वी.डी. सतीशन को केरल का 13वाँ CM बनाने का फैसला सही: ए.के. एंटनी, जनता से माँगा धैर्य
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने 14 मई 2026 को तिरुवनंतपुरम में स्पष्ट किया कि वह पार्टी आलाकमान के उस निर्णय के पूर्ण समर्थन में हैं, जिसके तहत वी.डी. सतीशन को केरल का 13वाँ मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया है। साथ ही उन्होंने केरल की जनता से अपील की कि वे नई सरकार को अपना काम करने का उचित समय दें।
आलाकमान के फैसले पर एंटनी का बयान
एंटनी ने कहा, 'मैं कांग्रेस आलाकमान द्वारा लिए गए फैसले का पूरी तरह समर्थन करता हूँ। सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने यह निर्णय लिया है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह एक 'सोच-समझकर' लिया गया फैसला है, और इसे महज़ औपचारिकता नहीं माना जाना चाहिए।
करीब एक दशक बाद केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार की वापसी पर एंटनी ने जोर देकर कहा कि यह यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की सरकार है, जो कांग्रेस के नेतृत्व में राज्य में नई पारी शुरू कर रही है।
जनता से धैर्य की अपील
एंटनी ने केरल की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कहा, 'मेरी बस यही अपील है कि कृपया सतीशन को इस मुश्किल हालात से निकलने के लिए कुछ उचित समय दें। केरल पूरी तरह से दिवालिया हो चुका है, इसलिए उन्हें कुछ समय चाहिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य पर भारी वित्तीय दबाव और कर्ज़ का बोझ है।
सांसद हिबी ईडन की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने भी आलाकमान के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सतीशन ने केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर पिछले पाँच वर्षों में जो संघर्ष किया, उसी ने वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के शासन का अंत किया।
ईडन ने कहा, 'विधानसभा के अंदर और बाहर, जिस तरह के आंदोलन और मुद्दे उन्होंने उठाए, उससे केरल के लोगों में जबरदस्त आत्मविश्वास जगा। यही एकमात्र कारण है कि केरल के लोगों ने उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर स्वीकार किया।'
सतीशन का जवाब: देरी नहीं, प्रक्रिया थी
मुख्यमंत्री-पद के लिए नामित वी.डी. सतीशन ने नेतृत्व द्वारा फैसला पक्का करने में लगे समय को लेकर उठे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में व्यापक विचार-विमर्श शामिल था।
उन्होंने कहा, 'मैं यह नहीं कह सकता कि यह कोई देरी थी। यह एक प्रक्रिया है। नेतृत्व ने किसी फैसले पर पहुँचने से पहले पूर्व PCC अध्यक्षों, कार्यसमिति के सदस्यों, विधायकों और सांसदों के साथ इस मामले पर चर्चा की।' उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया और सोशल मीडिया की गहन निगरानी के इस दौर में कभी-कभी झूठी खबरें भी फैल जाती हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बनती है।
गौरतलब है कि केरल में UDF की यह वापसी करीब एक दशक के LDF शासन के बाद हुई है, और सतीशन के नेतृत्व में नई सरकार से राज्य की वित्तीय स्थिति सुधारने की बड़ी उम्मीदें जुड़ी हैं।