अपने स्वास्थ्य के लिए जोड़ें 'पूर्ण भुजंगासन' – एक शक्तिशाली योगासन
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा के समग्र संतुलन का एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है। आजकल की भागदौड़ भरी जीवनशैली में बढ़ते तनाव और कमजोर रीढ़ की हड्डी जैसी समस्याओं के कारण योगासनों का महत्व और बढ़ गया है। इनमें से एक प्रगतिशील और प्रभावशाली आसन है 'पूर्ण भुजंगासन'।
'पूर्ण भुजंगासन' एक ऐसा योगासन है जो सर्प की तरह पूरी तरह से फन फैलाने की मुद्रा को दर्शाता है। इसके नियमित अभ्यास से रीढ़ को अत्यधिक लचीला और मजबूत बनाने में मदद मिलती है।
पूर्ण भुजंगासन मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी को गहराई से मोड़ने वाला आसन है। इसमें सामान्य भुजंगासन से आगे बढ़कर घुटनों को मोड़कर पैरों को सिर की ओर लाने का प्रयास किया जाता है, जिससे रीढ़ में पूर्ण आर्च बनता है। प्राचीन योग ग्रंथों में इसे कुंडलिनी ऊर्जा जागरण और आंतरिक अंगों के स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, पूर्ण भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाने, पेट की चर्बी कम करने, तनाव घटाने और फेफड़ों व हृदय के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभप्रद है। यह पेट के अंगों को उत्तेजित कर कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है।
योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस आसन को सावधानीपूर्वक करना चाहिए और शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को इसे किसी विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए। इसे करने के लिए, सबसे पहले योगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं। हथेलियां कंधों के पास रखें। सांस लेते हुए छाती, गर्दन और सिर को ऊपर उठाएं, कोहनियां थोड़ी मोड़ें और कंधों को पीछे की ओर खींचें। फिर घुटनों को मोड़कर पैरों के पंजे ऊपर उठाएं। सिर और गर्दन को पीछे की ओर खींचते हुए पैरों से सिर छूने की कोशिश करें। आराम से जितनी देर हो सके इस मुद्रा में रहें। इसके बाद धीरे-धीरे शवासन की स्थिति में वापस आएं। शिथिल होकर लेटें, गहरी सांस लें और हृदय गति और सांस को सामान्य होने दें।
यदि पीठ में अत्यधिक दर्द हो तो इसे न करें। इसके अलावा, गर्भवती महिलाएं और पेट के अल्सर वाले लोग इसे करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।