इबोला प्रकोप पर अमेरिका का 'सैकड़ों मिलियन डॉलर' का वादा, WHO पर 10 दिन की देरी का आरोप

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इबोला प्रकोप पर अमेरिका का 'सैकड़ों मिलियन डॉलर' का वादा, WHO पर 10 दिन की देरी का आरोप

सारांश

ट्रंप प्रशासन ने DRC में इबोला संकट पर 'सैकड़ों मिलियन डॉलर' की मदद का वादा किया — लेकिन साथ ही WHO पर वायरस की पुष्टि में 10 दिन की देरी का सीधा आरोप भी लगाया। यह टकराव ऐसे समय में है जब अमेरिका पहले ही WHO से दूरी बना चुका है।

मुख्य बातें

ट्रंप प्रशासन ने इबोला प्रकोप के लिए 'सैकड़ों मिलियन डॉलर' की सहायता का संकल्प जताया; अब तक 2 करोड़ 30 लाख डॉलर का वादा हो चुका है।
WHO पर आरोप: 5 मई को वायरल हेमरेजिक फीवर की रिपोर्ट मिलने के बाद इबोला की पुष्टि में 10 दिन लगे; सार्वजनिक घोषणा 15 मई को हुई।
प्रभावित क्षेत्रों में 50 इबोला उपचार केंद्र और क्लीनिक स्थापित करने की योजना तैयार की जा रही है।
CDC टाइटल 42 के तहत DRC, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले विदेशी नागरिकों पर 21 दिन का यात्रा प्रतिबंध लागू।
अमेरिकी निकासी अभियान में एक व्यक्ति इबोला पॉजिटिव; 8 लोगों को प्रभावित क्षेत्र से निकाला जा रहा है।
DART टीम और 2014 व 2018 के इबोला संकट के अनुभवी अधिकारियों वाली 24 घंटे सक्रिय टास्क फोर्स तैनात।

सेंट्रल अफ्रीका में तेज़ी से फैल रहे इबोला प्रकोप से निपटने के लिए ट्रंप प्रशासन ने 20 मई 2026 को 'सैकड़ों मिलियन डॉलर' की सहायता देने का संकल्प जताया, साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पर वैश्विक चेतावनी जारी करने में गंभीर देरी का आरोप लगाया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार WHO को 5 मई को वायरल हेमरेजिक फीवर की रिपोर्ट मिली थी, लेकिन इसे इबोला के रूप में पुष्ट करने में 10 दिन लग गए — एक ऐसी देरी जिसे अधिकारियों ने 'बहुत नुकसानदायक' बताया।

अमेरिकी सहायता का दायरा

वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि वॉशिंगटन पहले ही लगभग 2 करोड़ 30 लाख डॉलर (करीब ₹190 करोड़) की मानवीय और स्वास्थ्य सहायता का वादा कर चुका है। इसके अतिरिक्त, प्रभावित क्षेत्रों में 50 इबोला उपचार केंद्र और क्लीनिक स्थापित करने के लिए एक और बड़ा सहायता पैकेज तैयार किया जा रहा है। एक अधिकारी ने कहा कि कुल सहायता 'सैकड़ों मिलियन डॉलर' तक पहुँच सकती है क्योंकि कई संगठन क्लीनिक निर्माण और मेडिकल स्टाफ की तैनाती में जुटे हैं।

WHO पर देरी का आरोप

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, 'हम इस मामले में देर से सक्रिय हुए क्योंकि WHO भी थोड़ा देर से हरकत में आया। 5 मई को उन्हें वायरल हेमरेजिक फीवर की रिपोर्ट मिली थी, लेकिन यह पता लगाने और पुष्टि करने में कि यह इबोला का स्ट्रेन है, उन्हें 10 दिन लग गए।' अधिकारी ने ज़ोर देकर कहा कि महामारी नियंत्रण में कुछ दिनों की देरी भी बेहद महँगी साबित हो सकती है। WHO ने 15 मई को सार्वजनिक रूप से इस प्रकोप की पुष्टि की, जिसके बाद अमेरिका ने आपातकालीन प्रतिक्रिया शुरू की।

