ब्रिक्स के 20 वर्ष पूरे: जयशंकर बोले — 'अब नतीजे चाहिए, सिर्फ चर्चा नहीं'

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ब्रिक्स के 20 वर्ष पूरे: जयशंकर बोले — 'अब नतीजे चाहिए, सिर्फ चर्चा नहीं'

सारांश

ब्रिक्स के 20 वर्ष पूरे होने पर जयशंकर का संदेश साफ था — इरादे काफी नहीं, नतीजे चाहिए। भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई विदेश मंत्रियों की बैठक में उन्होंने मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता की चार प्राथमिकताएँ रखीं और ब्रिक्स को बहुध्रुवीय विश्व की असली ताकत बताया।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 14 मई 2025 को नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित किया।
ब्रिक्स के 20 वर्ष पूरे होने पर जयशंकर ने कहा — संगठन को 'परिणाम देने वाला प्लेटफॉर्म' बनना होगा।
भारत ने मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता की चार प्राथमिकताएँ निर्धारित कीं।
न्यू डेवलपमेंट बैंक और कंटिंजेंट रिज़र्व अरेंजमेंट को ब्रिक्स की प्रमुख उपलब्धियाँ बताया गया।
PM मोदी के 'ह्यूमैनिटी फर्स्ट' और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर विशेष ज़ोर दिया गया।
जयशंकर ने कहा — ब्रिक्स की ताकत इसकी स्वतंत्रता और विविधता में है; यह बहुध्रुवीय विश्व का उदाहरण है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 14 मई 2025 को नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिक्स को अब महज़ चर्चा के मंच से आगे बढ़कर ठोस परिणाम देने वाला प्लेटफॉर्म बनना होगा। संगठन के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस सत्र में सदस्य देशों के साथ-साथ पार्टनर देश भी शामिल हुए।

बीस वर्षों की यात्रा और उपलब्धियाँ

जयशंकर ने कहा कि पिछले दो दशकों में ब्रिक्स की यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। न्यू डेवलपमेंट बैंक और कंटिंजेंट रिज़र्व अरेंजमेंट जैसी संस्थाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि सदस्य देश मिलकर भरोसेमंद विकल्प खड़े करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स का सहयोग डिजिटल, सूचना, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और नवाचार जैसे अनेक क्षेत्रों में फैला हुआ है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि समय के साथ ब्रिक्स का दायरा और महत्व दोनों बढ़े हैं, जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों की उस आकांक्षा को दर्शाता है जिसमें वे एक अधिक संतुलित और समावेशी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था चाहते हैं।

चार प्राथमिकताओं का ढाँचा

विदेश मंत्री ने 'ब्रिक्स-20: मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण' विषय के अंतर्गत चार प्रमुख प्राथमिकताएँ रेखांकित कीं। मजबूती के तहत सप्लाई चेन को सुदृढ़ करना, बाज़ारों में विविधता लाना, शुरुआती चेतावनी प्रणाली को बेहतर बनाना और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढाँचा तैयार करना शामिल है। नवाचार के क्षेत्र में ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क, साइंस एंड रिसर्च रिपॉजिटरी और यूथ स्टार्टअप प्लेटफॉर्म जैसी पहल नए अवसर सृजित कर रही हैं।

सहयोग के अंतर्गत ब्रिक्स एमएसएमई कनेक्ट पोर्टल, ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम तथा कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र की साझेदारियाँ जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम देने का लक्ष्य रखती हैं। स्थिरता के मोर्चे पर जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास को केंद्र में रखा गया है।

प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण

जयशंकर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स को 'बिल्डिंग रेज़िलिएंस एंड इनोवेशन फॉर कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' के रूप में परिभाषित किया है, जिसमें 'ह्यूमैनिटी फर्स्ट' और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर विशेष ज़ोर है। उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण हमेशा से यह रहा है कि ब्रिक्स को लोगों के अधिक करीब और उपयोगी बनाया जाए।

