क्या कांगो में बढ़ती लड़ाई के बीच ड्रोन हमले ने संयुक्त राष्ट्र मिशन को चिंतित किया?
सारांश
Key Takeaways
- संयुक्त राष्ट्र ने ड्रोन हमले की कड़ी निंदा की है।
- कांगो में सरकारी बलों और विद्रोहियों के बीच संघर्ष बढ़ गया है।
- इस हमले में कई नागरिक घायल हुए हैं।
- अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का सम्मान करने की अपील की गई है।
- क्षेत्र की स्थिरता के लिए संघर्षविराम आवश्यक है।
किंशासा, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) के अशांत पूर्वी क्षेत्र में एक कथित ड्रोन हमला सामने आया है, जिसे लेकर संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन मोनुस्को ने गहरी चिंता व्यक्त की है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में सरकारी बलों और विद्रोहियों के बीच संघर्ष और भी बढ़ गया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में मोनुस्को ने नागरिकों और नागरिक ढांचे को लक्षित करने वाले सभी हमलों, विशेषकर ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने उत्तरी किवु प्रांत के मासिसी-सेंटर में इस घटना की स्वतंत्र जांच की मांग की है, जहां डीआरसी की सेना और मार्च 23 मूवमेंट विद्रोही समूह के बीच भीषण लड़ाई चल रही है।
मोनुस्को ने सभी पक्षों से संघर्षविराम का पालन करने, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का सम्मान करने और विभिन्न कूटनीतिक मध्यस्थताओं के तहत हुए शांति समझौतों को लागू करने की अपील की है।
अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा संगठन मेडिसिन सॉं फ्रंटियर्स (एमएसएफ) ने शुक्रवार देर रात बताया कि एक रिहायशी क्षेत्र पर हुए हवाई हमले के बाद 42 लोगों को मासिसी जनरल रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सभी घायल शेल के टुकड़ों और गंभीर चोटों से पीड़ित थे, जिनमें से दो लोगों की अस्पताल पहुंचने के कुछ ही समय बाद मौत हो गई।
शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, मासिसी पूर्वी डीआरसी के उन क्षेत्रों में से एक है जो संघर्ष से सबसे अधिक प्रभावित हैं। यह कथित ड्रोन हमला पिछले सप्ताह एम23, डीआरसी सेना और उनके सहयोगी गुटों के बीच बढ़ती हिंसा के बीच हुआ है।
इसके अलावा, पड़ोसी दक्षिण किवु प्रांत में भी शनिवार सुबह एम23 और सरकार समर्थक मिलिशिया समूह वाज़ालेंदो के बीच झड़पें हुईं। एम23 ने 10 दिसंबर 2025 को उवीरा पर अस्थायी कब्जा करने का दावा किया था और एक सप्ताह बाद वहां से हटने की बात कही थी।
गौरतलब है कि पूर्वी डीआरसी दशकों से हिंसा का सामना कर रहा है, और 2021 के अंत से एम23 विद्रोह के दोबारा उभरने से हालात और बिगड़ गए हैं। किंशासा सरकार ने रवांडा पर एम23 को समर्थन देने का आरोप लगाया है, हालांकि किगाली इन आरोपों को बार-बार खारिज करता रहा है।