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भुजंगासन (कोबरा पोज): रीढ़ की हड्डी, पाचन और फेफड़ों को मज़बूत बनाने का सरल योगाभ्यास

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भुजंगासन (कोबरा पोज): रीढ़ की हड्डी, पाचन और फेफड़ों को मज़बूत बनाने का सरल योगाभ्यास

सारांश

घंटों कंप्यूटर पर बैठने से कमज़ोर हो रही रीढ़ के लिए भुजंगासन एक आज़माया हुआ समाधान है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह कोबरा पोज रीढ़, पाचन, किडनी और फेफड़ों — सभी को एक साथ लाभ पहुँचाता है।

मुख्य बातें

भुजंगासन (कोबरा पोज) आयुष मंत्रालय द्वारा अनुशंसित एक प्रमुख योगासन है।
यह रीढ़ की हड्डी को लचीला और मज़बूत बनाता है तथा पीठ दर्द में राहत देता है।
पाचन तंत्र और किडनी की कार्यक्षमता में सुधार लाता है; विषाक्त पदार्थ निकालने में सहायक।
फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है और श्वसन तंत्र को मज़बूत करता है।
मानसिक तनाव और थकान कम करता है; नियमित अभ्यास से आत्मविश्वास में वृद्धि।
गर्भवती महिलाओं और हर्निया के रोगियों को अभ्यास से पहले चिकित्सक परामर्श ज़रूरी।

भुजंगासन, जिसे अंग्रेजी में कोबरा पोज कहा जाता है, उन योगासनों में अग्रणी है जो रीढ़ की हड्डी को लचीला और मज़बूत बनाने के साथ-साथ पाचन तंत्र और फेफड़ों की कार्यक्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार लाते हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह पेट के बल लेटकर किया जाने वाला एक प्रमुख योगासन है, जो पैरों की उंगलियों से लेकर सिर तक समूचे शरीर को प्रभावित करता है। घंटों डेस्क पर बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह आसन विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है।

भुजंगासन क्या है और यह नाम कैसे पड़ा

संस्कृत में 'भुजंग' का अर्थ है सर्प। इस आसन को करते समय धड़ की मुद्रा फन फैलाए हुए कोबरा सांप जैसी दिखती है — इसीलिए इसे कोबरा पोज भी कहते हैं। यह कोई सामान्य खिंचाव-व्यायाम नहीं है; इसका प्रभाव मांसपेशियों, अंगों और मानसिक स्थिति तीनों पर एक साथ पड़ता है। नियमित अभ्यास से शरीर में ऊर्जा का संचार बढ़ता है और मन शांत रहता है।

स्वास्थ्य लाभ: शरीर और मन दोनों पर असर

आयुष मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, भुजंगासन के नियमित अभ्यास से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:

रीढ़ की हड्डी: यह आसन रीढ़ को 'एक्सटेंशन पोजीशन' में ले जाता है, जिससे कशेरुकाओं के बीच का दबाव कम होता है और पीठ दर्द में राहत मिलती है। लंबे समय तक बैठकर काम करने से उत्पन्न कमर की अकड़न में यह विशेष रूप से कारगर है।

पाचन तंत्र: पेट की मांसपेशियों पर पड़ने वाले दबाव और खिंचाव से पाचन क्रिया सक्रिय होती है। इसके अलावा, किडनी पर पड़ने वाले दबाव से उसमें मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकलने में सहायता मिलती है और उसकी कार्यक्षमता में सुधार होता है।

फेफड़े और श्वसन तंत्र: छाती का पूरी तरह खुलना फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है। यह आसन श्वास संबंधी समस्याओं — जैसे उथली साँस या श्वास नली की जकड़न — में राहत दे सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य: कंधों और छाती के खुलने से तनाव और थकान में कमी आती है। आलोचकों और योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह आसन आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक है, क्योंकि इसकी मुद्रा स्वाभाविक रूप से शरीर को सीधा और खुला रखती है।

