इबोला प्रकोप पर अमेरिका का बड़ा कदम: $1.3 करोड़ जारी, डीआरसी-युगांडा से यात्रा पर रोक
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश विभाग ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) और युगांडा में इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए कूटनीतिक, मानवीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य स्तर पर आपात उपाय लागू किए हैं। 18 मई को जारी 'टाइटल 42' आदेश के तहत पिछले 21 दिनों में डीआरसी, युगांडा या दक्षिण सूडान की यात्रा कर चुके विदेशी नागरिकों के अमेरिका प्रवेश पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया गया है। आपात योजना शुरू होने के 48 घंटे के भीतर 1.3 करोड़ डॉलर की प्रारंभिक सहायता राशि जारी कर दी गई।
मुख्य घटनाक्रम
15 मई को इबोला मामलों की आधिकारिक पुष्टि होने के 24 घंटे के भीतर वाशिंगटन में एक विशेष समन्वय टीम और आपदा प्रबंधन प्रणाली सक्रिय कर दी गई। डीआरसी, रवांडा, दक्षिण सूडान और युगांडा में तैनात अमेरिकी दूतावासों ने निगरानी समूह गठित किए हैं, जो स्थानीय परिस्थितियों पर नज़र रखने के साथ-साथ वहाँ रह रहे अमेरिकी नागरिकों से निरंतर संपर्क बनाए हुए हैं। अमेरिकी प्रशासन रोज़ाना उच्च-स्तरीय बैठकें कर रहा है।
यात्रा प्रतिबंध और सीमा सुरक्षा
विदेश विभाग ने अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के साथ मिलकर 'टाइटल 42' आदेश तैयार किया। गृह सुरक्षा विभाग इस आदेश को वैश्विक स्तर पर लागू कराने में सहयोग कर रहा है। इसके अलावा सीडीसी द्वारा निर्धारित क्वारंटाइन और आइसोलेशन प्रोटोकॉल भी प्रभाव में हैं। अधिकारियों के अनुसार, संक्रमित या जोखिम में पड़े अमेरिकी नागरिकों को स्वदेश वापस लाने की आकस्मिक योजना पर भी सीडीसी और अमेरिकी सेना के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।
आपात वित्तीय सहायता
जारी की गई 1.3 करोड़ डॉलर की प्रारंभिक राशि प्रभावित देशों में निगरानी व्यवस्था सुदृढ़ करने, प्रयोगशाला क्षमता बढ़ाने, सामुदायिक जागरूकता अभियान, सुरक्षित अंतिम संस्कार प्रक्रियाओं, सीमा जाँच और रोगी उपचार पर खर्च होगी। विदेश विभाग ने स्पष्ट किया कि संकट की गहराई के अनुसार अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय समन्वय
अमेरिका संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) के माध्यम से राहत कार्यों में भागीदारी कर रहा है। विदेश विभाग यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम और अन्य अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर दाता-समन्वय प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने हाल ही में OCHA फंड के लिए 1.8 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता की घोषणा की थी, जिसमें से 25 करोड़ डॉलर विशेष रूप से डीआरसी और युगांडा के लिए आवंटित हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि मध्य और पूर्वी अफ्रीका में इबोला का प्रसार वैश्विक स्तर पर गंभीर खतरा बन सकता है। इसके पीछे कमज़ोर स्वास्थ्य ढाँचा, सीमाओं पर अपर्याप्त निगरानी और संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की कमी जैसे कारण बताए जाते हैं। गौरतलब है कि डीआरसी में इससे पहले भी इबोला के कई बड़े प्रकोप हो चुके हैं, जिनमें हज़ारों लोगों की जानें गई थीं और बड़े अंतरराष्ट्रीय राहत अभियान चलाने पड़े थे। अमेरिका पहले से ही डीआरसी और युगांडा के साथ स्वास्थ्य समझौतों के तहत रोग पहचान और रोकथाम में निवेश करता रहा है — यह कदम उसी दीर्घकालिक साझेदारी का विस्तार है।