परिणाम-केंद्रित भविष्य की माँग

जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुनिया बदल चुकी है और ब्रिक्स को भी आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा, 'हमारी अहमियत सिर्फ इरादों से नहीं, बल्कि नतीजों से तय होगी।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जितना अधिक ब्रिक्स अपने समाजों और उनकी आकांक्षाओं से जुड़ेगा, उतना ही इसका महत्व बढ़ेगा।

गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वैश्विक स्तर पर जोखिम कम करने और विकल्प बढ़ाने की माँग तेज़ हो रही है। विदेश मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स की असली ताकत इसकी स्वतंत्रता और विविधता है, और यह संगठन वास्तव में एक बहुध्रुवीय विश्व का जीवंत उदाहरण है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समझ, एकजुटता, खुलेपन, समावेशिता और सहमति के सिद्धांतों पर ब्रिक्स को मज़बूत करने के अपने संकल्प को दोहराया।

संपादकीय दृष्टिकोण

चर्चा नहीं' वाला आह्वान सुनने में दृढ़ लगता है, लेकिन यह सवाल अनुत्तरित है कि ब्रिक्स के पास परिणामों को मापने का कोई विश्वसनीय तंत्र है या नहीं। न्यू डेवलपमेंट बैंक जैसी संस्थाएँ अस्तित्व में हैं, परंतु वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में उनका हिस्सा अभी भी सीमित है। ब्रिक्स का विस्तार — नए सदस्यों और पार्टनर देशों के साथ — एकजुटता की छवि देता है, लेकिन आंतरिक मतभेदों को प्रबंधित करना उतना ही जटिल होता जा रहा है। असली कसौटी यह होगी कि भारत की अध्यक्षता में घोषित पहलें — एमएसएमई पोर्टल से लेकर यूथ स्टार्टअप प्लेटफॉर्म तक — अगले शिखर सम्मेलन तक कितनी ज़मीन पर उतरती हैं।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक 2025 में क्या हुआ?
14 मई 2025 को नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित हुई, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संगठन के 20 वर्षों की उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर संबोधन दिया। सदस्य देशों के साथ-साथ पार्टनर देश भी इस सत्र में शामिल हुए।
जयशंकर ने ब्रिक्स के लिए कौन-सी चार प्राथमिकताएँ रखीं?
जयशंकर ने मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता — ये चार प्राथमिकताएँ निर्धारित कीं। इनके तहत सप्लाई चेन सुदृढ़ीकरण, ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क, एमएसएमई कनेक्ट पोर्टल और जलवायु कार्रवाई जैसी ठोस पहलें शामिल हैं।
ब्रिक्स की प्रमुख संस्थागत उपलब्धियाँ क्या हैं?
न्यू डेवलपमेंट बैंक और कंटिंजेंट रिज़र्व अरेंजमेंट ब्रिक्स की सबसे उल्लेखनीय संस्थागत उपलब्धियाँ हैं। जयशंकर ने इन्हें इस बात का प्रमाण बताया कि सदस्य देश मिलकर भरोसेमंद वैकल्पिक वित्तीय ढाँचे खड़े कर सकते हैं।
भारत ब्रिक्स को किस दृष्टिकोण से देखता है?
भारत ब्रिक्स को 'बिल्डिंग रेज़िलिएंस एंड इनोवेशन फॉर कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' के रूप में देखता है। प्रधानमंत्री मोदी के 'ह्यूमैनिटी फर्स्ट' सिद्धांत और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को केंद्र में रखते हुए भारत संगठन को लोगों के करीब लाना चाहता है।
जयशंकर ने ब्रिक्स को 'परिणाम देने वाला मंच' क्यों कहा?
जयशंकर ने कहा कि दुनिया बदल चुकी है और ब्रिक्स की अहमियत अब सिर्फ इरादों से नहीं, बल्कि ठोस नतीजों से तय होगी। उनका मानना है कि जितना अधिक ब्रिक्स अपने समाजों की आकांक्षाओं से जुड़ेगा, उतना ही वैश्विक मंच पर इसका महत्व बढ़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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