केरल: राज्यपाल अर्लेकर ने वीडी सतीशन को सरकार बनाने का न्योता दिया, सोमवार को शपथ
सारांश
मुख्य बातें
केरल के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने 14 मई 2026 को तिरुवनंतपुरम के लोक भवन में मुख्यमंत्री पद के लिए नामित वीडी सतीशन से मुलाकात के बाद उन्हें केरल की अगली सरकार बनाने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया। इस कदम के साथ ही सोमवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह की राह में आने वाली अंतिम संवैधानिक बाधा प्रभावी रूप से दूर हो गई।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस विधायक दल की बैठक में केपीसीसी अध्यक्ष सन्नी जोसेफ ने सतीशन के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका समर्थन तिरुवनचूर राधाकृष्णन ने किया। विधायक दल ने सर्वसम्मति से सतीशन को अपना नेता चुना। इसके बाद यूडीएफ सहयोगियों ने भी अपना समर्थन औपचारिक रूप से दर्ज कराया।
सतीशन ने राज्यपाल को कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के समर्थन पत्र सौंपे। उल्लेखनीय है कि यूडीएफ ने 140 सदस्यों वाले सदन में 102 सीटें जीतकर ऐतिहासिक सफलता दर्ज की थी।
कैबिनेट गठन की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व सप्ताहांत से पहले 21 सदस्यीय पूर्ण मंत्रिमंडल की सूची को अंतिम रूप देने में जुटा है, ताकि शपथ ग्रहण समारोह सुचारू और निर्णायक तरीके से संपन्न हो सके। मुख्यमंत्री सहित सभी 21 मंत्री एक साथ सोमवार को शपथ लेंगे।
विधानसभा का पहला सत्र 21 मई को बुलाए जाने की उम्मीद है, जब सभी नवनिर्वाचित विधायक भी शपथ ग्रहण करेंगे।
वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकुल वासनिक और दीपा दासमुंशी ने विधायक दल की बैठक को संबोधित किया। उन्होंने वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के सामूहिक नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि इन तीनों की एकजुटता ने यूडीएफ को यह ऐतिहासिक जीत दिलाई।
तमिलनाडु से तुलना
यह सत्ता हस्तांतरण उन जटिल परिस्थितियों के बिल्कुल विपरीत है, जिनका सामना राज्यपाल अर्लेकर को कुछ ही दिन पहले तमिलनाडु के कार्यवाहक राज्यपाल के तौर पर करना पड़ा था। कथित तौर पर सीटों की संख्या को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण वहाँ कई दौर की सलाह-मशविरे के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय आखिरकार आवश्यक विधायी समर्थन साबित कर पाए थे। केरल में, कांग्रेस आलाकमान द्वारा सतीशन के नाम को अंतिम रूप दिए जाने के बाद किसी भी सस्पेंस की गुंजाइश लगभग समाप्त हो गई है।
आगे क्या होगा
सोमवार को शपथ ग्रहण समारोह के साथ केरल में नई यूडीएफ सरकार औपचारिक रूप से सत्ता संभालेगी। 21 मई को विधानसभा सत्र में नवनिर्वाचित विधायकों के शपथ ग्रहण के बाद नई विधानसभा पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी। नई सरकार की पहली प्राथमिकताओं पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।