कंधों की अकड़न, पीठ-कूल्हे का दर्द और खराब पोस्चर: गोमुखासन से मिलेगी राहत

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कंधों की अकड़न, पीठ-कूल्हे का दर्द और खराब पोस्चर: गोमुखासन से मिलेगी राहत

सारांश

आधुनिक जीवनशैली से उपजी कंधों की अकड़न, पीठ का दर्द और खराब पोस्चर अब एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट हैं। आयुष मंत्रालय गोमुखासन को इन समस्याओं का प्राकृतिक समाधान मान रहा है — छाती खोलने, श्वसन स्वास्थ्य सुधारने और मांसपेशियों के तनाव को कम करने का एक सरल, घर पर किया जा सकने वाला उपाय।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए गोमुखासन की सलाह दी है।
गोमुखासन छाती को खोलता है, कंधों और कूल्हों को स्ट्रेच करता है, और श्वसन क्षमता में सुधार लाता है।
डेस्क जॉब और लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाली कंधों की अकड़न और पीठ के दर्द में यह आसन विशेष रूप से कारगर है।
नियमित अभ्यास से पोस्चर सुधरता है, मानसिक तनाव कम होता है, और अस्थमा जैसी श्वसन समस्याओं में राहत मिलती है।
गर्भवती महिलाएँ और गंभीर जोड़ों की समस्या वाले व्यक्तियों को योग विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

नई दिल्ली, 12 मई। आधुनिक जीवनशैली में लंबे समय तक बैठे रहने, न्यून शारीरिक गतिविधि और मानसिक तनाव के कारण कंधों में अकड़न, पीठ में कमजोरी, कूल्हे में दर्द और श्वसन संबंधी समस्याओं का प्रसार बढ़ रहा है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इन व्यापक समस्याओं के समाधान के लिए गोमुखासन (गाय के मुँह के आकार का योगासन) के नियमित अभ्यास की सलाह दी है। मंत्रालय के विश्लेषण में सांस लेने में कठिनाई, कंधों की जकड़न, खराब मुद्रा और निचले शरीर की समस्याओं को अक्सर मांसपेशियों के तनाव और गतिशीलता की कमी से जोड़ा जाता है।

आधुनिक जीवनशैली और स्वास्थ्य संकट

डेस्क जॉब, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहना और एक ही मुद्रा में बने रहना — ये सब मांसपेशियों में खिंचाव, तनाव और लचक की कमी का कारण बनते हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, अस्थमा जैसी श्वसन समस्याएं, कंधों में अकड़न, पीठ की कमजोरी, कूल्हे में दर्द और खराब पोस्चर अक्सर इन्हीं कारकों से उत्पन्न होती हैं। यह समझ विश्व योग दिवस की तैयारियों के तहत आम जनता को सरल और प्रभावी योगासनों से परिचित कराने के मंत्रालय के प्रयास का हिस्सा है।

गोमुखासन के शारीरिक लाभ

गोमुखासन छाती को खोलने, कंधों और कूल्हों को गहराई से स्ट्रेच करने और रीढ़ की हड्डी को सुदृढ़ करने में विशेष रूप से प्रभावी है। इस आसन का नियमित अभ्यास श्वसन स्वास्थ्य में सुधार लाता है और लंबे समय तक बैठे रहने या शारीरिक निष्क्रियता से उत्पन्न मांसपेशियों के तनाव को कम करता है। छाती के विस्तार से सांस लेना आसान हो जाता है, जिससे अस्थमा जैसी श्वसन समस्याओं में राहत मिलती है।

व्यापक स्वास्थ्य लाभ

गोमुखासन के अभ्यास से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं: (1) छाती का विस्तार — सांस लेना आसान होता है और श्वसन क्षमता बढ़ती है; (2) कंधों और पीठ की अकड़न में कमी — डेस्क जॉब से होने वाली जकड़न दूर होती है; (3) कूल्हों और निचले शरीर की लचक — जोड़ों की गतिशीलता में सुधार होता है; (4) पोस्चर में सुधार — रीढ़ की हड्डी सीधी होती है और खराब मुद्रा ठीक होती है; (5) मानसिक शांति — शरीर में तनाव कम होता है और मानसिक सुकून मिलता है।

सुरक्षित अभ्यास के लिए सावधानियाँ

गोमुखासन का अभ्यास सही तरीके से और उचित मार्गदर्शन में करना अत्यावश्यक है। शुरुआत में यदि कठिनाई हो तो धीरे-धीरे अभ्यास को बढ़ाएँ। गर्भवती महिलाएँ, घुटने या कंधे की गंभीर समस्या वाले व्यक्ति, और किसी भी पूर्व-मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति वाले लोगों को योग्य चिकित्सक या प्रमाणित योग विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। आयुष मंत्रालय का मानना है कि सही तरीके से किया गया गोमुखासन न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी एक समग्र समाधान है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सरल योगासनों में निहित है। तथापि, गोमुखासन को अस्थमा का 'इलाज' मानना भ्रामक होगा — यह एक पूरक उपचार है जो श्वसन स्वास्थ्य को समर्थन देता है। असली चुनौती यह है कि डेस्क-बाउंड आबादी इसे नियमित रूप से अभ्यास करे और जीवनशैली में संतुलन लाए। बिना गतिविधि, पोषण और तनाव प्रबंधन में बदलाव के, अकेला योग अधूरा रहेगा। आयुष मंत्रालय को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि कौन-सी समस्याएँ योग से सुलझेंगी और कौन-सी चिकित्सकीय हस्तक्षेप माँगती हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोमुखासन क्या है और इसे कैसे करते हैं?
गोमुखासन एक योगासन है जिसका नाम इसकी मुद्रा से आता है, जो गाय के मुँह जैसी दिखती है। इसमें एक पैर को मोड़कर नितंब के नीचे रखा जाता है, दूसरा पैर ऊपर की ओर मोड़ा जाता है, और हाथ पीठ के पीछे जुड़े होते हैं। यह आसन छाती, कंधों, कूल्हों और रीढ़ को गहराई से स्ट्रेच करता है।
गोमुखासन कंधों की अकड़न को कैसे दूर करता है?
गोमुखासन में कंधों और छाती को एक साथ स्ट्रेच किया जाता है, जिससे मांसपेशियों का तनाव कम होता है। डेस्क जॉब से होने वाली कंधों की जकड़न और पीठ की कमजोरी इस आसन के नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे दूर होती है।
क्या गोमुखासन अस्थमा को ठीक कर सकता है?
गोमुखासन अस्थमा का 'इलाज' नहीं है, लेकिन छाती को खोलने और श्वसन क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे अस्थमा के लक्षणों में राहत मिल सकती है। यह एक पूरक उपचार है और किसी भी श्वसन समस्या के लिए चिकित्सकीय सलाह अनिवार्य है।
गोमुखासन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
गर्भवती महिलाएँ, घुटने या कंधे की गंभीर समस्या वाले व्यक्ति, पीठ की गंभीर चोट वाले, और किसी भी पूर्व-मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति वाले लोगों को योग्य चिकित्सक या प्रमाणित योग विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
गोमुखासन के अभ्यास के लिए कितनी अवधि आवश्यक है?
शुरुआत में 30 सेकंड से 1 मिनट तक अभ्यास करें, और धीरे-धीरे इसे 3-5 मिनट तक बढ़ाएँ। सप्ताह में कम से कम 4-5 दिन नियमित अभ्यास से सर्वोत्तम परिणाम मिलते हैं।
राष्ट्र प्रेस