भुजंगासन की 5 आम गलतियाँ जो कमर को नुकसान पहुँचाती हैं, आयुष मंत्रालय ने बताया सही तरीका

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भुजंगासन की 5 आम गलतियाँ जो कमर को नुकसान पहुँचाती हैं, आयुष मंत्रालय ने बताया सही तरीका

सारांश

आयुष मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि भुजंगासन की ५ आम गलतियाँ — जैसे कोहनी बाहर फैलाना और कमर अत्यधिक मोड़ना — कमर और गर्दन को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती हैं। विश्व योग दिवस से पहले मंत्रालय ने सही तकनीक और सावधानियाँ साझा की हैं।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने भुजंगासन (कोबरा पोज़) की 5 आम गलतियाँ चिह्नित की हैं जो कमर, गर्दन और कंधों को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
प्रमुख गलतियों में कोहनी बाहर फैलाना , कंधे कान तक चढ़ाना , कमर अत्यधिक मोड़ना और नितंब अत्यधिक कसना शामिल हैं।
सही अभ्यास में गर्दन रीढ़ की सीध में , कंधे नीचे और पीछे , तथा जाँघ-घुटने जमीन से जुड़े रखना आवश्यक है।
शुरुआती अभ्यासकर्ता 10–15 सेकंड से शुरू कर धीरे-धीरे समय बढ़ाएँ।
कमर, गर्दन या कलाई दर्द में यह आसन न करें; गर्भवती महिलाएँ डॉक्टर की सलाह से ही करें।

नई दिल्ली: विश्व योग दिवस की निकटता के साथ जैसे-जैसे लोगों में योगासन सीखने की जागरूकता बढ़ रही है, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भुजंगासन (कोबरा पोज़) के सही अभ्यास और इसके दौरान होने वाली आम गलतियों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की है। मंत्रालय के अनुसार, यह आसन यदि गलत तरीके से किया जाए तो कमर दर्द और चोट का कारण बन सकता है।

भुजंगासन क्या है और क्यों है यह खास

भुजंगासन सांप की मुद्रा जैसा दिखने वाला योगासन है, इसीलिए इसे कोबरा पोज़ भी कहते हैं। इस आसन में शरीर का ऊपरी भाग धीरे-धीरे ऊपर उठता है, जबकि निचला भाग जमीन से जुड़ा रहता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन कमर, पीठ और कंधों को मजबूत बनाने के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। यह खासकर उन लोगों के लिए लाभकारी है जिन्हें लंबे समय तक बैठकर काम करना पड़ता है।

भुजंगासन में होने वाली आम गलतियाँ

आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कई लोग इस आसन को करते समय छोटी-छोटी गलतियाँ कर बैठते हैं, जो शरीर को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती हैं। मंत्रालय द्वारा चिह्नित प्रमुख गलतियाँ इस प्रकार हैं:

पहली गलती — कोहनियों को बाहर की तरफ फैलाना, जिससे कंधों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। दूसरी गलती — कंधों को कानों की तरफ चढ़ा लेना, जो गर्दन में खिंचाव पैदा करता है। तीसरी गलती — नितंबों को अत्यधिक कसना, जिससे कमर की निचली हड्डियों पर दबाव बढ़ता है। चौथी गलती — कमर को जरूरत से ज्यादा मोड़ना, जो रीढ़ की हड्डी के लिए हानिकारक है। पाँचवीं गलती — एड़ियों को बाहर की तरफ फैलाना, जिससे पैरों का संतुलन बिगड़ता है। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि ये गलतियाँ गर्दन, कमर और कंधों पर अनुचित दबाव डालती हैं और पुरानी समस्याएँ बढ़ने का खतरा रहता है।

भुजंगासन करने का सही तरीका

आयुष मंत्रालय द्वारा सुझाए गए सही अभ्यास के चरण इस प्रकार हैं। सबसे पहले पेट के बल लेट जाएँ। पैर सीधे रखें और पंजों को पीछे की ओर फैलाएँ। हथेलियों को छाती के दोनों तरफ जमीन पर रखें। इसके बाद सांस अंदर लेते हुए धीरे-धीरे छाती, गर्दन और सिर को ऊपर उठाएँ

