WHO ने इबोला को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया, कांगो-युगांडा में 246 संदिग्ध मामले, 65 मौतें
सारांश
मुख्य बातें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 17 मई 2026 को कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में फैले इबोला प्रकोप को 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' (PHEIC) घोषित किया। यह प्रकोप बंडिबुग्यो वायरस के कारण हो रहा है और WHO ने स्पष्ट किया है कि यह महामारी आपातकाल की श्रेणी में नहीं आता, किंतु अंतरराष्ट्रीय समन्वय तत्काल आवश्यक है।
मुख्य घटनाक्रम
अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) के अनुसार, अब तक 246 संदिग्ध मामले और 65 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। अधिकांश मामले कांगो के इतुरी प्रांत के मोंगवालू और र्वामपारा क्षेत्रों में केंद्रित हैं। राष्ट्रीय जैव-चिकित्सा अनुसंधान संस्थान द्वारा किए गए प्रारंभिक परीक्षणों में 20 में से 13 नमूनों में वायरस की प्रयोगशाला-पुष्टि हुई है। पुष्टि किए गए मामलों में 4 मौतें दर्ज हैं, जबकि बुनिया शहर से भी संदिग्ध मामलों की सूचना मिली है।
WHO महानिदेशक की प्रतिक्रिया
WHO महानिदेशक ने कांगो और युगांडा की सरकारों की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों ने प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक और सख्त कदम उठाने की प्रतिबद्धता दिखाई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों ने अन्य देशों के लिए जोखिम का ईमानदारी से आकलन साझा किया, जिससे वैश्विक समुदाय को तैयारियाँ करने का अवसर मिला। PHEIC की घोषणा करते समय महानिदेशक ने वैज्ञानिक प्रमाणों, मानव स्वास्थ्य पर जोखिम, रोग के अंतरराष्ट्रीय प्रसार की संभावना और अंतरराष्ट्रीय यातायात पर संभावित प्रभाव — सभी पहलुओं पर विचार किया।
संक्रमण फैलने का खतरा
अफ्रीका सीडीसी ने चेतावनी दी है कि कई कारक इस प्रकोप को और खतरनाक बना सकते हैं। इनमें शहरी क्षेत्रों में आबादी की सघनता, खनन गतिविधियों के कारण लोगों की अत्यधिक आवाजाही, क्षेत्र में जारी असुरक्षा और युगांडा तथा दक्षिण सूडान की भौगोलिक निकटता प्रमुख हैं। गौरतलब है कि इतुरी प्रांत पहले भी इबोला प्रकोपों से प्रभावित रहा है, जो इस क्षेत्र की संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर करता है।
सीमा-पार समन्वय की कोशिश
अफ्रीका सीडीसी ने कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान के स्वास्थ्य अधिकारियों तथा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ एक आपात बैठक आयोजित की, जिसका उद्देश्य सीमा-पार निगरानी, समन्वय और प्रतिक्रिया प्रयासों को मजबूत करना था। यह बैठक शुक्रवार दोपहर आयोजित की गई।
आगे की राह
WHO की PHEIC घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय से वित्तीय और तकनीकी सहायता जुटाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि बंडिबुग्यो वायरस के विरुद्ध उपलब्ध टीकों की प्रभावशीलता और आपूर्ति श्रृंखला इस प्रकोप की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।