कांगो में इबोला का कहर: रवांडा-डीआरसी सीमा बंद, WHO ने घोषित किया अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस के तेजी से बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर रवांडा ने 17 मई 2026 को अपने रुबावु जिले में डीआरसी से लगती सीमा को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस प्रकोप को 'अंतरराष्ट्रीय चिंता की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति' घोषित किया है। अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार अब तक 87 लोगों की मौत हो चुकी है।
सीमा बंद: क्या है स्थिति
रवांडा के पश्चिमी प्रांत के रुबावु जिले के मेयर प्रॉस्पर मुलिंडवा ने मीडिया को बताया कि गोमा और रुबावु-गिसेनी को जोड़ने वाली सीमा को अस्थायी रूप से बंद किया गया है। उन्होंने कहा, 'गोमा और गिसेनी को जोड़ने वाली सीमाएं इबोला के प्रकोप के कारण अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं। हम अपने लोगों से बात करते रहेंगे और उन्हें समझाएंगे कि यह फैसला क्यों लिया गया है।'
मुलिंडवा ने नागरिकों से धैर्य और सहयोग की अपील करते हुए स्पष्ट किया कि यह निर्णय जनस्वास्थ्य की रक्षा और समुदायों को संभावित संक्रमण से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है।
स्वास्थ्य जांच जारी, आवाजाही आंशिक रूप से नियंत्रित
सीमा बंद होने के बावजूद स्वास्थ्य अधिकारी कांगो से आने वाले रवांडा के नागरिकों की स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं। कांगो के नागरिकों को भी सख्त स्वास्थ्य परीक्षण के बाद अपने देश लौटने की अनुमति दी जा रही है। यह व्यवस्था संक्रमण की कड़ी को तोड़ने के साथ-साथ मानवीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
बुंडीबुग्यो स्ट्रेन: कोई वैक्सीन नहीं, खतरा अधिक
अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार यह प्रकोप 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन से जुड़ा है, जिसके लिए अभी तक कोई विशेष वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। संस्था ने चेतावनी दी है कि इस स्ट्रेन के तेजी से फैलने की आशंका अधिक है। गौरतलब है कि इबोला के अधिकांश पिछले प्रकोपों में जिस ज़ैरे स्ट्रेन के लिए वैक्सीन मौजूद है, वह इस बार प्रभावी नहीं होगी — यह इस प्रकोप को नियंत्रित करने में एक बड़ी चुनौती है।
WHO की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय चेतावनी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 17 मई को घोषणा की कि कांगो और युगांडा में चल रहा यह इबोला प्रकोप 'अंतरराष्ट्रीय चिंता की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति' बन गया है। WHO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्पष्ट किया कि यह प्रकोप बुंडीबुग्यो वायरस के कारण है, लेकिन अभी यह महामारी की श्रेणी में नहीं आता।
WHO के महानिदेशक ने कांगो और युगांडा के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक और सख्त कदम उठाने की प्रतिबद्धता दिखाई है। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य देशों को समय रहते तैयारी का अवसर देने के लिए जोखिम के बारे में पारदर्शिता बरती जा रही है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब अफ्रीका में सीमा पार स्वास्थ्य समन्वय पहले से ही कमजोर माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल की घोषणा के बाद वैश्विक समुदाय से संसाधन और तकनीकी सहायता जुटाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए वैक्सीन विकास को प्राथमिकता देना अब अपरिहार्य हो गया है।