कसौली में जेपी नड्डा ने शुरू की स्वदेशी टिटनेस और डिप्थीरिया वैक्सीन
सारांश
Key Takeaways
- कसौली में स्वदेशी टिटनेस और वयस्क डिप्थीरिया वैक्सीन का शुभारंभ हुआ।
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने इसे स्वास्थ्य क्षेत्र का मील का पत्थर बताया।
- भारत ने 99%25 टीकाकरण कवरेज हासिल किया।
- स्वदेशी टीडी वैक्सीन आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम है।
- अप्रैल 2026 तक 55 लाख खुराक की आपूर्ति की जाएगी।
कसौली, 21 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि के तहत, हिमाचल प्रदेश के कसौलीटिटनेस और वयस्क डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन का औपचारिक शुभारंभ किया गया है।
इस शुभारंभ कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी उपस्थित रहे। उन्होंने इस आयोजन को सार्वजनिक स्वास्थ्य की संरचना में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर करार दिया। बता दें कि केंद्रीय अनुसंधान संस्थान ने पहली बार स्वदेशी टिटनेस और वयस्क डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन का शुभारंभ किया है।
इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने केंद्रीय अनुसंधान संस्थान की टीम की सराहना की और कहा कि स्वदेशी टीडी वैक्सीन स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस वैक्सीन के शुभारंभ से भारत ने 99 प्रतिशत टीकाकरण कवरेज हासिल किया है, जिसे विश्व के समक्ष स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
ज्ञात रहे कि टीडी वैक्सीन के औपचारिक शुभारंभ के साथ, केंद्रीय अनुसंधान संस्थान अप्रैल 2026 तक सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम को 55 लाख खुराक की आपूर्ति करेगा। इसके साथ ही, टीडी वैक्सीन के उत्पादन को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि स्वास्थ्य और औषधि क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को पाने के लिए सभी राज्य सरकारें निरंतर प्रयास कर रही हैं। स्वदेशी रूप से निर्मित टीडी वैक्सीन का शुभारंभ स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत को पहले ही 'विश्व की औषधालय' के रूप में जाना जाता है और देश उभरते टीका निर्माताओं में से एक है। इसी के साथ, भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के नियामक प्रणालियों में नंबर-3 का स्तर प्राप्त किया है, जो कि हमारे लिए गर्व की बात है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि ऐतिहासिक रूप से टीकों और दवाओं के विकास में लंबा समय लगता था। टिटनेस के टीके को विकसित होने में दशकों का समय लगा, जबकि कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने नौ महीनों के भीतर दो स्वदेशी टीके विकसित किए। उन्होंने बताया कि कोविड-19 टीकाकरण प्रमाणपत्र डिजिटल रूप से वितरित किए गए, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में भारत के डिजिटल परिवर्तन को दर्शाता है।