भुजंगासन करने की सही विधि

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल सीधे लेट जाएँ और दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें। दोनों हाथों को धीरे-धीरे छाती के पास लाएँ और हथेलियाँ ज़मीन पर टिका दें। अब गहरी साँस लेते हुए नाभि के हिस्से को ऊपर उठाएँ और सिर को पीछे की ओर ले जाते हुए छत की तरफ देखें — इस दौरान पीठ धीरे-धीरे ऊपर की ओर मुड़ेगी। इस मुद्रा में कुछ देर बने रहें और सामान्य रूप से साँस लेते रहें। इसके बाद धीरे-धीरे वापस प्रारंभिक स्थिति में आएँ और शरीर को ढीला छोड़ दें।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

गर्भवती महिलाओं, हर्निया के रोगियों और हाल ही में पेट की सर्जरी करवाए लोगों को यह आसन करने से पहले किसी योग प्रशिक्षक या चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। यह आसन सुबह खाली पेट करना सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है।

नियमित अभ्यास का महत्त्व

योग विशेषज्ञों के अनुसार, भुजंगासन का लाभ एकल अभ्यास से नहीं, बल्कि निरंतर दैनिक अभ्यास से मिलता है। यह आसन आधुनिक गतिहीन जीवनशैली में रीढ़, फेफड़ों और मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने का एक सुलभ और प्रभावी उपाय है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि अधिकांश भारतीय योग-संबंधी सलाह अभी भी नैदानिक परीक्षणों की बजाय परंपरागत ज्ञान पर आधारित है। किडनी-विषहरण जैसे दावों को स्वतंत्र शोध का समर्थन सीमित मात्रा में मिला है और इन्हें सावधानी से पेश किया जाना चाहिए। गतिहीन जीवनशैली से उत्पन्न स्वास्थ्य संकट वास्तविक है — और योग उसका एक अंश है, संपूर्ण समाधान नहीं। जब तक योग के लाभों को मानकीकृत शोध से नहीं जोड़ा जाता, 'संजीवनी' जैसे शब्द जन-अपेक्षाएँ बढ़ाने का जोखिम उठाते हैं।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भुजंगासन (कोबरा पोज) क्या है?
भुजंगासन एक योगासन है जिसमें पेट के बल लेटकर धड़ को ऊपर उठाया जाता है, जिससे मुद्रा फन फैलाए कोबरा जैसी बनती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह रीढ़ को मज़बूत करने, पाचन सुधारने और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने वाला प्रमुख योगासन है।
भुजंगासन से रीढ़ की हड्डी को कैसे फायदा होता है?
यह आसन रीढ़ को 'एक्सटेंशन पोजीशन' में ले जाता है, जिससे कशेरुकाओं पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और पीठ की मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों में पीठ दर्द और कमर की अकड़न में यह विशेष रूप से राहत देता है।
भुजंगासन करने का सही तरीका क्या है?
पेट के बल सीधे लेटें, हथेलियाँ छाती के पास ज़मीन पर टिकाएँ, गहरी साँस लेते हुए नाभि को ऊपर उठाएँ और सिर को पीछे-ऊपर की ओर ले जाएँ। कुछ देर इस मुद्रा में रहें, सामान्य साँस लेते रहें, फिर धीरे-धीरे वापस आएँ।
भुजंगासन किन्हें नहीं करना चाहिए?
गर्भवती महिलाओं, हर्निया के रोगियों और हाल ही में पेट की सर्जरी करवाए लोगों को यह आसन करने से पहले चिकित्सक या योग प्रशिक्षक से परामर्श लेना चाहिए। बिना मार्गदर्शन के ग़लत तरीके से करने पर रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
भुजंगासन के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या लाभ हैं?
नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव और थकान कम होती है और मन शांत रहता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, छाती और कंधों के खुलने से आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।
राष्ट्र प्रेस
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