भारत रूस के साथ मिलकर साझा चुनौतियों का समाधान करेगा: विदेश मंत्री जयशंकर

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भारत रूस के साथ मिलकर साझा चुनौतियों का समाधान करेगा: विदेश मंत्री जयशंकर

सारांश

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान रूस के साथ सहयोग को मजबूत करने का प्रयास करेगा। यह प्रयास साझा वैश्विक चुनौतियों के संतुलित समाधान के लिए किया जाएगा।

मुख्य बातें

भारत और रूस का सहयोग संतुलित और समावेशी है।
द्विपक्षीय व्यापार 2030 तक 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य।
सांस्कृतिक संबंधों में वृद्धि।
नए वाणिज्य दूतावासों का उद्घाटन।
वैश्विक स्थिरता में सहयोग का महत्व।

मॉस्को/नई दिल्ली, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को यह स्पष्ट किया कि भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान "मानवता-प्रथम" और "जन-केंद्रित" दृष्टिकोण के माध्यम से रूस के साथ सहयोग को और भी मजबूत करने का प्रयास करेगा, ताकि साझा चुनौतियों का समाधान संतुलित और समावेशी तरीके से किया जा सके।

भारत और रूस: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर’ शीर्षक वाले वर्चुअल सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत और रूस के बीच के स्थायी संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करने की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान रूस के साथ मिलकर वैश्विक चुनौतियों पर कार्य करने के लिए तत्पर है और यह सहयोग संतुलन और समावेशन के सिद्धांतों पर आधारित होगा।

विदेश मंत्री ने दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा को याद करते हुए कहा कि यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को नए और विविध क्षेत्रों में विस्तारित करने का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान कुशल पेशेवरों की आवाजाही, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा, समुद्री सहयोग, उर्वरक, कस्टम और व्यापार जैसे क्षेत्रों में नई पहल की जाएगी।

जयशंकर ने यह भी बताया कि दोनों देश मौजूदा 68.7 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर करने की दिशा में प्रतिबद्ध हैं। इसके लिए भारत और रूस के बीच यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देने, गैर-टैरिफ बाधाओं और नियामकीय अड़चनों को दूर करने और भारतीय कुशल कार्यबल के बेहतर उपयोग पर जोर दिया गया।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, जो कि कला, योग, आयुर्वेद और संस्कृति के प्रति साझा रुचि पर आधारित हैं। उन्होंने रूस के काल्मिकिया क्षेत्र में पिछले वर्ष भारत से भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी को दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक संबंधों का उदाहरण बताया।

जयशंकर ने यह भी विश्वास जताया कि रूस के येकातेरिनबर्ग और कजान में भारत के नए वाणिज्य दूतावासों के खुलने से आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को और मजबूती मिलेगी।

उन्होंने बदलती वैश्विक व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि बहुध्रुवीय दुनिया में सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, विशेषकर ब्रिक्स, एससीओ, जी20 और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों के माध्यम से।

इस दौरान उन्होंने सम्मेलन के आयोजन के लिए रशियन इंटरनेशनल अफेयर्स काउंसिल और मॉस्कोरूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को शुभकामनाएं भी दीं।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित है, जिसने दशकों से क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और प्रगति को आगे बढ़ाया है। मौजूदा बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में यह सहयोग और भी मजबूत हो रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग का क्या महत्व है?
भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह व्यापार, स्वास्थ्य, और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करता है।
रूस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा का क्या उद्देश्य है?
रूस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना और नए क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है।
ब्रिक्स में भारत की भूमिका क्या है?
ब्रिक्स में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ सहयोग को बढ़ावा देता है।
क्या सांस्कृतिक संबंधों का भी महत्व है?
हां, सांस्कृतिक संबंध दोनों देशों के बीच साझा समझ और सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
भारत और रूस के बीच व्यापार में वृद्धि की उम्मीदें क्या हैं?
भारत और रूस के बीच व्यापार में वृद्धि की उम्मीद है कि यह 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
राष्ट्र प्रेस