेहरू ने मद्रास हाईकोर्ट में दायर की समीक्षा याचिका, कथित रिश्वतखोरी में एफआईआर आदेश को दी चुनौती

सारांश

तमिलनाडु के मंत्री केएन नेहरू ने मद्रास हाईकोर्ट में समीक्षा याचिका दायर कर उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें कथित रिश्वतखोरी मामले में DVAC को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि आदेश बिना सुनवाई के पारित हुआ। अदालत ने एफआईआर पर रोक से इनकार करते हुए मामला जून तक स्थगित किया।

Key Takeaways

केएन नेहरू ने मद्रास हाईकोर्ट में समीक्षा याचिका दायर कर 20 फरवरी के एफआईआर आदेश को चुनौती दी। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि आदेश बिना उचित सुनवाई के पारित किया गया। अदालत ने एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगाने की माँग अस्वीकार कर दी। मुख्य न्यायाधीश एसए धर्माधिकारी की खंडपीठ ने मामला जून के अंतिम सप्ताह तक स्थगित किया। राज्यसभा सांसद आईएस इनबादुरई की अवमानना याचिका भी अदालत में विचाराधीन है।

तमिलनाडु के नगर प्रशासन, शहरी और जल आपूर्ति मंत्री केएन नेहरू ने मद्रास हाईकोर्ट के उस पूर्व आदेश की समीक्षा की माँग करते हुए याचिका दायर की है, जिसमें नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग में नियुक्तियों से जुड़े कथित रिश्वतखोरी मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। 28 अप्रैल को दाखिल इस याचिका में मंत्री की ओर से तर्क दिया गया है कि वह आदेश बिना उचित सुनवाई का अवसर दिए पारित किया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

20 फरवरी को मद्रास हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा साझा किए गए दस्तावेजों के आधार पर भ्रष्टाचार के प्रथम दृष्टया साक्ष्य पाते हुए निदेशालय सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक (DVAC) को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। यह मामला नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग में नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने इससे पहले राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि ईडी की रिपोर्ट पर कार्रवाई में देरी गंभीर मामलों में उचित नहीं है।

मंत्री के वकील की दलीलें

मंत्री केएन नेहरू की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने मुख्य न्यायाधीश एसए धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ के समक्ष दलील दी कि 20 फरवरी का आदेश बिना सुनवाई का अवसर दिए पारित किया गया, जिससे मंत्री को निष्पक्ष सुनवाई से वंचित होना पड़ा।

रोहतगी ने यह भी तर्क दिया कि 4 फरवरी को कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा जारी नोटिस अवैध था, क्योंकि वह खंडपीठ द्वारा जारी नहीं किया गया था और मामला पहले ही आदेश के लिए सुरक्षित रखा जा चुका था। उन्होंने कहा कि यह नोटिस कार्यवाही समाप्त होने के बाद प्राप्त हुआ, जिससे याचिकाकर्ता को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर नहीं मिला।

अदालत का रुख और अगली सुनवाई

खंडपीठ ने रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि केएन नेहरू को औपचारिक रूप से नोटिस दिया गया था या नहीं। मामले की विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए अदालत ने इसे गर्मी की छुट्टियों के बाद जून के अंतिम सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दिया।

हालाँकि, रोहतगी ने एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगाने की माँग की, लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि 20 फरवरी के आदेश में नेहरू के विरुद्ध विशेष रूप से एफआईआर दर्ज करने का निर्देश नहीं दिया गया था।

अवमानना याचिका का जिक्र

इस बीच, राज्यसभा सांसद आईएस इनबादुरई द्वारा दायर अवमानना याचिका का भी अदालत में उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने पूर्व आदेश का पालन न होने का आरोप लगाया था। उनके वकील ने बताया कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान इस याचिका को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि एफआईआर दर्ज करने में देरी समीक्षा याचिका दायर करने के कारण हुई, जो अब विचाराधीन है। यह मामला अब जून में आगे की सुनवाई के साथ एक निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है।

Point of View

दोनों मिलकर उस सवाल को तेज़ करते हैं जो विपक्ष पहले से उठा रहा है: क्या राज्य सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में वास्तव में जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहती है? अदालत का एफआईआर पर रोक से इनकार संकेत देता है कि न्यायपालिका इस मामले में ढील देने के मूड में नहीं है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

केएन नेहरू के खिलाफ कथित रिश्वतखोरी मामला क्या है?
यह मामला तमिलनाडु के नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग में नियुक्तियों में कथित रिश्वतखोरी से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा साझा दस्तावेजों के आधार पर मद्रास हाईकोर्ट ने 20 फरवरी को DVAC को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।
केएन नेहरू ने समीक्षा याचिका क्यों दायर की?
मंत्री की ओर से तर्क दिया गया है कि 20 फरवरी का आदेश बिना उन्हें सुनवाई का अवसर दिए पारित किया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन है। उनके वकील ने यह भी कहा कि कोर्ट रजिस्ट्री का 4 फरवरी का नोटिस अवैध था।
मद्रास हाईकोर्ट ने एफआईआर पर रोक क्यों नहीं लगाई?
अदालत ने स्पष्ट किया कि 20 फरवरी के मूल आदेश में केएन नेहरू के विरुद्ध विशेष रूप से एफआईआर दर्ज करने का निर्देश नहीं दिया गया था, इसलिए रोक लगाने का आधार नहीं बनता।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
मद्रास हाईकोर्ट ने मामले को गर्मी की छुट्टियों के बाद जून के अंतिम सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दिया है। तब मामले की विस्तृत सुनवाई होगी।
अवमानना याचिका किसने और क्यों दायर की?
राज्यसभा सांसद आईएस इनबादुरई ने अवमानना याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेश का पालन नहीं किया गया। उनके वकील ने बताया कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान इस याचिका को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
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