केरल चुनाव परिणाम 2026: यूडीएफ 97 सीटों पर आगे, कांग्रेस मुख्यालय में जश्न; वाम का एक दशक का शासन खतरे में
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने 4 मई 2026 को केरल विधानसभा चुनाव मतगणना में 97 सीटों पर बढ़त बनाए रखी, जिससे तिरुवनंतपुरम स्थित कांग्रेस मुख्यालय में उत्सव का माहौल छा गया। रुझानों के अनुसार वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) केवल 40 सीटों पर और भारतीय जनता पार्टी (BJP) मात्र 3 सीटों पर आगे है।
मुख्यालय में जश्न का माहौल
प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ कार्यालय के अंदर लगातार टीवी स्क्रीन पर विभिन्न सीटों के रुझानों पर नज़र बनाए हुए थे। शुरुआती दौर में उनके पीछे रहने की खबर से कुछ समय के लिए चिंता ज़रूर बढ़ी, लेकिन जल्द ही उन्होंने बढ़त हासिल कर ली — जो पूरे राज्य में यूडीएफ के मज़बूत प्रदर्शन का प्रतिबिंब थी।
जैसे-जैसे यूडीएफ की बढ़त पुख्ता होती गई, वरिष्ठ नेताओं का पार्टी मुख्यालय पहुँचना शुरू हो गया। वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला सबसे पहले पहुँचने वालों में थे, जो हरिपद सीट से 10,000 से अधिक मतों से आगे चल रहे हैं। उनके पहुँचते ही कार्यकर्ताओं ने ज़ोरदार नारेबाज़ी की और उन्हें कंधों पर उठाकर कार्यालय के अंदर ले गए।
वेणुगोपाल और सतीशन का भव्य स्वागत
इसके बाद के.सी. वेणुगोपाल, जिन्हें मुख्यमंत्री पद का संभावित दावेदार माना जा रहा है, भी मुख्यालय पहुँचे। कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर था और उन्हें भी कंधों पर उठाकर अंदर ले जाया गया।
सबसे अधिक उत्साह उस समय देखने को मिला जब नेता प्रतिपक्ष वी.डी. सतीशन मुख्यालय पहुँचे। शुरुआती राउंड में पीछे रहने के बाद उन्होंने परावूर सीट पर वापसी करते हुए बढ़त बना ली, जिससे कार्यकर्ताओं में जबरदस्त जोश भर गया।
जीत का केक और उत्सव
इस दौरान के.सी. वेणुगोपाल ने पार्टी कार्यालय में जीत का केक काटा, जिसे शशि थरूर, सनी जोसेफ, रमेश चेन्निथला और वी.डी. सतीशन सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं को खिलाया गया। कार्यालय के बाहर भी कार्यकर्ता मिठाइयाँ बाँटते और जीत के नारे लगाते नज़र आए।
केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव
मौजूदा रुझानों के अनुसार, यूडीएफ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के एक दशक लंबे शासन को समाप्त करने की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। गौरतलब है कि केरल में परंपरागत रूप से हर पाँच साल में सत्ता परिवर्तन होता रहा है, लेकिन एलडीएफ ने 2021 में इस परंपरा को तोड़कर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी। यदि यूडीएफ की बढ़त अंतिम परिणामों में भी बरकरार रहती है, तो यह केरल की राजनीति में एक ऐतिहासिक पुनर्स्थापना होगी।