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क्या भारत और रूस ने मॉस्को सम्मेलन में व्यापारिक रिश्तों को मजबूत किया?

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क्या भारत और रूस ने मॉस्को सम्मेलन में व्यापारिक रिश्तों को मजबूत किया?

सारांश

भारत और रूस के बीच व्यापारिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए मॉस्को में आयोजित सोलहवें संवाद सम्मेलन में महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं। इस सम्मेलन में 1,250 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसरों का संकेत देता है।

मुख्य बातें

भारत और रूस के बीच व्यापारिक रिश्ते मजबूत हो रहे हैं।
सम्मेलन में 1,250 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक फोरम में भी चर्चा जारी रहेगी।
औद्योगिक सहयोग और ऊर्जा में साझेदारी पर जोर दिया गया।
भारत और रूस के बीच 50 से अधिक संयुक्त व्यापार कार्यक्रम आयोजित हुए हैं।

नई दिल्ली, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मॉस्को में आयोजित सोलहवें रूस-भारत व्यापार संवाद सम्मेलन में 1,250 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस सम्मेलन में यह बताया गया कि भारत और रूस के बीच सहयोग और संयुक्त व्यापार परियोजनाओं के लिए कार्य आगे भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जारी रहेगा, जिसमें 3 से 6 जून तक होने वाला सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक फोरम भी शामिल है।

इस सम्मेलन का आयोजन इंडियन बिजनेस अलायंस, बिजनेस काउंसिल फॉर कोऑपरेशन विद इंडिया, मॉस्को सरकार और रोसकांग्रेस फाउंडेशन ने किया था।

सम्मेलन के मुख्य सत्र में भारत और रूस के बीच सहयोग की प्रमुख दिशाओं पर चर्चा हुई, जिसमें व्यापार से जुड़ी समस्याओं का समाधान और द्विपक्षीय व्यापार को संतुलित करने के नए अवसरों पर विचार किया गया।

इसके साथ ही, सामान की ढुलाई और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने, औद्योगिक सहयोग, आयात पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा, तकनीक एवं नवाचार में साझेदारी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

सम्मेलन के दौरान उद्योग, ऊर्जा, दवाइयों और डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े संयुक्त प्रोजेक्ट्स को लागू करने पर भी विचार किया गया।

मॉस्को सरकार के मंत्री और शहर के बाहरी आर्थिक एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के प्रमुख सर्गेई चेरेमिन ने कहा कि भारत और रूस के बीच व्यापारिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं और यह सहयोग अब ठोस रूप ले रहा है।

उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में भारत और रूस के बीच 50 से अधिक संयुक्त व्यापार कार्यक्रम आयोजित हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब ध्यान रूस में भारतीय कंपनियों की उपस्थिति बढ़ाने, उद्योगों में सहयोग, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रचनात्मक उद्योगों के विकास पर केंद्रित है।

इंडियन बिजनेस अलायंस (आईबीए) के अध्यक्ष सैमी कोटवानी ने कहा कि भारतीय कंपनियां रूस के साथ सहयोग को लेकर गंभीर और व्यावहारिक सोच रखती हैं।

उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के एक नए चरण का प्रतिनिधित्व करता है, जो वास्तविक काम, क्षेत्रीय आवश्यकताओं और ठोस परियोजनाओं पर आधारित है। 1,250 से अधिक प्रतिभागियों की मौजूदगी और रूसी क्षेत्रों की सक्रिय भागीदारी दीर्घकालिक सहयोग में विश्वास को दर्शाती है।

मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए रोसकांग्रेस फाउंडेशन के उप निदेशक और सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकनॉमिक फोरम के निदेशक अलेक्सी वाल्कोव ने इस प्लेटफॉर्म के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भारत रोसकांग्रेस फाउंडेशन के कार्यक्रमों में लगातार एक महत्वपूर्ण भागीदार रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि रूस और भारत के बीच संवाद केवल रूस में होने वाले कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि फाउंडेशन की अंतरराष्ट्रीय पहलों के माध्यम से भी इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भी सामरिक संबंधों को मजबूत करेगा।
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