मुश्किल भौगोलिक और सुरक्षा हालात

अधिकारियों के अनुसार यह प्रकोप मुख्य रूप से कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के एक दूरदराज और संघर्ष-प्रभावित इलाके में केंद्रित है। इससे मरीज़ों की पहचान, ज़रूरी आपूर्ति की डिलीवरी और राहत दलों की तैनाती — तीनों ही बेहद कठिन हो गई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब DRC पहले से ही कई सशस्त्र संघर्षों की चपेट में है, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों की पहुँच सीमित है।

अमेरिकी प्रतिक्रिया तंत्र

अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने 24 घंटे सक्रिय रहने वाली एक टास्क फोर्स गठित की है, जिसमें 2014 और 2018 के इबोला संकट में काम कर चुके अनुभवी अधिकारी शामिल हैं। डिज़ास्टर असिस्टेंस रिस्पॉन्स टीम (DART) को प्रभावित क्षेत्र में भेजा जा चुका है और कर्मचारी किंशासाकंपाला पहुँच रहे हैं। CDC और कई मानवीय एजेंसियाँ भी इस समन्वित प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं।

यात्रा प्रतिबंध और आगे की राह

अमेरिका ने CDC के टाइटल 42 आदेश के तहत कड़े यात्रा प्रतिबंध लागू किए हैं — जो विदेशी नागरिक पिछले 21 दिनों में DRC, युगांडा या दक्षिण सूडान की यात्रा कर चुके हैं, उन्हें अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। अधिकारियों ने पुष्टि की कि अमेरिकी निकासी अभियान में शामिल एक व्यक्ति इबोला पॉजिटिव पाया गया है और 8 लोगों को प्रभावित क्षेत्र से निकाला जा रहा है, जबकि अन्य की निगरानी जारी है। उल्लेखनीय है कि कांगो की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के आगामी फीफा विश्व कप में भाग लेने पर अधिकारियों ने कहा कि चूँकि खिलाड़ी पहले से यूरोप में प्रशिक्षण ले रहे हैं, वे संभवतः 21 दिन के प्रतिबंध के दायरे में नहीं आएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह तभी संभव है जब WHO को मज़बूत किया जाए — कमज़ोर नहीं। 'सैकड़ों मिलियन डॉलर' का वादा स्वागतयोग्य है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि यह धनराशि संघर्ष-क्षेत्र में ज़मीन तक पहुँचती है या नहीं।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

DRC में इबोला प्रकोप की पुष्टि कब हुई?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 15 मई 2026 को सार्वजनिक रूप से इस प्रकोप की पुष्टि की। इससे पहले 5 मई को वायरल हेमरेजिक फीवर की रिपोर्ट मिली थी, लेकिन इसे इबोला के रूप में पहचानने में 10 दिन लगे।
अमेरिका इबोला संकट में कितनी मदद दे रहा है?
अमेरिका ने अब तक लगभग 2 करोड़ 30 लाख डॉलर की मानवीय और स्वास्थ्य सहायता का वादा किया है। इसके अलावा 50 इबोला उपचार केंद्रों के निर्माण सहित एक और बड़ा पैकेज तैयार हो रहा है जो 'सैकड़ों मिलियन डॉलर' तक पहुँच सकता है।
अमेरिका ने इबोला को लेकर कौन से यात्रा प्रतिबंध लगाए हैं?
CDC के टाइटल 42 आदेश के तहत जो विदेशी नागरिक पिछले 21 दिनों में DRC, युगांडा या दक्षिण सूडान गए हैं, उन्हें अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
WHO पर देरी का आरोप क्यों लगाया गया?
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि WHO को 5 मई को वायरल हेमरेजिक फीवर की सूचना मिली थी, लेकिन इसे इबोला के रूप में पुष्ट करने में 10 दिन लगे। अधिकारियों के अनुसार यह देरी बहुत नुकसानदायक रही क्योंकि महामारी नियंत्रण में शुरुआती दिन बेहद अहम होते हैं।
क्या अमेरिकी नागरिक भी इबोला से प्रभावित हुए हैं?
अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अमेरिकी निकासी अभियान से जुड़े एक व्यक्ति का इबोला परीक्षण पॉजिटिव आया है। कुल 8 लोगों को प्रभावित क्षेत्र से निकाला जा रहा है और कई अन्य की निगरानी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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