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अर्धचक्रासन: गर्दन और पीठ दर्द से मिनटों में राहत, आयुष मंत्रालय ने बताया सही तरीका

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अर्धचक्रासन: गर्दन और पीठ दर्द से मिनटों में राहत, आयुष मंत्रालय ने बताया सही तरीका

सारांश

घंटों डेस्क पर बैठने से होने वाले गर्दन और पीठ दर्द का सरल समाधान है अर्धचक्रासन। आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, रक्त शर्करा नियंत्रित करता है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है — बस 10-15 सेकंड की मुद्रा, दिन में 3-5 बार।

मुख्य बातें

अर्धचक्रासन एक बैकबेंडिंग योगासन है जिसमें शरीर आधे पहिए के आकार में पीछे झुकता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन रीढ़ के लचीलेपन और फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार करता है।
यह अग्न्याशय को उत्तेजित कर रक्त शर्करा नियंत्रित करने में सहायक है।
प्रत्येक मुद्रा में 10-15 सेकंड रुकें और प्रक्रिया को 3-5 बार दोहराएँ।
उच्च रक्तचाप , हृदय रोग , गर्भावस्था और गंभीर स्लिप डिस्क में विशेषज्ञ की सलाह अनिवार्य है।

घंटों डेस्क पर बैठकर काम करने वाले लोगों में गर्दन, कमर और पीठ का दर्द तेज़ी से बढ़ रहा है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, अर्धचक्रासन (हाफ व्हील पोज़) एक प्रभावशाली बैकबेंडिंग योगासन है, जो रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बेहतर करता है और श्वसन तंत्र को मज़बूत करता है। आधुनिक गतिहीन जीवनशैली में यह आसन एक सरल और कारगर समाधान के रूप में उभरा है।

अर्धचक्रासन क्या है

संस्कृत में 'अर्ध' का अर्थ आधा और 'चक्र' का अर्थ पहिया होता है। इस आसन में शरीर आधे पहिए के आकार में पीछे की ओर मुड़ता है, जिससे रीढ़, छाती और कंधों पर लाभकारी खिंचाव उत्पन्न होता है। आयुष मंत्रालय इसे रीढ़ के लचीलेपन और फेफड़ों की कार्यक्षमता सुधारने के लिए अत्यधिक प्रभावी मानता है।

स्वास्थ्य लाभ

मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, यह आसन अग्न्याशय को उत्तेजित करता है, जिससे रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है। छाती और कंधों में खिंचाव के कारण फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और श्वसन संबंधी विकारों में राहत मिलती है। इसके अलावा, यह आसन तनाव कम करने और शरीर की मुद्रा (पोस्चर) को सुधारने में भी उपयोगी है।

सही तरीका — चरण दर चरण

आयुष मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार अर्धचक्रासन इस प्रकार करें:

सीधे खड़े हों और दोनों पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें। दोनों हाथों को कमर पर टिकाएँ। इसके बाद गहरी साँस लेते हुए धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें — घुटने सीधे रहें और सिर पीछे की ओर झुका रहे। इस स्थिति में 10-15 सेकंड तक रुकें और सामान्य रूप से साँस लेते रहें। फिर धीरे-धीरे साँस लेते हुए प्रारंभिक स्थिति में लौट आएँ। इस पूरी प्रक्रिया को 3-5 बार दोहराना चाहिए।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

उच्च रक्तचाप, चक्कर आने की समस्या या हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन किसी विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और गंभीर स्लिप डिस्क या कमर के निचले हिस्से में तीव्र दर्द से पीड़ित लोगों को भी इससे परहेज़ करने की सलाह दी जाती है।

क्यों ज़रूरी है यह आसन आज

गौरतलब है कि डिजिटल कार्यस्थलों के विस्तार के साथ-साथ गतिहीन जीवनशैली से जुड़ी मस्कुलोस्केलेटल समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। ऐसे में आयुष मंत्रालय द्वारा प्रमाणित यह सरल योगाभ्यास बिना किसी उपकरण के घर या कार्यालय में किया जा सकता है। नियमित अभ्यास से दीर्घकालिक राहत की उम्मीद की जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि योगासन दीर्घकालिक मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक उपाय है। गतिहीन कार्यस्थलों में एर्गोनॉमिक सुधार और नियमित ब्रेक के बिना केवल योग से स्थायी राहत की उम्मीद सीमित है। मंत्रालय को इन आसनों के साथ कार्यस्थल स्वास्थ्य नीतियों पर भी ज़ोर देना चाहिए, ताकि समस्या की जड़ — गतिहीनता — पर असरदार प्रहार हो सके।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अर्धचक्रासन क्या है और यह किसके लिए फायदेमंद है?
अर्धचक्रासन एक बैकबेंडिंग योगासन है जिसमें शरीर आधे पहिए के आकार में पीछे की ओर झुकता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार यह रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन, फेफड़ों की क्षमता और रक्त शर्करा नियंत्रण के लिए विशेष रूप से लाभकारी है — खासकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय तक डेस्क पर बैठकर काम करते हैं।
अर्धचक्रासन करने का सही तरीका क्या है?
सीधे खड़े होकर पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें और हाथ कमर पर रखें। गहरी साँस लेते हुए धीरे-धीरे पीछे झुकें, घुटने सीधे रखें और सिर पीछे की ओर झुकाएँ। इस स्थिति में 10-15 सेकंड रुकें, सामान्य साँस लेते रहें, फिर प्रारंभिक स्थिति में लौटें। यह क्रिया 3-5 बार दोहराएँ।
अर्धचक्रासन से गर्दन और पीठ दर्द में कैसे राहत मिलती है?
यह आसन शरीर के कुछ खास हिस्सों पर नियंत्रित दबाव डालकर गर्दन और कंधों के तनाव को दूर करता है। छाती और कंधों में खिंचाव से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और श्वसन संबंधी विकारों में भी राहत मिलती है।
किन लोगों को अर्धचक्रासन नहीं करना चाहिए?
उच्च रक्तचाप, चक्कर आने की समस्या या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को यह आसन विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और गंभीर स्लिप डिस्क या कमर के निचले हिस्से में तीव्र दर्द वाले लोगों को भी इससे परहेज़ करना चाहिए।
अर्धचक्रासन के अन्य स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन अग्न्याशय को उत्तेजित करता है जिससे रक्त शर्करा नियंत्रण में सहायता मिलती है। साथ ही यह तनाव कम करने और शरीर की मुद्रा (पोस्चर) को बेहतर बनाने में भी प्रभावी है।
राष्ट्र प्रेस
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