केरल UDF सरकार: आईयूएमएल को मिलेंगे 5 मंत्री पद, पी.के. कुन्हालिकुट्टी समेत पाँच नेता लेंगे शपथ
सारांश
मुख्य बातें
केरल में 17 मई 2026 को शपथ ग्रहण करने जा रही वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली नई यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) सरकार में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को पाँच मंत्री पद आवंटित किए गए हैं। तिरुवनंतपुरम में आयोजित होने वाले शपथ ग्रहण समारोह से पूर्व मंत्री पद के लिए नामित नेताओं ने नई सरकार के प्रति विश्वास व्यक्त करते हुए अपनी तैयारी की पुष्टि की।
मंत्रिमंडल में आईयूएमएल के नामित नेता
आईयूएमएल की ओर से जिन पाँच नेताओं को नए मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा, वे हैं — पी.के. कुन्हालिकुट्टी, एन. शम्सुद्दीन, के.एम. शाजी, पी.के. बशीर और वी.ई. अब्दुल गफूर। गठबंधन सरकार में इतनी बड़ी संख्या में प्रतिनिधित्व आईयूएमएल की UDF के भीतर मजबूत स्थिति को रेखांकित करता है।
मंत्री पद के नामितों की प्रतिक्रिया
नामित मंत्री वी.ई. अब्दुल गफूर ने कहा, 'हमारे मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार ने सरकार के मिशन को स्पष्ट कर दिया है। उनके नेतृत्व में हम उसी योजना को लागू करेंगे और जो भी विभाग मिलेगा, उसमें पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करेंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि वी.डी. सतीशन ने नई सरकार की दिशा और उद्देश्यों को पहले ही स्पष्ट कर दिया है।
आईयूएमएल विधायक और नामित मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने कैबिनेट में स्थान मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने उन्हें मंत्री पद के लिए नामित किया है और वे सोमवार को कार्यभार संभालने के लिए तैयार हैं।
नामित मंत्री पी.के. बशीर ने संक्षिप्त रूप में कहा, 'मैं मंत्री पद की शपथ लेने जा रहा हूँ' और नई जिम्मेदारी के प्रति अपनी पूर्ण तत्परता जताई।
शपथ ग्रहण समारोह और UDF सरकार का गठन
वी.डी. सतीशन मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण समारोह सोमवार, 17 मई की सुबह तिरुवनंतपुरम में आयोजित होगा। इसी के साथ केरल में UDF की नई सरकार का औपचारिक गठन हो जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में पिछले कई वर्षों से लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सत्ता में थी और UDF की वापसी को गठबंधन नेताओं व समर्थकों ने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा है।
आम जनता और गठबंधन को उम्मीदें
गठबंधन नेताओं और समर्थकों को नई UDF सरकार से विकास, सुशासन और समावेशी प्रशासन को लेकर व्यापक अपेक्षाएँ हैं। आईयूएमएल के पाँच मंत्रियों की उपस्थिति यह भी संकेत देती है कि अल्पसंख्यक समुदाय के हितों को नई सरकार में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलेगा। अब सभी की नजरें विभागों के आवंटन और पहले सौ दिनों के कार्यक्रम पर टिकी हैं।