उज्जैन महाकालेश्वर की भस्म आरती: बाबा के अद्भुत दर्शन, देश-विदेश से उमड़े श्रद्धालु
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार, 20 मई की तड़के भव्य भस्म आरती संपन्न हुई, जिसमें देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के निराकार और साकार — दोनों रूपों के दर्शन किए। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक इस पवित्र धाम में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि भक्त मंगलवार देर रात से ही लंबी कतारों में खड़े हो गए थे।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे संपन्न हुई भस्म आरती
आरती का शुभारंभ वीरभद्र से आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले जाने के साथ हुआ। इसके पश्चात बाबा को कोटितीर्थ कुंड — जो मंदिर परिसर के भीतर ही स्थित है — से लाया गया हरिओम जल अर्पित किया गया। तत्पश्चात पंचामृत अभिषेक किया गया और भांग तथा सूखे मेवों से महाकाल का विशेष शृंगार हुआ।
बाबा के मस्तक पर बेलपत्र और चंद्र धारण कराए गए। त्रिपुर तिलक लगाने और वस्त्र उड़ाने की पारंपरिक विधि के बाद भस्म आरती विधिवत संपन्न हुई। पूरे मंदिर परिसर में 'हर-हर महादेव' के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।
भस्म की विशेषता और पवित्र परंपरा
प्राचीन काल में इस आरती में चिता की भस्म का उपयोग होता था। वर्तमान में पूर्ण स्वच्छता और पवित्रता का पालन करते हुए भस्म को शुद्ध गाय के गोबर (उपले) से तैयार किया जाता है। इन उपलों को आम, पीपल या पलाश की पवित्र लकड़ियों और कपूर के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि में जलाया जाता है।
गौरतलब है कि यह परंपरा सदियों पुरानी है और महाकालेश्वर की भस्म आरती को देश की सबसे दुर्लभ धार्मिक अनुष्ठानों में से एक माना जाता है।
आम जनता पर असर: नियम और पोशाक संहिता
भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए कुछ विशेष नियम निर्धारित हैं। पुरुषों के लिए धोती और अंगवस्त्र पहनना अनिवार्य है — कुर्ता-पैंट मान्य नहीं। महिलाओं के लिए साड़ी पहनना आवश्यक है।
बाबा का निराकार रूप जन्म और मृत्यु के परे माना जाता है, जबकि साकार रूप सांसारिक जीवन का प्रतिनिधित्व करता है। ये दोनों रूप एक साथ दर्शन देना इस आरती की आध्यात्मिक विशिष्टता है।
ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा
भक्तों की सुविधा के लिए अब भस्म आरती की टिकट एक दिन पहले ऑनलाइन बुक की जा सकती है। पहले श्रद्धालुओं को मंदिर के काउंटर पर पहुँचकर टिकट लेनी पड़ती थी, लेकिन अब सीमित शुल्क के साथ ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था उपलब्ध है।
क्या होगा आगे
ग्रीष्मकाल और धार्मिक पर्वों के दौरान महाकालेश्वर में श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है। मंदिर प्रशासन से अपेक्षा है कि वह ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली को और सुदृढ़ करे ताकि दूरदराज से आने वाले भक्तों को निराश न होना पड़े।