रूस के विदेश मंत्री लावरोव का भारत दौरा: ब्रिक्स बैठक में शामिल होने की संभावना

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रूस के विदेश मंत्री लावरोव का भारत दौरा: ब्रिक्स बैठक में शामिल होने की संभावना

सारांश

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव मई में ब्रिक्स बैठक में भाग लेने के लिए भारत आ सकते हैं। उनकी यात्रा का उद्देश्य भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की रूपरेखा तय करना है।

Key Takeaways

  • लावरोव का भारत दौरा ब्रिक्स बैठक के लिए महत्वपूर्ण है।
  • भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता करेगा।
  • बैठक में महत्वपूर्ण दस्तावेजों की रूपरेखा तय की जाएगी।
  • रूस के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
  • ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में हुई थी।

मास्को, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव मई में ब्रिक्स बैठक में भाग लेने के लिए दो दिवसीय दौरे पर भारत आ सकते हैं। यह जानकारी रूस के उप विदेश मंत्री एंड्री रुडेंको के हवाले से स्थानीय मीडिया ने दी है।

लावरोव 14–15 मई को होने वाली ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे।

रुडेंको के अनुसार, इस बैठक में उन महत्वपूर्ण दस्तावेजों की रूपरेखा बनाई जाएगी जिन्हें भारत अपनी अध्यक्षता में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत करेगा।

रूस की टीएएसएस न्यूज एजेंसी ने रुडेंको के हवाले से बताया कि ब्रिक्स कार्यक्रमों के अलावा, लावरोव की एक अलग द्विपक्षीय यात्रा भी प्रस्तावित है, जिसके तहत वे भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।

भारत वर्ष 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, जिसका विषय “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता के लिए निर्माण” रखा गया है। यह नरेंद्र मोदी द्वारा 2025 में रियो डी जिनेरियो में आयोजित 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दिए गए ‘मानवता प्रथम और जन-केंद्रित’ दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता है।

23 मार्च को आयोजित एक सम्मेलन में जयशंकर ने कहा था कि भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान रूस के साथ सहयोग को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, ताकि साझा वैश्विक चुनौतियों का संतुलित और समावेशी समाधान निकाला जा सके। उन्होंने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में ब्रिक्स, एससीओ, जी20 और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई थी, जबकि पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में आयोजित किया गया। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद यह समूह ब्रिक से ब्रिक्स बन गया। हाल के वर्षों में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया इसके पूर्ण सदस्य बने हैं, जबकि कई अन्य देश साझेदार के रूप में जुड़े हैं।

Point of View

जहां वह ब्रिक्स की अध्यक्षता के तहत वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। रूस के साथ सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता है, खासकर बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में।
NationPress
01/04/2026

Frequently Asked Questions

लावरोव का भारत दौरा कब होगा?
लावरोव का भारत दौरा 14-15 मई को ब्रिक्स बैठक के लिए प्रस्तावित है।
ब्रिक्स का थीम क्या है?
ब्रिक्स का थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता के लिए निर्माण’ है।
क्या लावरोव भारत के अधिकारियों से भी मिलेंगे?
हाँ, लावरोव की यात्रा के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और अन्य अधिकारियों से मुलाकात करने की योजना है।
ब्रिक्स की स्थापना कब हुई थी?
ब्रिक्स की स्थापना 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई थी।
ब्रिक्स में कौन से देश शामिल हैं?
ब्रिक्स में रूस, भारत, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं, और हाल के वर्षों में कई अन्य देश भी इसके सदस्य बने हैं।
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