क्या 'गोमुखासन' सर्वाइकल और कमर दर्द से राहत का सरल उपाय है?

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क्या 'गोमुखासन' सर्वाइकल और कमर दर्द से राहत का सरल उपाय है?

सारांश

गोमुखासन एक अद्भुत योगासन है जो न केवल सर्वाइकल और कमर दर्द से राहत दिलाता है, बल्कि तनाव और चिंता को भी कम करता है। जानिए इस आसन के फायदे और इसे करने की विधि।

मुख्य बातें

तनाव और चिंता कम करने में सहायक।
सर्वाइकल दर्द में राहत।
रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद।
फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है।

नई दिल्ली, 14 जून (राष्ट्र प्रेस)। योग केवल एक व्यायाम नहीं है, यह शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाने का एक अद्भुत तरीका है। अनेक आसनों में से, 'गोमुखासन' एक ऐसा आसन है, जो शरीर को ताकत और मन को शांति प्रदान करता है। 'गोमुखासन' में 'गौ' का अर्थ 'गाय' है और 'मुख' का अर्थ 'मुंह' है, जबकि आसन का अर्थ 'मुद्रा' होता है। इस आसन में मुड़े हुए पैर गाय के मुंह की आकृति बनाते हैं, और कोहनी गाय के कानों के समान होती है। इस आसन के अभ्यास से दिनभर की थकान मिट जाती है और मन की शांति मिलती है, जिससे ध्यान केंद्रित करना सरल हो जाता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, गोमुखासन तनाव और चिंता को कम करने में सहायक है। यह आसन शरीर की मांसपेशियों को सशक्त बनाता है, विशेषकर कंधे, पीठ और जांघों की मांसपेशियों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है।

सर्वाइकल समस्याओं के लिए भी गोमुखासन लाभकारी होता है, क्योंकि यह रीढ़ की हड्डी को सीधा और मजबूत बनाता है। कमर दर्द में भी इससे राहत मिलती है। इस आसन से शरीर में लचीलापन बढ़ता है और बैठने की मुद्रा में सुधार होता है। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है।

यह आसन अस्थमा के रोगियों के लिए भी उपयुक्त है, क्योंकि यह फेफड़ों के कार्य को बेहतर बनाता है और सांस लेने की प्रक्रिया को सुगम बनाता है।

डायबिटीज के मरीजों को भी गोमुखासन करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह योगासन शरीर के आंतरिक अंगों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इसे करने से रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद मिलती है और पाचन तंत्र भी सुधरता है। इसके अलावा, यह हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि इसे करने से तनाव कम होता है, जिससे दिल पर दबाव नहीं पड़ता और रक्तदाब भी संतुलित रहता है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, इसे करने से हाथ, कंधे, छाती और पीठ की अच्छी खींचाई होती है। इससे विशेष रूप से ट्राइसेप्स यानी बाजुओं के पीछे के हिस्से मजबूत होते हैं। यदि किसी को पीठ में दर्द है, तो यह आसन राहत प्रदान कर सकता है। इससे रोजमर्रा के कार्य सरल हो जाते हैं और थकान भी कम महसूस होती है।

गोमुखासन करने की विधि बेहद सरल है। सबसे पहले, जमीन पर पद्मासन की स्थिति में आराम से बैठ जाएं। फिर दाएं पैर को मोड़कर बाएं घुटने के ऊपर से ले जाएं। इसके बाद, बाएं पैर को मोड़कर दाईं जांघ के ऊपर से गुजारें और उसके तलवे को दाएं कूल्हे के नीचे जमीन से सटा दें। अब अपने दोनों हाथों को पीछे करके घुटनों के पीछे से आपस में जोड़ लें। इस दौरान धीरे-धीरे सांस लेते रहें और शरीर को आरामदायक स्थिति में रखें।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी हैं। इस प्रकार के योग आसनों को अपनाकर हम अपनी जीवनशैली को बेहतर बना सकते हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोमुखासन करने का सही समय क्या है?
सुबह का समय सबसे अच्छा होता है जब मन और शरीर दोनों ताजगी से भरे होते हैं।
क्या गोमुखासन का अभ्यास सभी उम्र के लोग कर सकते हैं?
जी हां, गोमुखासन का अभ्यास सभी उम्र के लोग कर सकते हैं, लेकिन किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
गोमुखासन करने से क्या-क्या लाभ होते हैं?
गोमुखासन करने से शरीर में लचीलापन बढ़ता है, तनाव कम होता है, और मानसिक शांति मिलती है।
राष्ट्र प्रेस