ऋषिकेश में उज्जैनी एक्सप्रेस के तीन डिब्बे पटरी से उतरे, यार्ड में ट्रैक बदलते वक्त हुआ हादसा
सारांश
मुख्य बातें
ऋषिकेश के खांड गांव विस्थापित क्षेत्र के पास सोमवार रात 9:23 बजे उज्जैनी एक्सप्रेस के तीन डिब्बे पटरी से उतर गए, जब स्टेशन यार्ड में ट्रेन का ट्रैक बदला जा रहा था। राहत की बात यह रही कि हादसे के वक्त ट्रेन में कोई यात्री सवार नहीं था, जिससे बड़ा जानमाल का नुकसान टल गया।
हादसे का घटनाक्रम
19 मई की रात स्टेशन यार्ड में ट्रैक परिवर्तन के दौरान उज्जैनी एक्सप्रेस के तीनों कोच अनियंत्रित हो गए। हादसा इतना भीषण था कि एक डिब्बा पूरी तरह पटरी से अलग होकर ट्रैक के बाहर लटक गया। घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई, जिसे जीआरपी के जवानों ने मोर्चा संभालते हुए हटाया।
राहत और बचाव अभियान
घटना के तुरंत बाद रेल प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। क्रेन की सहायता से बुरी तरह क्षतिग्रस्त तीनों कोच को पटरी से हटाने का काम जारी रहा। हादसे की भयावह तस्वीरें सामने आने के बाद ट्रेन के संचालन को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। रेलवे ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।
हाल की रेल दुर्घटनाओं का संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देश में रेल सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ी हुई हैं। इससे महज दो दिन पहले, 17 मई की तड़के राजस्थान के कोटा में 12431 राजधानी एक्सप्रेस की एक एसी बोगी में भीषण आग लग गई थी, जिसमें 68 यात्री सवार थे। कोटा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) के बयान के अनुसार, सभी यात्री सुरक्षित रहे और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। आग लगने के कारणों की जाँच अभी जारी है। उल्लेखनीय है कि वह ट्रेन केरल के तिरुवनंतपुरम से रवाना होकर दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर रविवार दोपहर 12:30 बजे पहुँचने वाली थी।
इसके अतिरिक्त, नामपल्ली रेलवे स्टेशन पर हैदराबाद-जयपुर स्पेशल एक्सप्रेस की दो एसी बोगियों में भी आग लगने की घटना सामने आई थी। गौरतलब है कि यह लगातार तीसरी बड़ी रेल घटना है जिसमें सौभाग्यवश जनहानि नहीं हुई।
आगे क्या
रेलवे अधिकारियों ने यार्ड में ट्रैक बदलने की प्रक्रिया के दौरान हुई इस चूक की विस्तृत जाँच के आदेश दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यार्ड संचालन प्रोटोकॉल की समीक्षा आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।