जेपी नड्डा ने जिनेवा में 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा को किया संबोधित, 88 करोड़ डिजिटल हेल्थ ID और 'वैक्सीन मैत्री' की उपलब्धियाँ गिनाईं
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 20 मई 2025 को जिनेवा, स्विट्जरलैंड में आयोजित 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा को संबोधित किया और यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज, डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार तथा वैश्विक स्वास्थ्य एकजुटता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष की इस भूमिका में नड्डा ने 'पूरी सरकार' और 'पूरे समाज' के दृष्टिकोण को भारत की स्वास्थ्य नीति की आधारशिला बताया।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की उपलब्धि
नड्डा ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) की उल्लेखनीय प्रगति का विवरण देते हुए बताया कि इस मिशन के अंतर्गत अब तक 88 करोड़ से अधिक भारतीयों को यूनिक डिजिटल हेल्थ आईडी जारी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस डिजिटल इकोसिस्टम ने स्वास्थ्य सेवाओं को निर्बाध, एकीकृत और पारदर्शी बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। मरीजों का संपूर्ण मेडिकल इतिहास, दवाइयाँ, जाँच रिपोर्ट और उपचार की जानकारी अब एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुलभ है, जिससे स्वास्थ्य सेवा वितरण की दक्षता और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भारत का रुख
नड्डा ने वैश्विक स्वास्थ्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि AI का विकास नैतिक, समावेशी और मानव-केंद्रित होना चाहिए। उनके अनुसार, AI को विश्व स्तर पर न्यायसंगत और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए एक साधन के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए — न कि इसे केवल संपन्न देशों या वर्गों तक सीमित रखा जाए। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में AI के नियमन को लेकर बहस तेज हो रही है।
भारत की 'दुनिया की फार्मेसी' वाली भूमिका
स्वास्थ्य मंत्री ने 'दुनिया की फार्मेसी' के रूप में भारत की वैश्विक पहचान को पुनः रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत सस्ती जेनेरिक दवाओं और टीकों के उत्पादन में विश्व का नेतृत्व करता है। कोविड-19 महामारी के दौरान 'वैक्सीन मैत्री' पहल के तहत भारत ने लगभग 100 देशों को करीब 30 करोड़ वैक्सीन खुराकें उपलब्ध कराईं — एक ऐसा योगदान जिसे उन्होंने वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग की मिसाल बताया। गौरतलब है कि यह पहल उस दौर में शुरू हुई थी जब अनेक विकसित देश वैक्सीन संग्रहण की आलोचना झेल रहे थे।
सभा में भारत का आह्वान
नड्डा ने अपने संबोधन का समापन एक सामूहिक आह्वान के साथ किया। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य सभा के प्रतिनिधियों से कहा, 'एकजुटता की भावना के साथ, आइए यह सभा नीतियों को ठोस परिणामों में बदलने और साझा जिम्मेदारी को सभी के लिए एक स्वस्थ भविष्य में बदलने की दिशा में आगे बढ़े।' नड्डा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस संबोधन का विवरण साझा किया, जिसमें उन्होंने यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। आगे देखें तो भारत की यह सक्रिय वैश्विक स्वास्थ्य कूटनीति WHO के मंच पर देश की बढ़ती साख को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।