सही मुद्रा के लिए ध्यान रखें कि गर्दन रीढ़ की हड्डी की सीध में रहे, दृष्टि सामने की ओर हो और छाती आगे तथा ऊपर की तरफ उठी हुई रहे। कंधे नीचे और पीछे की ओर खींचे रहें — कानों से दूर। कोहनियाँ शरीर की तरफ और ऊपर की ओर रहें। जाँघ, घुटने और पैर पूरी तरह भूमि से जुड़े रहें। आसन के दौरान सांस सामान्य रखें।

कितने समय तक करें अभ्यास

मंत्रालय के विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती अभ्यासकर्ता 10 से 15 सेकंड तक इस मुद्रा में रह सकते हैं और धीरे-धीरे समय बढ़ा सकते हैं। सही तरीके से किए गए भुजंगासन से कमर मजबूत होती है, पीठ की मांसपेशियाँ लचीली बनती हैं, पाचन तंत्र सुधरता है और समग्र मुद्रा में सुधार आता है।

किन्हें नहीं करना चाहिए यह आसन

आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कमर, गर्दन या कलाई में दर्द हो तो यह आसन न करें। गर्भवती महिलाएँ इसे केवल डॉक्टर की सलाह से ही करें। इसके अलावा, शरीर की क्षमता से अधिक कमर न मोड़ें। मंत्रालय ने जोर देते हुए कहा है कि सही तकनीक से ही योग का पूरा लाभ मिलता है — अन्यथा यह लाभ के बजाय हानि का कारण बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी उजागर करती है कि भारत में योग की लोकप्रियता और उसके सही प्रशिक्षण के बीच की खाई अभी भी चौड़ी है। विश्व योग दिवस हर साल बड़े उत्साह से मनाया जाता है, पर प्रमाणित प्रशिक्षकों की पहुँच आम जनता तक सीमित है। डिजिटल माध्यम से मिलने वाले योग के अधूरे निर्देश अक्सर चोट का कारण बनते हैं — और भुजंगासन जैसे रीढ़-संवेदनशील आसनों में यह जोखिम और भी अधिक है। सरकार को केवल जागरूकता अभियान से आगे बढ़कर ज़िला स्तर पर प्रमाणित योग प्रशिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भुजंगासन में सबसे आम गलती क्या है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, भुजंगासन में सबसे आम गलती कोहनियों को बाहर की तरफ फैलाना और कंधों को कानों की तरफ चढ़ा लेना है। ये दोनों गलतियाँ गर्दन और कंधों पर अनावश्यक दबाव डालती हैं और चोट का कारण बन सकती हैं।
भुजंगासन कितने समय तक करना चाहिए?
आयुष मंत्रालय के विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को 10 से 15 सेकंड से शुरुआत करनी चाहिए और धीरे-धीरे समय बढ़ाना चाहिए। शरीर की क्षमता से अधिक दबाव न डालें।
भुजंगासन (कोबरा पोज़) के क्या फायदे हैं?
सही तरीके से किए गए भुजंगासन से कमर और पीठ की मांसपेशियाँ मजबूत व लचीली बनती हैं, पाचन तंत्र में सुधार होता है और समग्र शारीरिक मुद्रा बेहतर होती है। यह लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।
कौन लोग भुजंगासन नहीं करें?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, जिन लोगों को कमर, गर्दन या कलाई में दर्द हो, उन्हें भुजंगासन नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाएँ यह आसन केवल डॉक्टर की सलाह से करें।
आयुष मंत्रालय योग दिवस से पहले यह जानकारी क्यों दे रहा है?
विश्व योग दिवस की निकटता को देखते हुए आयुष मंत्रालय रोज़ाना विभिन्न योगासनों की सही विधि और सावधानियाँ साझा कर रहा है। मंत्रालय का उद्देश्य है कि लोग उत्साह में गलत तरीके से आसन करके खुद को नुकसान न पहुँचाएँ।
राष्ट्र प्रेस
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