वाशिंगटन में इजरायल-लेबनान शांति वार्ता का तीसरा दौर शुरू, हिजबुल्लाह निरस्त्रीकरण पर केंद्रित चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश विभाग में 14 मई 2026 को इजरायल और लेबनान के अधिकारियों के बीच शांति वार्ता का तीसरा दौर शुरू हुआ। एक इजरायली सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वाशिंगटन में जारी यह वार्ता शुक्रवार, 15 मई को भी जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच ठोस प्रगति की संभावना अभी अनिश्चित बनी हुई है।
वार्ता में कौन शामिल है
इजरायल का प्रतिनिधित्व वाशिंगटन में इजरायली राजदूत येचिएल लीटर और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी कर रहे हैं। लेबनान की ओर से अमेरिका में लेबनानी राजदूत नाडा हमादेह मुआवाद और अमेरिका में लेबनान के पूर्व राजदूत साइमन करम शामिल हैं। वार्ता अमेरिकी विदेश विभाग की मध्यस्थता में आयोजित हो रही है।
वार्ता के मुख्य मुद्दे
इजरायली अधिकारी के अनुसार, वार्ता का केंद्रीय उद्देश्य हिजबुल्लाह का निरस्त्रीकरण और दोनों देशों के बीच आधिकारिक द्विपक्षीय संबंध स्थापित करना है। इजरायल का रुख यह है कि जब तक कोई समझौता नहीं होता, वह हिजबुल्लाह के खिलाफ हवाई और जमीनी अभियान जारी रखने की स्वतंत्रता बनाए रखेगा।
दूसरी ओर, लेबनान ने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं — अपने क्षेत्र से इजरायली सेना की वापसी, इजरायली हमलों पर रोक, और सीमावर्ती गाँवों के विनाश को रोकना। इन परस्पर विरोधी माँगों के चलते वार्ता की राह आसान नहीं दिखती।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
मौजूदा संघर्ष का दौर 2 मार्च को शुरू हुआ, जब हिजबुल्लाह ने इजरायल की ओर रॉकेट दागे। इसके बाद 26 अप्रैल को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इजरायल रक्षा बल (IDF) को लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले का आदेश दिया। तब से IDF और इजरायल वायु सेना लगातार हिजबुल्लाह के रॉकेट प्रक्षेपण स्थलों और आधारभूत ढाँचे को निशाना बना रहे हैं।
गौरतलब है कि 24 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच युद्धविराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा की थी और इसे 'ऐतिहासिक' कदम बताया था। यह घोषणा ओवल ऑफिस में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद की गई थी।
सैन्य स्थिति
IDF के अनुसार, लेबनान से इजरायल की ओर नियमित रूप से हवाई हमले हो रहे हैं। सेना ने दावा किया है कि कई रॉकेट प्रक्षेपण स्थलों को नष्ट किया जा चुका है और हिजबुल्लाह के बुनियादी ढाँचे को व्यापक नुकसान पहुँचाया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब वार्ता की मेज पर दोनों पक्ष एक-दूसरे से बातचीत कर रहे हैं।
आगे क्या
वार्ता का यह दौर तीसरा है और दोनों पक्षों के बीच गहरे मतभेद बने हुए हैं। अमेरिकी मध्यस्थता में जारी इस प्रक्रिया का अगला रुख शुक्रवार की बैठक के बाद स्पष्ट होगा। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि हिजबुल्लाह निरस्त्रीकरण का मुद्दा किसी भी स्थायी समझौते की सबसे बड़ी बाधा बना रहेगा।